राष्ट्रमंडल खेलों का इतिहास: 4 बार बदले गए नाम, इस वजह से दो बार नहीं हो सका आयोजन

By अभिनय आकाश | Jul 27, 2022

ओलंपिक की तरह ही कॉमनवेल्थ गेम्स एक मल्टी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल कंपटीशन है। मल्टी-स्पोर्टिंग कार्यक्रम का यह 22वां आयोजन 28 जुलाई से 8 अगस्त 2022 के बीच होने जा रहा है। इन खेलों में 72 देशों की भागीदारी होगी और 11 दिनों के कार्यक्रम के दौरान आठ पैरा-स्पोर्ट्स के साथ 19 खेलों का आयोजन किया जाएगा।  भारत की तरफ से इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 215 खिलाड़ियों को भेजा जा रहा है। इन खिलाड़ियों से कई पदक आने की उम्मीद है। इस बार के प्रतियोगिता में महिला क्रिकेट को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा एथलेटिक्स, बैडमिंटन, मुक्केबाजी, कुश्ती, हॉकी, जूडो समेत कई अन्य प्रतियोगिताएं भी होंगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत कैसे हुई। जब ओलंपिक पहले से ही मौजूद थे तो इनकी जरूरत क्यों पड़ी? 

कॉमनवेल्थ गेम्स या राष्ट्रमंडल खेल एक बहुराष्ट्रीय खेल आयोजन है। इसके साथ ही इसमें कई खेल एक साथ खेले जाते हैं। इस खेल में वो सभी देश हिस्सा लेते हैं, जो ओलंपिक के भी सदस्य हैं। इसका आयोजन हर चार साल में एक बार होता है। इसमें वो सभी खेल खेले जाते हैं जो ओलंपिक का हिस्सा होते हैं। इसके अलावा भी इसमें अपने भी कुछ खास खेल होते हैं। इस खेल का आयोजन और नियंत्रण का काम राष्ट्रमंडल खेल संघ संभालता है।

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क्या है इसकी पृष्ठभूमि

1911 में किंग जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक का जश्न मनाने के लिए लंदन में 'फेस्टिवल ऑफ एम्पायर' आयोजित किया गया था। जश्न के हिस्से के रूप में एक इंटर-एम्पायर चैंपियनशिप आयोजित की गई। जिसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और यूनाइटेड किंगडम की टीमों ने हिस्सा लिया। मुक्केबाजी, कुश्ती, तैराकी और एथलेटिक्स जैसे खेलों का आयोजन हुआ।  विजेता को 2 फीट 6 इंच ऊंचे और 340 ऑउंस वजन वाले सिल्वर कप के रूप में एक ट्राफी मिली। विजेता देश कनाडा था। एक तरफ एम्स्टर्डम में ओलंपिक खेल चल रहे थे, दूसरी तरफ इस प्रतियोगिता का कोई विकास नहीं हुआ। उस ओलंपियाड में एम्पायर एथलीटों के बीच मित्रता की शानदार भावनाओं ने एम्पायर मीटिंग्स के पुनरुद्धार के विचार को पुनर्जीवित किया। पहला राष्ट्रमंडल खेल, जिसे उस समय ब्रिटिश साम्राज्य खेलों के रूप में जाना जाता था, कनाडा में 1930 में हैमिल्टन, ओंटारियो में आयोजित किया गया था। 

द्वितीय विश्व युद्ध की वजह से दो बार रद्द किया गया

1930 में हैमिल्टन में पहले खेलों की सफलता के साथ ही इसका नियमित रूप से आयोजन भी किया जाने लगा। 1930 के बाद से केवल दो बार को छोड़कर हर चार साल में कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित किए जाते हैं। 1942 और 1946 में द्वितीय विश्व युद्ध का असर खेल के आयोजन पर भी पड़ा था और इसे रद्द कर दिया गया था। गौर करने वाली बात ये है कि दुनिया भर में अन्य खेलों की स्थापना एशियाई, पैन एम, अफ्रीकी खेलों और शीतकालीन ओलंपिक जैसे भौगोलिक या जलवायु कारकों पर की गई है, राष्ट्रमंडल खेलों की स्थापना इतिहास पर की गई है। राष्ट्रमंडल खेलों की एक अनूठी विशेषता एकमात्र ऐसे खेल हैं जो एक समान भाषा साझा करते हैं। सभी एथलीट और अधिकारी एक दूसरे के साथ अंग्रेजी में बातचीत कर सकते हैं, जिससे एक ऐसा माहौल बन गया है जिसके कारण राष्ट्रमंडल खेलों को लंबे समय से "मैत्रीपूर्ण खेलों" के रूप में जाना जाता है।

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4 बार बदला जा चुका है नाम

हर चार साल में एक बार होने वाले खेलों के खिताब का 1930 से अब तक 4 बार नाम बदला जा चुका है। राष्ट्रमंडल खेलों को 1930 से 1950 तक ब्रिटिश साम्राज्य खेल, 1954 से 1966 तक ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल खेलों और 1970 से 1974 तक ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेलों के रूप में जाना जाता था। 2018 में सीडब्ल्यूजी पहला वैश्विक बहु-खेल आयोजन बन गया, जिसमें पुरुषों और महिलाओं की समान संख्या में पदक शामिल थे। बॉबी रॉबिन्सन, जो उस समय कनाडा में एथलेटिक्स के एक प्रमुख खिलाड़ी थे, इस आयोजन के पीछे की प्रेरक स्रोत थे।  पहले खेलों में 11 देशों के 400 एथलीट शामिल हुए। 

कौन-कौन बने मेजबान

कॉमनवेल्थ गेम्स की पहली मेदबानी का अवसर कनाडा के शहर हैमिल्टन को प्राप्त हुआ। कनाडा ने बाद में 1954 में वैंकूवर, 1978 में एडमोंटन और 1994 में विक्टोरिया में खेलों का आयोजन किया। ऑस्ट्रेलिया ने चार मौकों 1938 में सिडनी, 1962 में पर्थ, 1982 में ब्रिस्बेन और 2006 में मेलबर्न में इसकी मेजबानी की है। 1998 में, मलेशिया में कुआलालंपुर ने मेजबानी की। किसी एशियाई देश में पहली बार खेल 2010 में आयोजित किया गया। इस बार मेजबान देश था दुनिया क सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत।  इसे राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया। इस बार राष्ट्रमंडल खेल ब्रिटेन के बर्मिंघम में आयोजित होने वाले हैं। 

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