Prabhasakshi Exclusive: Pakistan के पास अपना खर्चा चलाने के लिए पैसे नहीं हैं, मगर वह चीनियों की सुरक्षा पर अरबों रुपए कैसे खर्च कर रहा है?

By नीरज कुमार दुबे | Oct 09, 2024

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि पाकिस्तान ने चीन के हितों की खातिर सशस्त्र बलों के लिए 45 अरब रुपये के बजट को मंजूरी दी है। यहां सवाल उठता है कि जिस देश के पास सामान्य खर्च चलाने के लिए पैसा नहीं है वह दूसरे की सुरक्षा पर इतना खर्च क्यों और कैसे कर रहा है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि चीन ने पाकिस्तान में बड़ा निवेश तो कर ही रखा है साथ ही इस समय वह इस्लामाबाद का सबसे बड़ा आर्थिक मददगार भी है लेकिन जिस तरह चीनी कर्मियों पर हमले बढ़ रहे हैं उसके चलते चीनी नेतृत्व की चिंता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सैन्य और आईएसआई का नेतृत्व चीन का दौरा कर चुके हैं जहां उन्हें फटकार लगायी गयी और साफ कह दिया गया कि यदि आप चीनियों को सुरक्षा नहीं दे सकते तो हम अपनी सेना वहां भेज कर उनको सुरक्षा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जानता है कि यदि चीनी सेना देश में आई तो उसका जनता विरोध करेगी इसलिए चीनी नेतृत्व को खुश करने के लिए भारी भरकम राशि चीनियों को सुरक्षा देने के लिए रखी गयी है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसक विद्रोह का गढ़ रहा है। बलूच विद्रोही समूहों ने पहले भी चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजनाओं को निशाना बनाकर कई हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि बीएलए चीन और पाकिस्तान पर संसाधन संपन्न प्रांत का शोषण करने का आरोप लगाता है। यह समूह लंबे समय से अलग मातृभूमि की मांग कर रहा है। पिछले दो सालों में इस समूह ने कराची में विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर इसी तरह के कई आत्मघाती बम हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि इस साल मार्च में बीएलए ने चीन द्वारा संचालित ग्वादर बंदरगाह के पास एक पाकिस्तानी नौसैनिक हवाई अड्डे पर हमले की जिम्मेदारी ली थी। अप्रैल 2022 में, कराची विश्वविद्यालय के कन्फ्यूशियस संस्थान के पास इस समूह के एक आत्मघाती हमले में तीन चीनी प्रशिक्षक और एक पाकिस्तानी ड्राइवर की मौत हो गई। नवंबर 2018 में, कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले में बंदूकधारियों ने कम से कम चार लोगों की हत्या कर दी थी।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसीलिए पाकिस्तान सरकार ने सशस्त्र बलों के लिए 45 अरब रुपये का अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने का फैसला किया है, ताकि नकदी की कमी से जूझ रहे देश में चीन के वाणिज्यिक हितों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बाड़ लगाने का प्रबंधन करने की उसकी क्षमता को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि 45 अरब रुपये में से 35.4 अरब रुपये सेना को और 9.5 अरब रुपये नौसेना को विभिन्न उद्देश्यों के लिए दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जून में बजट की मंजूरी के बाद सशस्त्र बलों के लिए स्वीकृत यह दूसरा बड़ा अनुपूरक अनुदान है। इससे पहले ईसीसी ने ‘ऑपरेशन अज्म-ए-इस्तेहकाम’ के लिए 60 अरब रुपये दिए थे। उन्होंने कहा कि ये अनुपूरक अनुदान 2127 अरब रुपये के रक्षा बजट के अतिरिक्त है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों की बढ़ती संख्या के कारण, चीन ने अपनी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए आतंकवाद विरोधी सहयोग पर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चीन ने पाकिस्तान में पहले से काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त कंपनी की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा है।

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