By अनन्या मिश्रा | Sep 08, 2025
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष का समय रहता है। इस पावन मौके पर पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किए जाते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितरों को तर्पण करने और विधिविधान से श्राद्ध करने से व्यक्ति को पूर्वजों की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पूर्णिमा श्राद्ध - 07 सितंबर 2025
प्रतिपदा श्राद्ध - 08 सितंबर 2025
द्वितीया श्राद्ध - 09 सितंबर 2025
तृतीया श्राद्ध - 10 सितंबर 2025
चतुर्थी श्राद्ध - 10 सितंबर 2025
पंचमी श्राद्ध - 11 सितंबर 2025
महा भरणी - 11 सितंबर 2025
षष्ठी श्राद्ध - 12 सितंबर 2025
सप्तमी श्राद्ध - 13 सितंबर 2025
अष्टमी श्राद्ध - 14 सितंबर 2025
नवमी श्राद्ध - 15 सितंबर 2025
दशमी श्राद्ध - 16 सितंबर 2025
एकादशी श्राद्ध - 17 सितंबर 2025
द्वादशी श्राद्ध - 18 सितंबर 2025
त्रयोदशी श्राद्ध - 19 सितंबर 2025
मघा श्राद्ध - 19 सितंबर 2025
चतुर्दशी श्राद्ध - 20 सितंबर 2025
सर्वपितृ अमावस्या - 21 सितंबर 2025
पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध तिथि अनुसार किया जाता है। जिस भी दिन पितरों का निधन हुआ हो, उसी तिथि के हिसाब से पितृपक्ष में श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध के दिन पितरों का प्रिय भोजन बनाना चाहिए और ब्राह्मण, कौए, गाय, कुत्ता और बिल्ली को खाना जरूर खिलाना चाहिए। इसको पंचबलि कहा जाता है। बता दें कि श्राद्ध के दिन सबसे पहले तर्पण करना चाहिए। तर्पण के लिए जौ, काले तिल और जल से अपने पितरों को अर्घ्य दें। हालांकि श्राद्ध पक्ष में रोजाना तर्पण देना जरूरी है। इस दौरान दान करने का भी विशेष महत्व माना जाता है।