Rajasthan History: 5 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है राजस्थान का इतिहास, जानिए प्रदेश के रोचक फैक्ट्स

By अनन्या मिश्रा | Oct 04, 2023

राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है। भारत में साल 1949 में इसे राज्य के तौर पर शामिल किया गया था। इस राज्य को 'राजाओं की भूमि' और 'रजवाड़ों की धरती' कहा जाता है। राजस्थान भव्य राजमहल वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने हैं। यह राज्य पर्यटकों को हमेशा से अपनी तरफ आकर्षित करता रहा है। राजपूताना शासन के दौरान राजस्थान में काफी विकास हुआ। राजस्थान बाप्पा रावल, राणा कुंभा, राणा सांगा और राणा प्रताप जैसे प्रतापी राजाओं की जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है। 

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राजस्थान का इतिहास

प्राचीन काल में राजस्थान के कुछ हिस्से वैदिक और कुछ सिंधु घाटी सभ्यता से मिलते हैं। यहां पर बूंदी और भीलवाड़ा जिलों में पाषाण युग के सामान भी मिले हैं। वैदिक सभ्यता का मत्स्य साम्राज्य वर्तमान का जयपुर शहर है। पहले मत्स्य साम्राज्य की राजधानी विराटनगर हुआ करती थी। विराटनगर का नाम इसके संस्थापक राजा विराट पर रखा गया था। वहीं प्राचीन काल में भरतपुर, धौलपुर और करौली सूरसेन जनपद के अंतगर्त आते थे। इनकी राजधानी मथुरा हुआ करती थी। 

राजस्थान के अधिकांश हिस्सों पर 700 ईस्वी के दौरा गुर्जरों का कब्जा हो गया। गुर्जरों की राजधानी कन्नौज थी। तकरीबन 11 वीं शताब्दी तक गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य ने अरब आक्रमणकारियों से राजस्थान की रक्षा की। परंपरागत तौर पर राजस्थान में मौर्य शासन, गुप्त शासन, यवन-शुंग, कुषाण, हूण, ब्राह्मण, राजपूत, जाट, मीणा, यादव और वर्धन साम्राज्य का शासन रहा। 

राजपूतों का शासन

राजस्थान के कुछ इलाकों पर 1000 इस्वी में राजपूतों ने शासन किया। साल 1991 में तराइन के प्रथम युद्ध के दौरान पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गोरी को हराया। लेकिन साल 1192 में तराइन के दूसरे युद्ध में मुहम्मद गौरी की जीत हुई। मुहम्मद गौरी की जीत के साथ ही राजस्थान का एक हिस्सा मुगलों के अधीन हो गया। वहीं 13वीं शताब्दी के आते-आते भारत पर मुगलों ने कब्जा कर लिया और ज्यादातर राजपूत शासक दिल्ली में स्थापित मुगल सल्तनत के लिए काम करने लगे।

15वीं शताब्दी में अलवर के हेम चंद्र विक्रमादित्य ने अफगान शासकों को युद्ध में 22 बार हराया। इसमें मुगल शासक अकबर का नाम भी शामिल था। साल 1556 में पानीपत की दूसरी लड़ाई में मुगलों खिलाफ लड़ते हुए हेम चंद्र मारा गया। जिसके बाद कई राजपूत शासको ने अकबर के शासन में मुगल साम्राज्य को स्वीकार कर लिया। 17वीं शताब्दी के आसापस जब मुगल साम्राज्य अपनी पतन की ओर बढ़ने लगा, तब राजपूताना मराठे प्रभाव में आए। हालांकि वह ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं रह सके। 

आजादी के बाद राजस्थान की स्थिति

देश की आजादी के करीब 2 साल बाद राजस्थान राज्य का गठन हुआ था। हालांकि राजस्थान का गठन 7 चरणों में संभव हो पाआ। मार्च 1948 में अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली नामक देशी रियासतों का एक साथ विलय कर मत्स्य संध बनाया गया। फिर 5 मार्च 1948 में डूंगरपुर, झालावाड़, किशनगढ़, कोटा, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, बुंदी, शाहपुर और टोंक को राजस्थान संघ में शामिल किया गया। 

इसके बाद तीसरे चरण अप्रैल 1948 में उदयपुर को राजस्थान में शामिल किया गया। महाराणा प्रताप को राजप्रमुख बनाया गया। इसके बाद चौथे चरण मार्च 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर को राजस्थान संघ में जोड़ा गया। मई साल 1949 में पांचवे चरण में मत्स्य संघ का विलय राजस्थान में किया गया। 6वें चरण में सिरोही रियासत का विलय किया गया। फिर सातवें और आखिरी चरण में 1 नवंबर साल 1956 में हुआ इस दौरान आबू देलवाड़ा का विलय किया गया।

राजस्थान की भौगोलिक स्थिति

देश के उत्तरी-पश्चिमी भाग में राजस्थान स्थित है। इसके दक्षिणी भाग बांसवाडा और डुंगरपुर को कर्क रेखा स्पर्श करती है। गर्मी के मौसम में राजस्थान का सामान्य तापमान 23 से 46 डिग्री सेंटीग्रेट के बीच होता है। वहीं राज्य के क्षेत्रफल की बात करें तो यह 3,42,349 वर्ग किलोमीटर है। राजस्थान को चार भौगोलिक प्रदेशों में बांटा गया है।

1.पश्चिम का थार मरुस्थल 

2.अरावली पर्वतमाला 

3.पूर्व का मैदान और 

4.दक्षिण पूर्व हाड़ौती का पठार

राजस्थान की सीमाएं दक्षिण-पश्चिम में गुजरात, दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश, पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में पंजाब, उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रदेश और हरियाणा से सटा हुआ है। राजस्थान में कुल 33 जिले हैं। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक राजस्थान की जनसंख्या 6.89 करोड़ है। राजस्थान में महिलाओं की संख्या तकरीबन 3.5 करोड़ और पुरुषों की संख्या 3.2 करोड़ है।

राजस्थान के अन्य रोचक फैक्ट

30 मार्च साल 1949 को राजस्थान अपने अस्तित्व में आया था। इसलिए हर साल राजस्थान स्थापना दिवस 30 मार्च को मनाया जाता है।

राजा जय सिंह द्वितीय ने राजस्थान की राजधानी जयपुर की स्थापना की थी।

राजस्थान के थार रेगिस्तान से भारत की एक मात्र खारे पानी वाली नदी लूनी गुजरती है।

राज्य के पहले मनोनीत मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री और पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल थे।

राज्य के पहले राज्यपाल सरदार गुरूमुख निहाल सिंह थे। सरदार गुरूमुख निहाल सिंह ने रियासतों के पुनर्गठन के बाद 1 नवंबर साल 1956 को पदभार ग्रहण किया था।

इस राज्य को कर्नल जेम्स टॉड ने रायथान कहा था।

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