By नीरज कुमार दुबे | Jun 08, 2026
मोदी विरोधी विपक्षी इंडिया गठबंधन को ताकत देने के उद्देश्य से उसकी बैठक में शामिल हुईं ममता बनर्जी को तब एक और बड़ा झटका लगा जब इंडिया गठबंधन की बैठक के समानांतर तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने अलग से बैठक कर टीएमसी से अलग होने और नया गुट बनाने का फैसला कर लिया। यही नहीं, टीएमसी के कई सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की और इस दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी उपस्थित रहे। इन घटनाक्रमों ने राष्ट्रीय राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक बागी सांसद दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर खुद को अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली संसदीय इकाई से अलग एक स्वतंत्र गुट के रूप में मान्यता दिलाने का प्रयास करना। दूसरा विकल्प सामूहिक इस्तीफे का है। यदि इनमें से किसी भी योजना को अमल में लाया जाता है तो यह ममता बनर्जी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। माना जा रहा है कि मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के दिल्ली आने पर टीएमसी के बागी सांसद उनसे मुलाकात कर सकते हैं।
हालांकि ममता बनर्जी के करीबी सूत्रों का दावा है कि बागी खेमे में 20 सांसद नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि संख्या पर्याप्त नहीं हुई तो बागी सांसदों पर दल बदल विरोधी कानून लागू हो सकता है। इसके बावजूद पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को लेकर चिंता गहराती जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी उसी समय दिल्ली में मौजूद रहे। सूत्रों का कहना है कि कई बागी सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे जहां शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। इससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस में और बड़ी टूट देखने को मिल सकती है।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका तब लगा जब वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिले जनादेश को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जनता ने तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के कथित अराजक शासन, भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून व्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर विफलताओं के खिलाफ फैसला दिया है। उन्होंने कहा कि जनता के इस फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
सुखेंदु शेखर राय ने यह भी कहा कि राज्य में नई सरकार विकास और पुनर्निर्माण की दिशा में काम शुरू कर चुकी है। हालांकि उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर अभी कोई घोषणा नहीं की है। दूसरी ओर पार्टी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने भी माना कि सांसदों में जो असंतोष है वही भावना विधायकों के भीतर भी मौजूद है।
उधर, लगातार बढ़ते संकट के बीच ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े फेरबदल की कोशिश भी शुरू कर दी है। अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव पद पर बनाए रखते हुए पार्टी ने डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अभिषेक बनर्जी के प्रभाव को सीमित करने और वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के अंदर सबसे ज्यादा नाराजगी अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को लेकर है। यही कारण है कि ममता बनर्जी अब संगठन में संतुलन बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विश्वसनीयता बचाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन जिस तरह सांसदों और नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है, उससे साफ है कि तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक का सामना कर रही है।