By Ankit Jaiswal | Sep 27, 2026
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल आया है। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर नए हमलों की खबर के बाद गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत 3% से ज्यादा बढ़ गई। इन हमलों में सरकारी ऊर्जा कंपनी अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा भी किया गया है। इससे पहले से दबाव झेल रही वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने गुरुवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक संवेदनशील ठिकाने और लाल सागर के किनारे बसे यानबू शहर में अरामको की सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। हूती समूह के मुताबिक, दोनों हमलों ने अपने लक्ष्य हासिल किए हैं। यह दावा हूती समूह द्वारा संचालित यमन समाचार एजेंसी में जारी बयान में किया गया है।
वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन बलों ने कहा कि उन्होंने हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब की तरफ दागी गई 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया है। सऊदी अधिकारियों ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि इन हमलों से किसी तरह का नुकसान हुआ है या कोई व्यक्ति हताहत हुआ है। अरामको की ओर से भी सामान्य कामकाजी समय के बाहर इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
गौरतलब है कि अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल है जो वैश्विक तेल मांग का करीब 10% हिस्सा को पूरी करती है। ऐसे में उसकी तेल सुविधाओं या आपूर्ति मार्गों पर किसी भी तरह का बड़ा हमला बाजार में चिंता बढ़ा सकता है। तेल कारोबार में यह डर रहता है कि किसी प्रमुख उत्पादक देश के ठिकानों पर हमला होने से उत्पादन या आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
मध्य पूर्व में ताजा तनाव ऐसे समय बढ़ा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें फिर शुरू हुई हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि अमेरिका युद्ध खत्म करने से जुड़े पहले के समझौता ज्ञापन पर फिर लौटेगा।
यह मेमोरेडम ऑफ अंडरस्टैडिंग अगस्त के मध्य में बिना किसी शांति समझौते के खत्म हो गया था। पेजेशकियन ने नवंबर में होने वाले अमेरिका के मध्यावधि चुनाव से पहले इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई है।
सिंगापुर की स्पार्टा कमोडिटीज की सीनियर विश्लेषक जून गोह ने भी कहा कि ईरान से जुड़ा युद्ध जारी रहने तक तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने की संभावना है। उनके मुताबिक, स्थिति का साफ समाधान नहीं निकलने से दुनिया के कई हिस्सों में तेल भंडार और उपलब्ध आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ रहा है।
बता दें कि तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहता है। कच्चा तेल महंगा होने पर परिवहन, उत्पादन और कई जरूरी सामान की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में मध्य पूर्व में जारी तनाव और आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा पर दुनिया भर के बाजारों की नजर बनी हुई हैं।