कैसे लॉकडाउन में भारत के सबसे गरीब जिलों में से एक ने आपदा को अवसर में बदला, अब परिधान उद्योग केंद्र बनने की राह पर है

By अभिनय आकाश | Aug 23, 2021

गांधी का इतिहास, गन्ने की मिठास, जहां है प्रकृति और धरती का मेल। बेजोड़, खूबसूरत जंगलों का नहीं है कोई तोड़। रहते हैं जहां बाघ और छिड़ता है बेतिया घराने का राग। जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार के एक जिले पश्चिमी चंपारण की जिसे साल 2009 से पहले बेतिया कहा जाता था। लेकिन 2009 के परिसीमन के बाद इसका नाम पश्चिमी चंपारण हो गया। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को चुनौती दी, एक-एक दिन में सैकड़ों जाने ली। साल 2020 में कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए 25 मार्च को भारत में संपूर्ण लाॅकडाउन घोषित किया गया और यहां कि 130 करोड़ की आबादी घरों में कैद हो गई। लेकिन कोरोना महामारी में जब पूरा देश लॉकडाउन का सामना कर रहा था उसके बाद बिहार का एक जिला पश्चिमी चंपारण सबसे प्रसिद्ध निर्यात के रूप में खुद को संवारने में लगा था। जिला प्रशासन के अनुमान के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से पश्चिम चंपारण में  1.20 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक आए। लेकिन जिला प्रशासन की मदद से, श्रमिकों ने विनिर्माण स्टार्टअप बनाने के लिए समूह बनाया जो बिहार के परिवर्तन के लिए एक मॉडल हो सकता है। देखते ही देखते बिहार के इस जिले से ट्रैक सूट लद्दाख भेजे जाते हैं और जैकेट का स्पेन में निर्यात होना शुरू हो गया है। कोरोना महामारी में पिछले साल जब लॉकडाउन लगा उसके बाद बिहार का पश्चिम चंपारण जिला सबसे प्रसिद्ध निर्यात के रूप में उभरा है। यह कहानी है भारत के सबसे गरीब और सबसे पिछड़े जिलों में से एक की जिसने आपदा को अवसर में बदल दिया। 

लॉकडाउन के बाद श्रमिकों की घर वापसी

इसे भी पढ़ें: पंजाब में गन्ना किसानों का आंदोलन, सिद्धू ने अपनी ही सरकार को घेरा, मुद्दे का जल्द हल निकालने की बताई जरूरत

मजदूरों का डेटा बेस हुआ तैयार और ऐसे बनी स्टार्टअप शुरू करने की योजान 

यह एक मुश्किल वक्त था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी क्योंकि जिला प्रशासन की ओर से इस भीषण त्रासदी और उससे उपजे संकट से पार पाने के लिए कुशलता से कार्य किया गया। क्वारंटीन के वक्त ही जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने प्रवासी श्रमिकों की स्किल को पहचाना और उनकी योग्यता के हिसाब से स्किल मैपिंग प्रोग्राम शुरू किया। धीरे-धीरे 80 हजार से अधिक श्रमिकों का एक डेटाबेस तैयार हो गया।अंग्रेजी वेबसाइट द प्रिंट से बात करते हुए जिला अधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि हमने पाया कि ये श्रमिक अपने क्षेत्र में अत्यधिक कुशल हैं। वे उत्पादन श्रृंखला के सभी कार्यक्षेत्रों को जानते थे। वे कम्प्यूटरीकृत कढ़ाई और लेजर तकनीक जानते थे। स्किल-मैपिंग की कवायद के बाद प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए इन मजदूरों की मदद ली। कुमार ने कहा कि चनपटिया ब्लॉक में राज्य खाद्य निगमों के बड़े गोदाम बेकार पड़े थे, इसलिए हमने उनसे संपर्क किया और उन्होंने हमें उनका इस्तेमाल करने दिया।

जिला प्रशासन की मदद से मिला ऋण

सारी कवायदों के बाद सबसे बड़ी जरूरत पैसों की थी। ऐसे में प्रशासन ने शुरुआत में न केवल उद्यमियों को मशीनरी और कच्चा माल खरीदने में मदद की बल्कि जिला अधिकारी कुंदन कुमार ने विभिन्न बैंकों से ऋण भी हासिल करने में श्रमिकों और बैकों के बीच बैठक की व्यवस्था करवाई। जिला प्रशासन के अनुसार, लगभग सभी इकाई मालिकों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 25 लाख से 50 लाख रुपये के बीच ऋण मिला है। लोन ने उन्हें पुराने उत्पादन केंद्रों से बिजली-करघे, कम्प्यूटरीकृत कढ़ाई मशीन, काटने के लिए लेजर और अन्य मशीनरी खरीदने और यहां तक कि समान उपकरण आयात करने में सक्षम बनाया। पहली इकाई आधिकारिक तौर पर अगस्त 2020 में लसानी गारमेंट्स द्वारा शोएब ताहिर द्वारा शुरू की गई थी, जो लुधियाना में काम करते थे। हालांकि, जिला प्रशासन 27 जून को वर्षगांठ मनाएगा, जिस दिन योजना को धरातल पर उतारने के लिए पहली बैठक आयोजित की गई थी। 

इसे भी पढ़ें: क्या है चीन का नया डेटा प्राइवेसी कानून, टेक उद्योग पर कैसा असर डालेगा?

स्टार्ट-अप क्षेत्र का भविष्य

स्टार्ट-अप ज़ोन इकाइयों ने अब तक स्पेन को उत्पादों का निर्यात किया है, और उन्हें और अधिक देशों में भेजने के लिए काम किया जा रहा है। द प्रिंट से बात करते हुए कभी सूरत में काम करने वाले अरुण कुमार ने कहा कि मेरी योजना सिर्फ खुद को व्यवस्थित करने की नहीं है। यह अधिक लोगों को अवसर देने के लिए है, ताकि हम पश्चिम चंपारण को अगला सूरत या लुधियाना बना सकें। एडीआर शर्ट्स के मालिक नवनीत ने कहा कि ब्रांड को लेकर वे बिहार, यूपी और दिल्ली के खुदरा विक्रेताओं के साथ नियमित रूप से संपर्क में हैं। उनकी योजना 2024 तक 25 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न करने की है।  

प्रमुख खबरें

Abhijit Dipke Attack | मुझ पर हमले के पीछे आरएसएस के लोग थे, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का आरोप

रिकॉर्ड के मोर्चे पर कौन भारी, कौन कमजोर

Mithun Chakraborty Birthday: मुंबई की सड़कों पर भूखे सोए, पहली Film से ही जीता National Award

Share Market Opening Today | अमेरिका-ईरान शांति समझौते का कमाल! लगातार दूसरे दिन झूमा शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती तेजी