Pakistan कैसे बना मीडिल मैन, ईरान-इजरायल जंग की मध्यस्थता भारत में क्यों नहीं हुई

By अभिनय आकाश | Mar 25, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए अब एक दिलचस्प मोड़ सामने आया है। खबरों के मुताबिक पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है और मुमकिन है कि इस हफ्ते के आखिर में इस्लामाबाद में दोनों मुल्कों के बीच आमने-सामने बातचीत भी हो। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली मध्यस्थता के क्या मायने हैं? साथ ही इस पर भारत का क्या रुख है? मेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कल ही ईरान युद्ध में हाफ सीज फायर का प्रस्ताव दिया था। लेकिन यह सिर्फ 48 घंटे में टूट गया। एक्सपर्ट इसे ट्रंप और नेतन्याहू का डबल गेम बता रहे हैं। अब इसे पाकिस्तान में पीस टॉक के तहत सुलझाने की बात चल रही है। इजराइली रिपोर्टर बराक रेविड ने सोशल मीडिया पर एक इजराइयली अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि इस मीटिंग में अमेरिकी डेलीगेशन की कमान उपराष्ट्रपति जे डी वेंस संभाल सकते हैं। उनके साथ शांति मिशन के लिए खासदूत स्टीव बिटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हो सकते हैं। जो ट्रंप के बेहद करीबी हैं। विटक ट्रंप के खास दोस्त हैं और कुशनर उनके दामाद हैं। वहीं ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबा डेलीगेशन की अगुवाई कर सकते हैं। इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बयान भी काफी अहम है। उन्होंने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशियान से बात की और इलाके में अमन कायम करने में मदद का भरोसा दिया। अमेरिकी एक्सपर्ट माइकल कुगलमैन का कहना है कि पाकिस्तान का इस तरह मध्यस्थ बनना कोई हैरानी की बात नहीं है। पिछले एक साल में पाकिस्तान और ईरान के रिश्तों में काफी गर्मजशी आई है।

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भारत में क्यों नहीं हुई मध्यस्थता

अब अगर भारत की बात करें तो भारत का रुख हमेशा से साफ रहा है। भारत चाहता है कि इलाके में जंग ना हो और अमन चैन बना रहे। लेकिन भारत किसी भी सूरत में पाकिस्तान की तरह किसी भी पक्ष का मोहरा बनने को तैयार नहीं है। उसकी दोस्ती ईरान और इजराइल दोनों के साथ कायम है और यही उसकी संतुलित विदेश नीति की पहचान भी है। कुल मिलाकर सियासत का यह खेल अभी दिलचस्प मोड़ पर है। अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान इस मौके को अपने हक में कैसे इस्तेमाल करता है और क्या वाकई यह कोशिश इलाके में अमन ला पाएगी या फिर यह सिर्फ एक और सियासी चाल साबित होगी। 

चार सप्ताह से चला आ रहा युद्ध

युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस्लामाबाद को वार्ता के संभावित स्थल के रूप में बताया है। ब्रिटेन के अखबार ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के अनुसार, पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की और अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने का अनुरोध किया। सोमवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घोषणा की थी कि अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित कर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने पिछले कुछ दिनों में ईरान के साथ बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत की है। ‘सीएनएन’ के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को 15 मांगों की एक सूची भेजी है, जिसमें पाकिस्तान के माध्यम से अपनी अपेक्षाओं का ब्यौरा दिया गया है। सूत्रों के हवाले से ‘सीएनएन’ की खबर में कहा गया, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक उन अधिकारियों में शामिल हैं जो अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के संपर्क में हैं।

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