10 मार्च से शुरू होंगे होलाष्टक, जानें क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य

By डा. अनीष व्यास | Mar 03, 2022

होलिका दहन से आठ दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाते हैं जो 10 मार्च से 18 मार्च तक चलेंगे। फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान इन आठ दिनों में शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन देवी-देवताओं की आराधना के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं। इन आठ दिनों के मध्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, मकान, जमीन, वाहन क्रय और विक्रय आदि निषेध माने गए हैं। वहीं 14 मार्च से सूर्य देव मीन राशि में गोचर करेंगे। सूर्य के मीन राशि में गोचर करने पर भी शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि होलाष्टक होलिका दहन से आठ दिन पहले से लग जाता है। इस बार होलाष्टक 10 मार्च से 18 मार्च तक लगेगा। फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। इन आठ दिनों में भले ही शुभ कार्य नहीं किए जाते, लेकिन देवी-देवताओं की आराधना के लिए ये दिन बहुत ही श्रेष्ठ माने जाते हैं। इस बार होलिका दहन 17 मार्च 2022 को होगा इसलिए होलाष्टक होली से आठ दिन पहले यानी 10 मार्च 2022 से लग जाएंगे। वहीं इसके अगले दिन यानी कि शुक्रवार 18 मार्च 2022, को होली खेली जाएगी।

दान-पुण्य से मिलेगा लाभ

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि एक तरफ होलाष्टक में 16 संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है, वहीं यह समय भगवान की भक्ति के लिए भी उत्तम माना जाता है। होलाष्टक के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान मनुष्य को अधिक से अधिक भगवत भजन और वैदिक अनुष्ठान करने चाहिए, ताकि समस्त कष्टों से मुक्ति मिल सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से हर तरह के रोग से छुटकारा मिलता है और सेहत अ'छी रहती है।

होलाष्टक और इसका धार्मिक महत्व

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि होलाष्टक होलिका दहन से आठ दिन पहले से लग जाता है। इस बार होलाष्टक 10 मार्च से 18 मार्च तक लगेगा। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही होती है। होलाष्टक के दिन से होली की तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसे में होलाष्टक के दौरान लोग शुभ काम नहीं करते और करने से बचते हैं।

क्यों लगते है होलाष्टक

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि होलाष्टक को लेकर एक कथा प्रचलित है कि राजा हिरण्यकश्यप बेटे प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करना चाहते थे। और इसके लिए उन्होंने इन आठ दिन प्रहलाद को कठिन यातनाएं दीं। इसके बाद आठवें दिन बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान था) के गोदी में प्रहलाद को बैठा कर जला दिया। लेकिन फिर भी प्रहलाद बच गए। अतः ऐसे में इन आठ दिनों को अशुभ माना जाता है और कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। होलाष्टक के दौरान सोलह संस्कार सहित सभी शुभ कार्यों को रोक दिया जाता है। इन दिनों गृह प्रवेश या किसी अन्य भवन में प्रवेश करने की भी मनाही होती है। इतना ही नहीं, नई शादी हुई लड़कियों को ससुराल की पहली होली देखने की भी मनाही होती है।

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होलाष्टक पर न करें ये कार्य 

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक लग जाता है।  होलाष्टक लगते ही हिंदू धर्म से जुड़े सोलह संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।  चाहे कोई नया घर खरीदना हो या कोई नया व्यवसाय शुरू करना हो सभी शुभ कार्य रोक दिये जाते हैं। यदि इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनके अंतिम संस्कार के लिए भी शांति कराई जाती है। एक मान्यता अनुसार किसी भी नविवाहिता को अपने ससुराल की पहली होली नहीं देखनी चाहिए। 

होलाष्टक पर करें आराधना 

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि एक तरफ होलाष्टक में 16 संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है, वहीं यह समय भगवान की भक्ति के लिए भी उत्तम माना जाता है। होलाष्टक के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान मनुष्य को अधिक से अधिक भगवत भजन और वैदिक अनुष्ठान करने चाहिए, ताकि समस्त कष्टों से मुक्ति मिल सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से हर तरह के रोग से छुटकारा मिलता है और सेहत अच्छी रहती है। 

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास बता रहे है होलाष्टक पर करने के विशेष उपाय।

संतान के लिए

यदि किसी कपल को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो वह होलाष्टक में लड्डु गोपाल की विधि विधान से पूजा पाठ करें। इस दौरान हवन भी करें जिसमें गाय का शुद्ध घी और मिश्री का इस्तेमाल करें। इस उपाय को करने से निसन्तान को भी संतान प्राप्त हो जाती है।

करियर में सफलता के लिए

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि यदि आप अपने करियर में तरक्की पर तरक्की चाहते हैं तो होलाष्टक में यह उपाय करें। घर या ऑफिस में जौ तिल और शक्कर से हवन करवाएं। ऐसा कर आपके करियर में आने वाली सभी बाधाएं खत्म हो जाएगी। आप जिस भी फील्ड में काम स्टार्ट करेंगे उसमें आसानी से सफलता का स्वाद चख सकेंगे।

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धन प्राप्ति के लिए

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि यदि आप आर्थिक रूप से कमजोर हैं या अत्यधिक धन की कामना रखते हैं तो होलाष्टक में यह उपाय जरूर करें। कनेर के फूलए गांठ वाली हल्तीए पीली सरसों और गुड़ के द्वारा अपने घर में हवन करें। ऐसा करने से पैसों से जुड़ी सभी दिक्कतें दूर हो जाएगी। इतना ही नहीं संपत्ति से जुड़े मामलों में भी लाभ होगा।

अच्छी हेल्थ के लिए 

अपनी अच्छी सेहत के लिए आपको होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। ये जाप करने के बाद गुग्गल से हवन भी करना न भूलें। मान्यता के अनुसार ऐसा करने से असाध्य रोग से मुक्ति प्राप्त होती है।

सुखमय जीवन के लिए

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि यदि आपके जीवन में अत्यधिक दुख हैं तो होलाष्टक में हनुमान चालीसा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना शुरू कर दें। इससे आपके सभी दुख समाप्त हो जाएंगे। जीवन में खुशियां ही खुशियां होगी। आपकी लाइफ सुख सुविधाओं से सज्जित होगी।

- डा. अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

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