By रेनू तिवारी | Aug 05, 2026
होम्योपैथी डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में रजिस्ट्रेशन देने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने 5 अगस्त से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल के कारण मुंबई के प्रमुख अस्पतालों—जैसे KEM, सायन, नायर और JJ अस्पताल—सहित पूरे राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। MARD का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। चूंकि यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, इसलिए बिना किसी स्पष्ट कानूनी और रेगुलेटरी ढांचे के इस नीति (BHMS-CCMP रजिस्ट्रेशन) को लागू करना मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
MARD ने कोर्ट के अंतिम फैसले तक BHMS-CCMP रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। संगठन ने राज्य भर के रेजिडेंट डॉक्टरों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों के समाधान की भी मांग की है। संगठन के अनुसार, हड़ताल के पहले 24 घंटों (खासकर 5 अगस्त) के दौरान इमरजेंसी और कैजुअल्टी सेवाएं चालू रहेंगी ताकि मरीजों को कोई बड़ी परेशानी न हो। हालांकि, OPD सेवाएं, रूटीन ड्यूटी, इलेक्टिव सर्जरी और एकेडमिक गतिविधियां पूरी तरह से बंद रहेंगी। अगर कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है, तो 6 अगस्त से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी और सभी रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
MARD ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन किसी खास चिकित्सा पद्धति या उसके डॉक्टरों के खिलाफ नहीं है; बल्कि इसका मकसद मरीजों की सुरक्षा, वैज्ञानिक मानकों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना है।
सरकारी अस्पतालों में प्रभावित होने वाली सेवाओं की सूची
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ़ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) की हड़ताल से राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में गैर-इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित होंगी।
इस हड़ताल का असर मुंबई के चार नगर निगम (BMC) द्वारा संचालित अस्पतालों की सेवाओं पर भी पड़ेगा, क्योंकि वहां के डॉक्टर भी इसमें शामिल होंगे।
विरोध प्रदर्शन के तहत, सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) सेवाएं अगले आदेश तक बंद रहेंगी। हड़ताल के लंबे समय तक चलने की उम्मीद है, और जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और अन्य ज़िलों के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका बुरा असर पड़ने की आशंका है।