By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 29, 2026
आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने के फैसले का विरोध करते हुए इसे तत्काल रोकने और संसद की निगरानी में व्यापक समीक्षा कराने की मांग की है। मंच के संयोजक देवीदास तुलजापुरकर ने बृहस्पतिवार को यहां आईडीबीआई के निजीकरण पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि मौजूदा फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है, जब बाजार में उतार-चढ़ाव है। ऐसे में सावधानी, पारदर्शी मूल्यांकन और व्यापक सार्वजनिक चर्चा जरूरी है।
भारतीय रिजर्व बैंक की नियामकीय मंजूरी मिलने पर इस सौदे के चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। तुलजापुरकर ने कहा कि सरकार को मूल्यांकन की पद्धति, उसके आधार, अचल संपत्तियों और अन्य परिसंपत्तियों के आकलन तथा बिक्री मूल्य स्वीकार करने के कारणों का खुलासा करना चाहिए। जनता को यह भरोसा मिलना चाहिए कि राष्ट्रीय संपत्ति का हस्तांतरण बहुत कम कीमत पर नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने प्रस्तावित खरीदार के स्वामित्व ढांचे, वित्तीय स्थिति और नियामकीय रिकॉर्ड की भी पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी बड़े भारतीय बैंक का नियंत्रण हस्तांतरित करने के मामले में केवल नियामकीय मंजूरी सार्वजनिक जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकती। संयुक्त मंच ने कहा कि आईडीबीआई को बैंकिंग कंपनी में बदलते समय संसद में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने सरकार की हिस्सेदारी कम-से-कम 51 प्रतिशत बनाए रखने का आश्वासन दिया था।
तुलजापुरकर ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि मौजूदा फैसला उस आश्वासन के अनुरूप कैसे है। उन्होंने कहा कि निजीकरण से आरक्षण, वंचित समुदायों के लिए अवसर, रोजगार सुरक्षा, वित्तीय समावेश और विकासोन्मुख ऋण व्यवस्था कमजोर नहीं होनी चाहिए। बैंक में कुल 19,108 कर्मचारी हैं।
इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 9,500 कर्मचारी, 6,911 महिलाएं और 884 दिव्यांग कर्मचारी शामिल हैं। सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास आईडीबीआई बैंक की क्रमशः 45.48 प्रतिशत और 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है।