Parliament Diary: IBC Amendment Bill लोकसभा में पास, नक्सल मुद्दे पर गर्मागर्म बहस, OBC आरक्षण के दुरुपयोग पर राज्यसभा में हंगामा

By नीरज कुमार दुबे | Mar 30, 2026

संसद के दोनों सदनों की आज की कार्यवाही कई महत्वपूर्ण मुद्दों और तीखी राजनीतिक नोकझोंक से भरपूर रही। एक ओर लोकसभा में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता संशोधन विधेयक को मंजूरी मिली, वहीं राज्यसभा में आरक्षण, सशस्त्र बलों और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने सामने दिखे।

इसी दौरान वित्त मंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है और प्रधानमंत्री की वैश्विक साख सबसे ऊंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष देश को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि आर्थिक संकेतक जैसे विकास दर, मुद्रास्फीति और घरेलू मांग मजबूत स्थिति में हैं।

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इसके अलावा, लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद पर भी जोरदार बहस हुई। सत्ता पक्ष के सांसदों ने पूर्व की सरकारों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि वर्तमान सरकार देश को उग्रवाद मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे की आड़ में खनन हितों को बढ़ावा दे रही है और जमीनी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।

राज्यसभा में भी दिन भर हंगामा और विरोध देखने को मिला। ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा सदस्य के बयान के विरोध में विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया। सत्ता पक्ष ने इस कदम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और विपक्ष पर बहस से बचने का आरोप लगाया। हम आपको बता दें कि राज्यसभा में भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने कुछ राज्यों द्वारा मुस्लिमों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल कर आरक्षण के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया और सरकार से इस पर व्यापक समीक्षा कराने की मांग की। उनके बयान के विरोध में विपक्षी दलों ने सदन से बहिर्गमन किया। इस पर सदन के नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य दल लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं का सम्मान नहीं करते और केवल मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए तुष्टीकरण राजनीति कर रहे हैं।

इसके अलावा, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल से संबंधित विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि यह विधेयक बल के अधिकारियों के अधिकारों को सीमित करता है और संघीय ढांचे के विपरीत है। उन्होंने पदोन्नति में देरी, मानसिक दबाव और आत्महत्या जैसी समस्याओं को भी गंभीर बताया।

इसके अलावा कई जनहित के मुद्दे भी उठाए गए। इसी बीच सरकार ने बताया कि वह असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पेंशन योजना के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। यह कदम करोड़ों श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत कर सकता है। वहीं दवाओं की पैकिंग को लेकर भी चिंता जताई गई और मांग की गई कि जरूरत के अनुसार पैकिंग हो ताकि दवा की बर्बादी रोकी जा सके। संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा सभी 22 भारतीय भाषाओं में कराने की मांग भी जोर पकड़ती नजर आई। गैर हिंदी भाषी राज्यों के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताया गया। नेत्रहीनों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आधारभूत ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। सदस्यों ने कहा कि आधुनिक विकास के बीच दिव्यांगजन की जरूरतों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही कृषि भूमि के तेजी से गैर कृषि उपयोग में बदलने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इसे खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा बताया गया।

वहीं भाजपा सांसद संबित पात्रा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक पुराने ट्वीट को लेकर उन पर तंज कसते हुए कहा कि ‘‘आप सरेंडर हैं, हम धुरंधर हैं।’’ वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा में भाग लेते हुए संबित पात्रा ने 2018 में महाराष्ट्र के यलगार परिषद और भीमा-कोरेगांव मामले का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा। भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘जनवरी 2018 में महाराष्ट्र में यलगार परिषद और भीमा कोरेगांव मामला हुआ था। वहां आगजनी हुई थी, जो प्रायोजित थी। किस प्रकार भारत को बांटने की कोशिश की गई थी। किस प्रकार जातियों को भिड़ाने की कोशिश की गई थी। उसके पीछे माओवादियों का हाथ था।’’ उन्होंने कहा कि घटना के सिलसिले में कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई थीं, जिसके बाद राहुल गांधी का एक ट्वीट आया था।

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘आज राहुल जी सदन में नहीं हैं। लेकिन मैं उन्हें ससम्मान कहना चाहता हूं कि हां राहुल जी यह नया भारत है। आप सरेंडर हैं। हम धुरंधर हैं।’’ उन्होंने नक्सलवाद को लेकर पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकार में भ्रम की स्थिति रहने का दावा करते हुए कहा कि एक ओर जहां तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मानना था कि नक्सलवाद से घातक कुछ और नहीं हो सकता, वहीं कांग्रेस के एक धड़े का इससे खास लगाव था। भाजपा सांसद ने कहा कि यह ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ की नाकामी थी कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 76 जवान अपैल 2010 में एक ही दिन में छत्तीसगढ़ में शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद पहली बार इतनी तादाद में सुरक्षाकर्मी हताहत हुए थे। पात्रा ने कहा कि कांग्रेस ने परिस्थितियों को जानबूझ कर अनेदेखा किया।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2012 में उच्चतम न्यायालय की एक खंडपीठ ने ‘सलवा जुडुम’ को समाप्त कर दिया और उस खंडपीठ में शामिल रहे न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया। भाजपा सांसद ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में 76 लोगों के मारे जाने पर दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में ‘‘मातम नहीं, सेलिब्रेशन मनाया गया था।''

बहरहाल, कुल मिलाकर संसद का आज का दिन आर्थिक सुधार, सामाजिक न्याय, सुरक्षा और राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप के बीच संतुलन साधता नजर आया। दोनों सदनों में उठे मुद्दे यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में नीति निर्माण और राजनीतिक बहसें और अधिक तीखी होने वाली हैं।

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