चंदा मामा दूर वाली कविता अब बीते दौर की बात, चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण से भारत ने रच दिया नया इतिहास

By नीरज कुमार दुबे | Jul 14, 2023

आप सभी ने बचपन में चंदा मामा दूर के वाली कविता सुनी होगी लेकिन अब चंदा मामा दूर नहीं पास आने वाले हैं क्योंकि भारत ने आज जो इतिहास रचा है उसको देखकर दुनिया दांतों तले उंगली दबाए हुए है। भारत ने एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए अपने तीसरे चंद्र मिशन-‘चंद्रयान-3’ का जो सफल प्रक्षेपण किया वह यह भी दर्शाता है कि हम गलतियों से सबक लेने वाले और लक्ष्य के लिए कभी प्रयास नहीं छोड़ने वाले लोग हैं। पंद्रह साल में यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का यह तीसरा चंद्र मिशन था। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर लगी थीं कि भारत सफल होता है या नहीं। हर भारतीय की धड़कन भी जैसे-जैसे लान्च का समय करीब आ रहा था वैसे-वैसे तेज होती जा रही थी। देशभर में हवन पूजन और प्रार्थनाएं हो रही थीं कि हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत और देश की आकांक्षा सफल हो जाये और आखिरकार हमारे बाहुबली चंद्रयान-3 ने सफलता का स्वाद चखा। चंद्रयान के सफल प्रक्षेपण के बाद देश में खुशी की लहर है और एक दूसरे को बधाइयों का दौर चल रहा है। आज के अभियान के बाद अब चंद्र सतह पर एक बार फिर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का प्रयास किया जाएगा। इसमें सफलता मिलते ही भारत ऐसी उपलब्धि हासिल कर चुके अमेरिका, पूर्व सोवियत संघ और चीन जैसे देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा।


चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान-3 की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ 23 अगस्त को शाम पांच बजकर 47 मिनट पर किए जाने की योजना है। हम आपको बता दें कि गुरुवार को शुरू हुई 25.30 घंटे की उलटी गिनती के अंत में एलवीएम3-एम4 रॉकेट श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र के दूसरे ‘लॉन्च पैड’ से आज अपराह्न 2.35 बजे निर्धारित समय पर धुएं का घना गुबार छोड़ते हुए शानदार ढंग से आकाश की ओर रवाना हुआ। 


श्रीहरिकोटा का दृश्य


इसरो के अधिकारियों के अनुसार, उड़ान भरने के लगभग 16 मिनट बाद प्रणोदन मॉड्यूल रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गया और यह चंद्र कक्षा की ओर बढ़ते हुए पृथ्वी से 170 किमी निकटतम और 36,500 किमी सुदूरतम बिंदु पर एक अण्डाकार चक्र में लगभग पांच-छह बार पृथ्वी की परिक्रमा करेगा। एलवीएम3-एम4 रॉकेट अपनी श्रेणी में सबसे बड़ा और भारी है जिसे वैज्ञानिक 'फैट बॉय' या ‘बाहुबली’ कहते हैं। प्रक्षपेण देखने के लिए मौजूद हजारों दर्शक चंद्रयान-3 के रवाना होते ही खुशी से झूम उठे और सफल प्रक्षेपण के बाद वैज्ञानिकों ने तालियां बजाईं। लैंडर के साथ प्रणोदन मॉड्यूल, गति प्राप्त करने के बाद चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने के लिए एक महीने से अधिक लंबी यात्रा पर तब तक आगे बढ़ेगा जब तक कि यह चंद्र सतह से 100 किमी ऊपर नहीं पहुंच जाता। इसरो के वैज्ञानिकों ने कहा कि वांछित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद लैंडर मॉड्यूल चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के लिए उतरना शुरू कर देगा। आज रवाना हुआ ‘चंद्र मिशन’ 2019 के ‘चंद्रयान-2’ का अनुवर्ती मिशन है। भारत के इस तीसरे चंद्र मिशन में भी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का है। ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ इस अभियान का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा होगी।

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हम आपको याद दिला दें कि ‘चंद्रयान-2’ मिशन के दौरान अंतिम क्षणों में लैंडर ‘विक्रम’ पथ विचलन के चलते ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने में सफल नहीं हुआ था। यदि इस बार इस मिशन में सफलता मिलती है तो भारत ऐसी उपलब्धि हासिल कर चुके अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ जैसे देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा। 


इसरो अधिकारियों के बयान


बहरहाल, चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने मिशन नियंत्रण कक्ष (एमसीसी) से कहा कि रॉकेट ने चंद्रयान-3 को सटीक कक्षा में स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा, "बधाई हो, भारत। चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी है। हमारे प्रिय एलवीएम-3 ने पहले ही चंद्रयान-3 को पृथ्वी के चारों ओर सटीक कक्षा में स्थापित कर दिया है... और आइए हम चंद्रयान-3 को आगे की कक्षा में बढ़ाने की प्रक्रिया तथा आने वाले दिनों में चंद्रमा की ओर इसकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं व्यक्त करें।” सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान-3 की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ 23 अगस्त को शाम पांच बजकर 47 मिनट पर किए जाने की योजना है।


उधर, मिशन निदेशक एस मोहन कुमार ने कहा कि एलवीएम3 रॉकेट एक बार फिर इसरो का सबसे विश्वसनीय भारी प्रक्षेपण वाहन साबित हुआ है। उन्होंने कहा, "हम राष्ट्रीय आवश्यकताओं के साथ-साथ उपग्रह मांगों को ध्यान में रखते हुए इस वाहन की प्रक्षेपण आवृत्ति बढ़ाने की प्रक्रिया में हैं।" परियोजना निदेशक पी वीरमुथुवेल ने कहा कि प्रणोदन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल में बिजली उत्पादन सहित अंतरिक्ष यान के सभी मानक सामान्य हैं।


केंद्रीय मंत्री का बयान


दूसरी ओर, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज के प्रक्षेपण को भारत के लिए गौरव का क्षण करार दिया। भारत को गौरवान्वित करने के लिए इसरो टीम की सराहना करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने "श्रीहरिकोटा के द्वार खोलकर तथा भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को सक्षम करके इसे संभव बनाया है।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा था कि सफलता की कोई सीमा नहीं है और 'मुझे लगता है कि चंद्रयान ब्रह्मांड के अज्ञात क्षितिजों का पता लगाने के लिए आकाश की सीमा से आगे निकल गया है।' जितेंद्र सिंह ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले दिवंगत विक्रम साराभाई की सराहना करते हुए कहा कि आज का दिन उनके सपनों की पुष्टि का दिन भी है। उन्होंने कहा, ‘‘यह दिन उस सपने का संकेत है जो विक्रम साराभाई ने छह दशक पहले देखा था। उनके पास संसाधनों की भले ही कमी रही हो, लेकिन आत्मविश्वास की कभी कमी नहीं थी।’’ मंत्री ने कहा कि साराभाई और उनकी टीम को खुद पर, भारत की क्षमता और इसकी कुशलता पर भरोसा था। जितेंद्र सिंह और कई पूर्व इसरो प्रमुख इस प्रक्षेपण को देखने के लिए उपस्थित थे।


कुछ पुरानी बातें


हम आपको याद दिला दें कि इससे पहले चंद्रयान-1 को 2008 और चंद्रयान-2 मिशन को 2019 में अंजाम दिया गया था। पिछली बार की तरह इस बार भी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र को अन्वेषण के लिए चुना गया है क्योंकि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव उत्तरी ध्रुव की तुलना में बहुत बड़ा है। इसके आस-पास स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों में पानी की मौजूदगी की संभावना हो सकती है। चंद्रयान-3 मिशन में एक स्वदेशी प्रणोदन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और एक रोवर शामिल है जिसका उद्देश्य अंतर-ग्रहीय अभियानों के लिए आवश्यक नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करना और प्रदर्शित करना है। लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के बाद इसके भीतर से रोवर बाहर निकलेगा और चंद्र सतह पर चहलकदमी कर अपने उपकरण-एपीएक्सएस-एल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर की मदद से अन्वेषण कार्य को अंजाम देगा।


राष्ट्रपति की शुभकामनाएं


इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के तीसरे चंद्र मिशन-‘चंद्रयान-3’ के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई दी और कहा कि यह अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति के प्रति राष्ट्र की दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। राष्ट्रपति भवन ने राष्ट्रपति मुर्मू के हवाले से ट्वीट किया, ''भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर है। इसके लिए इसरो, टीम और उन सभी को शुभकामनाएं, जिन्होंने इस कार्य को पूरा करने के लिए अथक परिश्रम किया।’’ मुर्मू ने कहा, ''चंद्र अभियान की सफलता पर मेरी शुभकामनाएं।’’


प्रधानमंत्री ने दी बधाई


उधर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण के बाद कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय है। उन्होंने इस उपलब्धि को वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का प्रमाण बताया। मोदी ने यान के प्रक्षेपण के तत्काल बाद एक ट्वीट में कहा, ‘‘चंद्रयान-3 ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय लिखा है। यह हर भारतीय के सपनों और महत्वाकांक्षाओं को ऊपर उठाते हुए ऊंची उड़ान भरता है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का प्रमाण है। मैं उनकी भावना और सरलता को सलाम करता हूं!’’ इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि भारतीय अंतरिक्ष के क्षेत्र में 14 जुलाई 2023 का दिन हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा तथा यह राष्ट्र की आशाओं और सपनों को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का प्रश्न है, 14 जुलाई 2023 हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। हमारा तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-3 अपनी यात्रा का शुभारंभ करेगा। यह उल्लेखनीय मिशन हमारे देश की आशाओं और सपनों को आगे बढ़ाएगा।’’ 


कांग्रेस ने लिया श्रेय


दूसरी ओर, कांग्रेस ने ‘चंद्रयान-3’ का प्रक्षेपण किए जाने के बाद कहा कि यह सभी देशवासियों के लिए गर्व का विषय है और वह इसरो के सभी लोगों को सलाम करती है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के आत्मनिर्भर होने का एक लंबा इतिहास रहा है और इस दौरान इसे राजनीतिक नेतृत्व का भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति की स्थापना फरवरी, 1962 में की गई थी। इसके लिए होमी भाभा और विक्रम साराभाई का धन्यवाद। साराभाई ने अगस्त 1969 में इसरो बनाया। यह उनका और बाद में सतीश धवन का विज़न था, जिसने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक विशिष्ट विकासात्मक उद्देश्य दिया।’’ कांग्रेस नेता के अनुसार, ‘‘1972 और 1984 के बीच धवन ने हर तरह से इसरो समुदाय का मार्गदर्शन किया। यूआर राव से शुरू होकर अब तक उनके प्रत्येक उत्तराधिकारी ने साराभाई-धवन की विरासत को आगे बढ़ाया है और महत्वपूर्ण योगदान दिया है।’’

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