By अभिनय आकाश | Sep 10, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान पर चिंता जताई गई थी। कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से टीकाकरण होने के मामलों में मुआवज़े से जुड़े सामान्य नियम ही लागू होंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच 'यूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन' की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में सरकार समर्थित कार्यक्रम को लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई थी। जब कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, तो याचिकाकर्ता के वकील ने इसे वापस ले लिया और मामला वापस लिए जाने के कारण खारिज कर दिया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि टीकाकरण कार्यक्रम को लागू करने से जानकारी के आधार पर सहमति, शरीर पर अपना अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसी संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से 14 साल की लड़कियों के लिए देशव्यापी HPV टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत सिंगल-डोज़ वाली गार्डसिल 4 वैक्सीन (एक क्वाड्रिवेलेंट HPV वैक्सीन) का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह HPV के टाइप 16 और 18 (जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं) के साथ-साथ टाइप 6 और 11 से भी सुरक्षा देती है। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गलत टीकाकरण के मामलों में मुआवज़े के नियम लागू होंगे और याचिकाकर्ता को HPV टीकाकरण अभियान को लागू करने के खिलाफ दायर याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।