By नीरज कुमार दुबे | Feb 16, 2024
पाकिस्तान में 8 फरवरी को हुए चुनावों को सबसे बड़ी धांधली करार देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने समर्थकों का आह्वान किया है कि वह सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करें। इस आह्वान को देश भर में जैसा समर्थन मिल रहा है उसको देखते हुए पाकिस्तानी सेना और कार्यवाहक सरकार के होश उड़ गये हैं क्योंकि सबको इस बात का डर है कि शनिवार को होने वाले विरोध प्रदर्शन के दौरान कहीं फिर से सेना मुख्यालय और सेना अधिकारियों के घर लोगों के निशाने पर नहीं आ जायें। इस आशंका को देखते हुए पाकिस्तानी सेना से जुड़े प्रतिष्ठानों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के घरों के बाहर कड़ा पहरा बैठा दिया गया है और सेना अधिकारियों के परिजनों की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गयी है। दरअसल पाकिस्तान में युवा पीढ़ी खासतौर पर देश की इस दुर्दशा के लिए सेना को ही जिम्मेदार ठहरा रही है। पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर प्रसारित कई वीडियोज में युवाओं को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि हमारी सेना ने आज तक कोई युद्ध नहीं जीता और आतंकवाद को बढ़ावा देकर तथा लोकतंत्र में हस्तक्षेप कर देश को हर मामले में पीछे धकेला है। पाकिस्तानी युवाओं का कहना है कि सेना किसी भी देश का गर्व होती है लेकिन पाकिस्तानी सेना हमारे लिये शर्म का विषय बन गयी है।
इस बीच, जनता का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तानी सेना भारत से लगी सीमाओं पर कुछ दिनों से आक्रामक व्यवहार दिखा रही है जिसका उसे करारा जवाब भी मिल रहा है। दरअसल संघर्षविराम उल्लंघन कर पाकिस्तानी रेंजर्स भारत को उकसाना चाहते हैं ताकि कोई बड़ी कार्रवाई हो और लोग सेना के समर्थन में एकजुट हो जायें। लेकिन पाकिस्तान के लोग सेना की इस चाल को भलीभांति समझ रहे हैं। पाकिस्तान के तमाम सोशल मीडिया अकाउंट्स को देख लीजिये या वहां के टीवी समाचार चैनलों पर चल रही बहसों को देख लीजिये सब जगह सबके निशाने पर सेना ही है। पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर चर्चा कर रहे कुछ विशेषज्ञ तो देश को इस हालात में धकेलने के लिए सेनाध्यक्ष असीम मुनीर को दोषी ठहराते हुए उनका इस्तीफा तक मांग रहे हैं। पाकिस्तान में सेनाध्यक्ष का इस्तीफा खुलेआम मांगना एक बिल्कुल ही नया चलन है जोकि यह भी दर्शा रहा है कि लोगों के मन में सेना का खौफ और सम्मान, दोनों खत्म हो चुका है। देखना होगा कि पाकिस्तान इस मुश्किल हालात से बाहर निकल पाता है या इसमें और फंसता चला जाता है।
-नीरज कुमार दुबे