By एकता | Aug 05, 2026
6 अगस्त 2026 को पूरी दुनिया हिरोशिमा डे (Hiroshima Day) की 81वीं वर्षगांठ मनाएगी। यह दिन द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान जापान के शहर हिरोशिमा पर हुए परमाणु बम हमले में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है।
हर साल 6 अगस्त को हिरोशिमा डे मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया था। इस हमले में लाखों लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। हजारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई लोग रेडिएशन की वजह से सालों तक गंभीर बीमारियों से जूझते रहे। यही वजह है कि यह दिन हमें युद्ध की कीमत और शांति की अहमियत याद दिलाता है।
इस साल Remembrance, Responsibility and Resilience यानी याद रखना, जिम्मेदारी निभाना और मुश्किलों के बाद भी मजबूती से आगे बढ़ना देने को हिरोशिमा डे की थीम के तौर पर रखा गया है।
इस थीम का उद्देश्य उन लोगों को याद करना है जिन्होंने इस त्रासदी में अपनी जान गंवाई, साथ ही दुनिया को यह याद दिलाना है कि परमाणु हथियारों से मुक्त और शांतिपूर्ण भविष्य बनाना सभी देशों की जिम्मेदारी है।
हिरोशिमा डे की शुरुआत 6 अगस्त 1945 को हुई उस ऐतिहासिक घटना की याद में की गई, जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया था।
7 दिसंबर 1941: जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर नेवल बेस पर हमला किया, जिसके बाद अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया।
6 अगस्त 1945: सुबह 8:15 बजे अमेरिकी B-29 बॉम्बर Enola Gay ने हिरोशिमा पर Little Boy नाम का परमाणु बम गिराया। इस हमले में लगभग 1.3 लाख लोग तुरंत मारे गए, जबकि साल के अंत तक रेडिएशन और गंभीर चोटों के कारण मृतकों की संख्या करीब 1.4 लाख पहुंच गई।
9 अगस्त 1945: अमेरिका ने जापान के नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम Fat Man गिराया।
15 अगस्त 1945: जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया और द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया। तब से हर साल 6 अगस्त को हिरोशिमा डे मनाया जाता है।
6 अगस्त 1945 को हुआ हिरोशिमा पर परमाणु हमला इतिहास का पहला मौका था जब किसी युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया गया। अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर को निशाना बनाया और Little Boy नाम का परमाणु बम Enola Gay विमान से गिराया। कुछ ही सेकंड में शहर का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।
हजारों लोगों की मौके पर मौत हो गई और लाखों लोग घायल हुए। घर, स्कूल, अस्पताल और दूसरी जरूरी इमारतें बुरी तरह नष्ट हो गईं। इस हमले के तीन दिन बाद नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया गया।
हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमले का असर सिर्फ उस दिन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई पीढ़ियों तक महसूस किया गया।
हजारों लोगों की तुरंत मौत: धमाके और उसकी तेज गर्मी की वजह से करीब 70 से 80 हजार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। साल 1945 के अंत तक यह संख्या बढ़कर करीब 1.4 लाख हो गई।
रेडिएशन का खतरनाक असर: जो लोग बच गए, उनमें से हजारों रेडिएशन की चपेट में आ गए। उन्हें उल्टी, बुखार, बाल झड़ना, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में नुकसान और कमजोर इम्यूनिटी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियां: रेडिएशन के कारण कई लोगों में बाद के वर्षों में ल्यूकेमिया, थायरॉयड कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, फेफड़ों का कैंसर और मोतियाबिंद जैसी गंभीर बीमारियां देखने को मिलीं।
मानसिक आघात: हमले से बचने वाले लोग लंबे समय तक डर, तनाव, डिप्रेशन और अपने परिवार को खोने के दुख से जूझते रहे।
बच्चों पर भी पड़ा गहरा असर: इस हमले में कई बच्चे अनाथ हो गए, जबकि कई बच्चों को लंबे समय तक रेडिएशन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।
परमाणु हमले से बचने वाले लोगों को हिबाकुशा (Hibakusha) कहा जाता है। इनमें से कई लोगों को नौकरी, शिक्षा और शादी जैसे मामलों में भेदभाव का सामना करना पड़ा क्योंकि लोग रेडिएशन को लेकर डरे हुए थे।
हिरोशिमा की लगभग 90 प्रतिशत इमारतें नष्ट या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हजारों लोग बेघर हो गए और उन्हें खाने, पीने के पानी और इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा।