होला मोहल्ला-- घोड़ों पर सवार निहंग, हाथ में निशान साहब उठाए तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं

By विजयेन्दर शर्मा | Mar 17, 2022

श्री आनंदपुर साहिब । खालसा की शान के प्रतीक होला मोहल्ला का आज गुरु नगरी श्री आनंदपुर साहिब में गुरुवार से उद्घाटन होगा।  इससे पहले कीरतपुर साहिब में 14 से 16 मार्च तक होला मोहल्ला मनाया गया। आज 17 से 19 मार्च तक श्री आनंदपुर साहिब में यह पावन पर्व खालसा जाहो-जलाल के साथ मनाया जाएगा।

होला मोहल्ला को लेकर श्री कीरतपुर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब में देश-विदेश से आई संगत जुटने लगी है। यहां 1 17 से 19 मार्च तक होला मोहल्ला मनाया जाएगा। इसके लिए प्रशासन की तरफ से भी सभी प्रबंध किए गए हैं और अधिकारियों की ड्यूटियां लगाई गई हैं। श्रद्धालुओं को प्रशासन की तरफ से अपील की गई है कि कोरोना वैक्सीन लगाकर ही मेले में आए जिससे लोगों को सेहत और सुरक्षा को यकीनी बनाया जा सके। देश की केंद्रीय संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और जिला प्रशासन ने इस संबंध में पूरी तैयारी कर ली है।

 

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हालांकि होला मोहल्ला गुरुवार से शुरू हो जाएगा । लेकिन संगतों का भव्य सागर पहले से ही दिखाई दे रहा है और संगत पहले से ही तख्त श्री केसगढ़ साहिब और अन्य गुरुओं के घरों में बड़ी संख्या में जा रहे हैं। इस संबंध में तख्त श्री केसगढ़ साहिब के प्रबंधक मलकीत सिंह और अपर प्रबंधक हरदेव सिंह ने कहा कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि संगत के गुरु घर में आसानी से नतमस्तक होने की समुचित व्यवस्था की गई है।ट्विन हाउस, घाटरी हाउस, ठंडे पानी के फव्वारे, बिजली, पानी, करह प्रसाद की डिग्री, सरोवर में स्नान आदि सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

 

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गुरु के घरों में पेंटिंग और लाइटिंग का काम पूरा हो चुका है और बाहर से और नौकरों को बुलाया गया है ताकि उचित व्यवस्था की जा सके।  जहां करीब 4500 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया है, वहीं चिट-पहने पुलिस, महिला पुलिस, सीआईडी आदि उन पर कड़ी नजर रखे हुए हैं । संगत की सुविधा के लिए ट्रैफिक रूट तैयार किए गए हैं।सिखों के पवित्र धर्मस्थल श्री आनंदपुर साहिब मे होली के अगले दिन से लगने वाले मेले को होला मोहल्ला कहते हैं।

 

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सिखों के लिये होला मोहल्ला बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहाँ पर होली पौरुष के प्रतीक पर्व के रूप में मनाई जाती है।  इसीलिए दशम गुरू गोविंद सिंह जी ने होली के लिए पुल्लिंग शब्द होला मोहल्ला का प्रयोग किया। गुरु जी इसके माध्यम से समाज के दुर्बल और शोषित वर्ग की प्रगति चाहते थे। होला महल्ला का उत्सव आनंदपुर साहिब में छः दिन तक चलता है। इस अवसर पर घोड़ों पर सवार निहंग, हाथ में निशान साहब उठाए तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं।

 

पंज पियारे नगर कीर्तन का नेतृत्व करते हुए रंगों की बरसात करते हैं और जुलूस में निहंगों के अखाड़े नंगी तलवारों के करतब दिखते हुए बोले सो निहाल के नारे बुलंद करते हैं। आनंदपुर साहिब की सजावट की जाती है और विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है। कहते है गुरु गोबिन्द सिंह (सिक्खों के दसवें गुरु) ने स्वयं इस मेले की शुरुआत की थी। यह नगर कीर्तन हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहती एक छोटी नदी चरण गंगा के तट पर समाप्त होता है। 

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