By अंकित सिंह | Jan 19, 2026
प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने महाराष्ट्र के चुनाव में भाजपा और महायुति की हुई जीत पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि महाराष्ट्र में जिस तरीके से भाजपा की जीत हुई है, यह अपने आप में दिखता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार राजनीतिक तौर पर अपने कद को ऊपर कर रहे हैं। नीरज दुबे ने दावा किया कि महाराष्ट्र की राजनीति में कई बड़े चाणक्य हुए लेकिन सबको देवेंद्र फडणवीस ने अपनी रणनीति से सबको पीछे छोड़ दिया।
नीरज कुमार दुबे ने कहा कि वह महाराष्ट्र में अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी सेवा दे चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री होने के बाद भी पार्टी संगठन के लिए उपमुख्यमंत्री पद का स्वीकार किया था। यह अपने आप में उन्होंने बड़ी कुर्बानी दी थी। लेकिन उन्होंने जो कार्यकर्ताओं को संदेश दिया था उसी का नतीजा है कि आज महाराष्ट्र में भाजपा ने जबरदस्ती जीत हासिल की है। कभी महाराष्ट्र में भाजपा एकदम अंतिम पार्टी हुआ करती थी। लेकिन आज महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और इसके पीछे देवेंद्र फडणवीस और संगठन का मेहनत है। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि ठाकरे बंधुओं का इस चुनाव में काफी कुछ दांव पर लगा था। वह पूरी तरीके से विफल रहे। ठाकरे बंधुओं की जो बांटने की राजनीति है, उसको जनता ने नाकार दिया।
दुबे ने कहा कि मुंबई के अलावा पुणे और पिंपरी चिंचवड़ जैसे शहरों में भी भाजपा का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। ये क्षेत्र पारंपरिक रूप से पवार परिवार के प्रभाव वाले माने जाते रहे हैं। यहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों का लंबे समय तक नियंत्रण रहा है। लेकिन इस चुनाव में भाजपा ने इन गढ़ों में सेंध लगाकर यह साबित कर दिया कि उसका संगठनात्मक विस्तार और जमीनी रणनीति अब पूरे राज्य में असर दिखा रही है। नागपुर, नाशिक और अन्य प्रमुख नगर निकायों में भी भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने स्पष्ट बहुमत या मजबूत स्थिति हासिल की है। इन नतीजों से यह संकेत मिलता है कि शहरी मतदाता भाजपा के विकास आधारित प्रचार और नेतृत्व से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता और डिजिटल सेवाओं जैसे मुद्दे चुनाव के दौरान प्रमुखता से उठे और मतदाताओं ने इन्हीं आधारों पर मतदान किया।
नीरज कुमार दुबे ने कहा कि विपक्षी दलों के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। ठाकरे और पवार नाम जो कभी महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे मजबूत ब्रांड माने जाते थे, वह इस चुनाव में अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा सके। कई स्थानों पर उनकी पार्टियों को न केवल सीटों का नुकसान हुआ बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति केवल एक चुनावी हार नहीं है बल्कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक रुझानों का संकेत है। इन चुनावों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए यह परिणाम एक संकेत के रूप में देखे जाएंगे। भाजपा के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है जबकि विपक्ष के लिए यह चेतावनी है कि यदि रणनीति और नेतृत्व में बदलाव नहीं किया गया तो भविष्य की राह और कठिन हो सकती है।