पानी कैसे बचाएं चित्रकला प्रतियोगिता (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Jul 21, 2021

अग्रिम आने की शोरदार घोषणा के बावजूद मानसून लेटकर आ रहा है। महामारी को एक बार फिर हरा कर सभी उसका नया हमला झेलने की तैयारी में जुटे हैं। इसी अवसर पर शहर की सोई हुई प्रसिद्ध संस्था नींद से जागी और गर्मी के मौसम में जल बचाने के उपायों पर, स्कूल के बच्चों के बीच चित्रकला प्रतियोगिता करवाने का सामयिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया। महीनों बाद हुई बैठक में एक मत से फैसला किया कि ‘पानी कैसे बचाएं’ जैसे ज़रूरी विषय पर प्रतियोगिता के लिए सबसे बढ़िया परिसर वाला स्कूल चुना जाए। ज़्यादा जगह वाले संस्थान में आयोजन करने में कोई दिक्कत नहीं होती। सभी प्रतियोगी बच्चों के बैठने के लिए डेस्क, मेहमानों के लिए सोफे व आरामदायक कुर्सियां उपलब्ध होती हैं। पीने के लिए एक्वागार्ड का पानी, बिजली चली भी जाए तो इन्वर्टर होता है। आपातकाल के लिए जैनेरेटर भी उपलब्ध रहता है। गरमा गरम गुलाब जामुन, चाय और समोसे कैंटीन में आराम से मिल जाते हैं। काफी गाड़ियों के लिए खुली पार्किंग भी रहती है। स्कूल में नेताओं व अधिकारियों की पत्नियां शिक्षक हैं तभी मंत्री या वरिष्ठ सरकारी अफसर को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने में आसानी रहती है।

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सबसे अच्छी बात यह रही कि मुख्य अतिथि ने स्कूल स्टाफ को निजी प्रयोग हेतु उपहारस्वरूप पैक्ड पानी की बोतलें दी जोकि शहर में लगी नई मिनरल वाटर फैक्ट्री के सौजन्य से प्राप्त हुई। यह यूनिट मंत्रीजी के ‘बेरोज़गार’ सुपुत्र ने शहर में पीने के पानी की कमी दूर करने के लिए लगाया है। प्रतियोगिता ठीक से निपटने पर आयोजक संस्था के संतुष्ट सचिव ने धन्यवाद करते हुए कहा, ‘आज हम सबने मिलकर, जल कैसे बचाएं जैसे सामयिक व महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से समाज को अपना बहुमूल्य सहयोग दिया’। 

आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट, फोटो सहित अनेक अखबारों में छपी जिसमें मंत्रीजी के साथ ग्रुप फोटो भी था।

- संतोष उत्सुक

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