By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 14, 2026
सरकार ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लि. को बेचने को मंजूरी दे दी। आईडीबीआई के सुधारात्मक कार्रवाई से रणनीतिक पुनर्गठन तक पहुंचने के नौ साल के सफर के प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं: मई 2017: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पूंजी पर्याप्तता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, परिसंपत्तियों पर प्रतिफल और कर्ज अनुपात के निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने पर आईडीबीआई बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में रखा। मार्च 2017 में बैंक की शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) 13 प्रतिशत से अधिक थी।
अप्रैल 2021: एलआईसी ने सरकार की प्रस्तावित रणनीतिक विनिवेश योजना के साथ-साथ इक्विटी हिस्सेदारी घटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। मई 2021: मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दी। इसमें प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण भी शामिल था।
अक्टूबर 2022: सरकार ने आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए रुचि पत्र आमंत्रित किए। इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल थी। जनवरी 2023: सरकार को संभावित बोलीदाताओं से कई रुचि पत्र प्राप्त हुए।
जुलाई 2024: संभावित बोलीदाताओं को गृह मंत्रालय से आवश्यक सुरक्षा मंजूरी मिली और आरबीआई ने उनकी पात्रता एवं उपयुक्तता का आकलन किया। जनवरी 2026: सरकार ने प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित कीं। फरवरी 2026: सरकार को प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दुबई स्थित एमिरेट्स एनबीडी से वित्तीय बोलियां मिलीं।
मार्च 2026: वित्तीय बोलियां आरक्षित मूल्य से कम रहने के बाद सरकार ने बिक्री प्रक्रिया रोक दी। अप्रैल 2026: सरकार ने विनिवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू की और आगे की रणनीति के लिए तकनीकी मूल्यांकन किया। जुलाई 2026: सरकार ने संशोधित वित्तीय बोलियां आमंत्रित कीं।
इसके बाद फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और एमिरेट्स एनबीडी से संशोधित प्रस्ताव मिले। अक्टूबर 2026: मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी दी। फेयरफैक्स 52,878 करोड़ रुपये में बैंक की 60.72 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी।
हिस्सेदारी बिक्री के बाद केंद्र सरकार और एलआईसी के पास संयुक्त रूप से 34 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी।