By अभिनय आकाश | Jul 28, 2022
दुनिया के नक्शे पर ऐसा देश जो बीते दो दशकों में दक्षिण एशिया की राजनीति पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। उस मुल्क का नाम है अफगानिस्तान जहां 21 साल के लंबे अतंराल के बाद 2021 के अगस्त में बड़े बदलाव देखने को मिला और तालिबान राज ने फिर से दस्तक दे दी। तालिबान से पाकिस्तान की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। यहां तक की तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद उस वक्त के पाकिस्तानी आका इमरान ने इसे गुलामी की बेरियों से आजाद होने सरीखा बताया था। लेकिन भारत के भौगोलिक लिहाजे से भी अफगानिस्तान बेहद महत्वपूर्ण रोल निभाता है। लेकिन अब भारत की कूटनीति के चलते तालिबान के सुर बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। तालिबान ने अपील की है कि सभी हिंदू और सिख अफगानिस्तान वापस लौट आए, जिन्होंने डर की वजह से देश छोड़ा था। तालिबान ने ये भी आश्वासन दिया है कि वो इनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखेगा। अब ऐसे में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि ऐसा क्या हो गया जो तालिबान ने पाकिस्तान का साथ छोड़ भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। बता दें ऐसा नहीं है कि ये बस रातो रात बदलाव आ गया है, बल्कि ये भारत की कूटनीति का नतीजा है।
भारत ने तालिबान में विकास के लिए बहुत सारे काम किए हैं। जिसके बाद तालिबान भी अब ये समझ चुका है कि भारत के साथ ही उसकी तरक्की और बेहतरी के रास्ते खुलते हैं। भारत की तरफ से यह संकेत देने की कोशिश हुई कि वह अफगानिस्तान के साथ अपने रिश्ते मजबूत करना चाहता है। अफगानिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन को भारत उतरने की अनुमति दिए जाने के मामले में भी अभी विचार किया जा रहा है। अफगानिस्तान में भारत की एंट्री अब पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी बन चुकी है। ये इस बात का इशारा है कि भारत के रहते हुए अफगानिस्तान में पाकिस्तान की दाल नहीं गलने वाला है। भारत अपनी एक टीम को काबुल दूतावास पर तैनात कर चुका है।