By दिव्यांशी भदौरिया | May 23, 2026
हिंदू धर्म में नौतपा का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब से साल के सबसे गर्म 9 दिनों की शुरुआत होती है। इन नौ दिनों को 'नौतपा' कहा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार नौतपा की शुरुआत 25 मई 2026 से हो रही है और इसका समापन 2 जून 2026 को होगा। धार्मिक शास्त्रों में माना गया है कि नौतपा के इन 9 दिनों में सूर्य देव अपने प्रचंड रुप में होते हैं। माना जाता है कि इस दौरान प्रकृति और शरीर में संतुलन बनाना बेहद जरुरी होता है।
सू्र्य को जल दें
हिंदू धर्म में सूर्यदेव की पूजा करना और जल से अर्घ्य देना बेहद शुभ माना जाता है। अगर नौतपा के दिनों में सुबह के समय तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित किया जाए, तो यह काफी शुभ होता है। ऐसा करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मन मजबूत होता है।
पानी की बर्बादी बिल्कुल न करें
नौतपा के दिनों में भयंकर गर्मी से पानी ही सबकी जान बचाता है। बड़े-बुजुर्ग बताते है कि इन 9 दिनों में पानी को बेकार बहाना पाप के समान माना जाता है। इसलिए इस मौसम में रागीरों के लिए प्याऊ लगवाना, पक्षियों के लिए छत पर पानी रखना और प्यासों को पानी पिलाना पुण्य कार्य माना जाता है।
दोपहर के समय धूप से दूरी बनाएं
नौतपा में गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में शास्त्रों और डॉक्टर दोनों के अनुसार, इन दिनों दोपहर की तेज धूप में बिना वजह घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। यदि बहुत जरुरी काम हो, तो चेहरे को पूरा कवर करके बाहर निकलें।
पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने से बचें
बड़े-बुजुर्गों और पुरानी लोक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के दिनों में पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाना या हरे पेड़ों की कटाई करना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भीषण गर्मी के इस समय प्रकृति बेहद संवेदनशील अवस्था में होती है। ऐसे में पर्यावरण की रक्षा करना और पौधों की देखभाल करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी समझी जाती है।
फ्रिज की जगह मिट्टी के घड़े का पानी पिएं
पहले जमाने में घरों में फ्रिज नहीं होते थे, तब लोग मटके या सुराही का पानी पीते थे। आयुर्वेद के हिसाब से मिट्टी के घड़े का पानी सेहत के लिए सबसे बेस्ट होता है। यह न सिर्फ गले को ठंडक देता है, बल्कि शरीर को बीमारियों से बचाता है।
तामसिक भोजन से दूरी बनाएं
नौतपा के समय में मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज और अत्यधिक मिर्च-मसालेदार (तामसिक) भोजन करना वर्जित होता है। शास्त्रों में माना गया है कि इससे शरीर का तापमान और अधिक बढ़ जाता है, जिससे पितृ दोष भी लग जाता है। इस दौरान बैंगन भूलकर न खाएं।
जल दान के पुण्य कार्य करें
नौतपा में सबसे बड़ा दान जल-दान माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इन दिनों राहगीरों को पानी पिलाएं, मीठा शरबत जरुरमंदों को दें, पानी का घड़ा या सत्तू दान करने से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है और सूर्य दोष भी शांत हो जाता है।
गहरों रंगों के वस्त्रों से दूरी बनाएं
इन 9 दिनों में काले, नीले या बहुत ही गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचें। गहरे रंग सूर्य की गर्मी को सोखता है, जिससे आपकी सेहत बिगड़ सकती है। इस दौरान कॉटन और हल्के रंग कपड़े पहनना सबसे बेस्ट है।
पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें
सनातन धर्म में सभी जीवों की सेवा को सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना गया है। नौतपा की भीषण गर्मी के दौरान पक्षियों और पशुओं की प्यास बुझाने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस समय घर की छत, बालकनी या आंगन में पक्षियों के लिए पानी से भरे पात्र रखना और आवारा पशुओं के लिए स्वच्छ जल की व्यवस्था करना मानवता और धर्म दोनों का पालन माना जाता है।