कैसे 87 साल के शख्स ने इतने दिनों तक अमेरिका-इजरायल को पानी पिलाया, 40 सालों तक ईरान चलाने वाले खामेनेई की कहानी

By अभिनय आकाश | Mar 01, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व करने वाले और देश के राजनीतिक और सैन्य पथ को आकार देने वाले अयातुल्ला अली खामेनेई का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई, शनिवार को अमेरिकी समर्थन से किए गए इजरायली हमलों में मारे गए। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर खामेनेई के निधन की घोषणा की। खामेनेई मध्य पूर्व के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में से एक थे। वे 1989 में 50 वर्ष की आयु में सर्वोच्च नेता बने और 28 फरवरी, 2026 को अपनी मृत्यु तक सत्ता में बने रहे।

1979 की इस्लामी क्रांति 

खामेनेई, रूहोल्लाह खुमैनी के करीबी थे, जो क्रांति के प्रमुख नेता और ईरान के पहले सर्वोच्च नेता बने थे। 1989 में खुमैनी की मृत्यु के बाद, खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी चुना गया। सर्वोच्च नेता बनने से पहले, खामेनेई ईरान के राष्ट्रपति रह चुके थे। समय के साथ, उन्होंने राजनीति, सेना और अदालतों पर अपना नियंत्रण और भी मजबूत कर लिया। आलोचकों का कहना था कि उनके शासनकाल में ईरान एक सैन्य तानाशाही जैसा बन गया था।

ब्लास्ट में एक हाथ गंवाया

27 जून 1981 में खामनेई एक न्यूज कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। तभी एक व्यक्ति पत्रकार की वेश भूषा में दाखिल होकर सामने टेबल पर एक छोटा सा टेप रिकार्डर रख दिया। सभी को लगा कि कोई पत्रकार भाषण रिकार्ड करने आया है। लेकिन पत्रकार के वेश में आया शख्स किसी और मंसबे से वहां आया था। उसने जो टेप रिकॉर्डर वहां रखा था वो कोई आम टेप रिकार्डर नहीं था। उसमें एक बम फिट था। खामनेई अपना भाषण शुरू करते है। तभी उनके नजदीक रखे टेप रिकॉर्डर में ब्लास्ट हुआ। टेप रिकार्डर ब्लास्ट खामनेई को जान से मारने की साजिश के तहत रखा गया था। इसके पीछे का मकसद 1979 में आई इस्लामिक क्रांति की नींव हिलाई जा सके। इस विस्फोट में खामनेई का दाया हाथ पैरालाइज हो गया। वहीं उनके एक कान के सुनने की क्षमता भी खत्म हो गई। वो अभी भी अपनी इनकी शारिरीक कमजोरियों के साथ ईरान की सत्ता पर मजबूती से बैठे हुए हैं। ईरान को एक मजहबी तानाशाही में लाने में अयातुल्ला खामनेई और उनके गुरु कहे जाने वाले रोहिल्ला खुमैनी का बड़ा हाथ माना जाता है। 

क्षेत्रीय संघर्ष 

मध्य पूर्व में सशस्त्र समूहों को खामेनेई के समर्थन ने भी उनकी विरासत को आकार दिया। ईरान ने हमास का समर्थन किया, जिसने 7 अक्टूबर, 2023 को इज़राइल पर घातक हमला किया। इस हमले से एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष शुरू हो गया। इसके तुरंत बाद, ईरान समर्थित एक अन्य समूह, हिज़्बुल्लाह ने इज़राइल पर रॉकेट दागने शुरू कर दिए। इसके बाद हुए संघर्ष ने हिज़्बुल्लाह के नेतृत्व को कमजोर कर दिया, जिसमें उसके शीर्ष नेता हसन नसरल्लाह भी शामिल थे। इन बढ़ते तनावों और क्षेत्रीय संघर्षों में ईरान की भूमिका के कारण अंततः ईरानी धरती पर सीधे हमले हुए, जिनका परिणाम खामेनेई की हत्या वाले हमले के रूप में सामने आया।

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