ऐतिहासिक 'मदर ऑफ ऑल डील्स': भारत और यूरोपीय संघ ने दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते पर लगाई मुहर

By रेनू तिवारी | Jan 27, 2026

वैश्विक व्यापार के मंच पर मंगलवार को एक नया इतिहास रचा गया। भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक अत्यंत महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है। इस समझौते को इसके व्यापक दायरे और आर्थिक प्रभाव के कारण 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया अस्थिर वैश्विक माहौल और अमेरिका की नई शुल्क नीतियों के कारण उत्पन्न व्यापार व्यवधानों से जूझ रही है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी से दुनिया को फायदा होगा। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष कोस्टा ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ ने व्यापार, सुरक्षा तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों में एक ‘नया अध्याय’ शुरू किया है। उन्होंने कहा, ‘‘ व्यापार समझौते नियम-आधारित आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं और साझा समृद्धि को बढ़ावा देते हैं। इसीलिए आज का मुक्त व्यापार समझौता ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है।’’

वॉन डेर लेयेन ने कहा, ‘‘ हमने ‘मदर ऑफ ऑल द डील्स’ (अब तक का सबसे बड़ा समझौता) किया है।’’ बहुप्रतीक्षित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता एक अत्यधिक महत्वपूर्ण समझौता है जिसे ‘मदर ऑफ ऑल द डील्स’ यानी अबतक का सबसे बड़ा समझौता कहा जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों की समग्र दिशा में महत्वपूर्ण विस्तार होने की उम्मीद है क्योंकि यह विविध क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलेगा। शिखर सम्मेलन के बाद, दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता के समापन की औपचारिक घोषणा करने के लिए एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे। समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर करने में कम से कम छह महीने लग सकते हैं क्योंकि दोनों पक्षों द्वारा इसकी कानूनी जांच आवश्यक होगी।

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यूरोपीय संघ और भारत ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू की थी, लेकिन कुछ मुद्दों के कारण 2013 में बातचीत स्थगित कर दी गई थी। जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू की गई। यूरोपीय संघ एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर का था। इसमें निर्यात करीब 76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60 अरब अमेरिकी डॉलर का था।

शिखर सम्मेलन में मुख्य तौर पर व्यापार, रक्षा एवं सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर ध्यान दिया गया। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। प्रस्तावित सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी (एसडीपी) दोनों पक्षों के बीच गहन रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देगी।

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