By डॉ. रमेश ठाकुर | Feb 21, 2026
पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में तारिक रहमान के रूप में नई सरकार शपथ ले चुकी है। खास बात ये है रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार में दो हिंदू सांसदों को मंत्री बनाया गया है। उनके इस निर्णय को भारत के साथ प्रत्यक्ष रूप से बिगड़े संबंधों को सुधारने की पहल के रूप में समूची दुनिया देख रही है। इस कदम से चीन-पाकिस्तान चिड़े भी हैं। वो नहीं चाहते कि बांग्लादेश भारत या उनसे वास्ता रखने लोगों को तवज्जो दे। लेकिन, तारिक रहमान ने उनके नापाक मंसूबों को धता बताते हुए, बड़ी सूझबूझता से कदम आगे बढ़ाया। बीते कुछ महीनों में 11 हिंदुओं के साथ हुई निर्मम बर्बरता ने बांग्लादेश की न सिर्फ थू थू करवाई, बल्कि दशको से मधुर संबंधों को भी पटरी से उतार दिया था। इसको लेकर दोनों मुल्कों में तल्खियां बनी हुई थीं। रहमान जानते हैं अगर माहौल ऐसा ही बरकरार रहा, तो रिश्तो की दूरियां घटने वाली नहीं? ऐसी अखरती दुश्वारियों पर गौर करते हुए ही रहमान ने अपनी कैबिनेट में हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सांसदों को अहम औहदे सौंपे ताकि रिश्तों में फिर से नरमी लाई जा सके। भारत ने भी उनके निर्णय को सराहा है।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारतीय हुकूमत का साथ लेकर और अपनी कैबिनेट में अल्पसंख्यक हिंदू मंत्रियों की आमद के साथ बांग्लादेश में अगले पांच सालों तक समानांतर सरकार चलाना चाहते हैं। इसी को ध्यान में रखकर जब उनकी पार्टी बीएनपी चुनावों में जीती तो सबसे पहले वह अपने धुरविरोधी विपक्षी नेता और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान के बिना बुलाए, ढ़लती शाम के बाद उनके आवास पहुंच गए। चुनावी गुस्सेबाजियों के इतर उनसे नई सरकार में सहयोग की गुजारिश करी। विपक्षी नेता ने भी राजनीतिक दुश्मनी छोड़कर उनका गर्मजोशी से अपने घर पर स्वागत किया। दरअसल, इस तरह की खूबसूरत परंपरा का प्रचार-प्रसार पूरे विश्व में होना चाहिए, कि चुनाव बाद विपक्ष से सत्ता पक्ष को कैसे व्यवहार करना चाहिए। ये उन देशों के लिए सीख भी है जहां पक्ष-विपक्ष आपस में अनैतिक कुकर्मों की सभी सीमाएं लांघ रहे हैं। रहमान उस विपक्षी नेता के घर भी पहुंचे जिनकी पार्टी चुनावों में तीसरे स्थान पर रही। नेशनल सिटीजन पार्टी के नाहिद इस्लाम को भी गले लगाया और बांग्लादेश के विकास में उनसे भी सहयोग मांगा। राजनीति में ऐसी तस्वीरों का दिखना दुर्लभ होता है, लेकिन बांग्लादेश में दिखी।
रहमान की जीत पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का उन्हें भाई बताना और उनकी जीत की खुशी में फूल-मिठाईयां को ढाका भेजना भी धूमिल संबंधों में रस भरने जैसा कहा जाएगा। साथ ही रहमान के शपथ में भारत सरकार की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का पहुंचना भी सुखद और नए संबंधों में नए सिरे से गढ़ने जैसा है। नए रंग में रिश्तों को रंगने की दरकार इसलिए भी महसूस होने लगी है क्योंकि बांग्लादेश की सत्यानाशाी के लिए जिस तरह से चीन-पाकिस्तान मिलकर घेराबंदी कर रहे हैं जिसका अंदाजा नवगठित सरकार के मुखिया को भी है। बांग्ला-हिंदू संबंध जितने बिगड़ेंगे, उतना फायदा ये दोनों मुल्क मिलकर उठाएंगे। पूर्व की कार्यकारी सरकार को इन्होंने कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के सह पर बांगाली और हिंदुओं को खूब लड़ाया गया। लेकिन संपन्न हुए 13वें राष्टृीय चुनाव में तीन हिंदू समुदाय के सांसद जीते हैं जिनमें निताई राॅय चैधरी को स्पीकर, चंटगांव से जीते अधिवक्ता दीपेन दीवान को पहाड़ी क्षेत्रों के संरक्षण के लिए मंत्री, तो वहीं गोयेश्वर राॅय चैधरी को महत्पूर्ण रेलमंत्री बनाया गया है।
बांग्लादेश में नवगठित हुकूमत के साथ करीब एक डे़ढ़-सालों से दंगों का दंश झेल रहे देश में आखिरकार नई सुबह का आगाज हो चुका है। आवाम को इस दिन का लंबे वक्त से इंतजार था। वहां काफी जद्दोजहद और राजनीतिक अस्थिरता के बीच हुए आम चुनावों में बीएनपी ने बड़े मार्जिन से विजय हासिल की है। कुल संसदीय 298 सीटों में 297 पर चुनाव हुए, उनमें से रिकॉर्ड 209 सीटें बीएनपी ने जीतीं। दूसरे नंबर पर जमात-ए-इस्लामी पार्टी रही जिसने 68 सीटें जीतीं। तारिक रहमान की नई कैबिनेट में डॉ. खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री, सलाहुद्दीन अहमद को गृह मंत्री, डॉ. अमीर खसरू महमूद को वित्त एवं प्लानिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुल मिलाकर तारिक रहमान ने शिक्षित और बुद्धिजीवी लोगों से अपनी कैबिनेट को सजाया र्है। कैबिनेट में कुल 50 मंत्री हैं जिनमें 25 कैबिनेट और 24 राज्य मंत्री शामिल हैं।
- डॉ. रमेश ठाकुर
सदस्य, राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD), भारत सरकार!