Gyan Ganga: संत या गुरुजनों के विरुद्ध ही संदेह है तो ईश्वर के प्रति मन पावन हो ही नहीं सकता

By सुखी भारती | May 09, 2024

आंखों में जब कोई नन्हां सा भी, रेत का कण पड़ जाये, तो सामने खड़ा विशालकाय पर्वत भी दृष्टिपात नहीं होता। ठीक इसी प्रकार से अगर हमारे नेत्रों में संदेह का कण अपने पैर जमा ले, तो ऐसे में हमारे समक्ष, साक्षात भगवान भी विराजमान क्यों न हों, वे भी हमें, भगवान न होकर, एक साधारण मनुष्य ही दिखाई देते हैं।

‘सतीं सो दसा संभु कै देखी

उर उपजा संदेहु बिसेषी।।’

श्रीसती जी ने के मन में आ रहा है, कि भगवान शंकर की ‘दशा’ ठीक नहीं है? वे कैसे बावले से हो गये हैं।

इसे भी पढ़ें: Gyan Ganga: श्रीराम जी की कथा का रसपान करके हम जीवन में आने वाले कष्टों को कर सकते हैं दूर

यहां शंकर भगवान के लिए जो भाव, श्रीसती जी के मन में उठ रहे हैं, उसके लिए गोस्वामी जी दशा शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। दशा शब्द, ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है, जिसकी दिशा भटकी हो, वह तनावग्रस्त व दयनीय स्थिति में हो। जो सब ओर से हारा हो। जिसे कोई सहारा न दे रहा हो। तो हम कह देते हैं, कि फलाँ व्यक्ति की दशा तो बड़ी खराब है। वहीं दूसरी ओर, किसी प्रसन्न व संपन्न व्यक्ति के लिए, शब्दों का प्रयोग करना पड़े, तो हम मनमोहक व सम्मानीय शब्दों का ही प्रयोग किया जाता है। सोचिए, श्रीसती जी के मन में भगवान शंकर का कद कितना छोटा सा हो गया होगा, कि उन्हें वे भी दयनीय स्थिती वाले दिखाई दे रहे हैं, और श्रीसती जी को लग रहा है, कि शंकर भगवान की दशा ठीक नहीं है। जबकि वास्तविकता तो यही है, कि दशा श्रीसती जी की खराब है, न कि भगवान शंकर जी की। श्रीसती जी ही इस समय दिशा से हीन हैं, भटकी हुई हैं। ऐसे में उनकी दशा का भटकना तो स्वाभाविक ही है। यह तो बिल्कुल वैसा है, कि कोई व्यक्ति उलटा लटका हो, जिस कारण धरती पर चल रहे बाकी सभी सीधे लोग उसे उल्टे दिखाई दें, और वह उल्टा व्यक्ति यह भी दावा करे, कि मैं तो ठीक हुँ, लेकिन बाकी लोग पता नहीं क्यों उल्टे चल फिर रहे हैं। जबकि सत्यता तो यह है, कि उल्टे लोग नहीं, अपितु वह स्वयं ही है।

श्रीसती जी की मति भी उल्टी हो गई है। जिस कारण उन्हें भगवान शंकर भी उल्टे दिखाई देने लग गये। ऐसे में उन्हें कोई कितना भी समझा ले, कि बस तुम एक अकेले सीधे हो जायो, देखना सभी सीधे दिखाई देने लगेंगे। शरीर से उल्टा व्यक्ति तो शायद इस तथ्य को सहजता से मान ले, लेकिन जिसकी मति उल्टी है, उसे मनाना बड़ा भारी काम है।

भगवान शंकर जी ने देखा, कि श्रीसती जी अपने मन की कुंठा को हमारे समक्ष नहीं रख रही है। ऐसे में तो उनका अहित हो जायेगा। अच्छा होता, अगर सती स्वयं ही अपने मन की दुर्दशा को हमारे चरणों में रखती। लेकिन तब भी कोई बात नहीं। हम स्वयं ही सती को समझाये देते हैं-

‘जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी।

हर अंतरजामी सब जानी।।

सुनहि सती तव नारि सुभाऊ।

संसय अस न धरिअ उर काऊ।।’

केवल इतना ही नहीं, भगवान शंकर जी ने एक शब्द और कहा, कि हे भवानी! जिनकी कथा का अगस्त्य मुनि जी ने गान किया, और जिनकी भक्ति मैंने मुनि को सुनाई। यह वही मेरे ईष्टदेव श्रीरघुवीर जी हैं, जिनकी सेवा ज्ञानी मुनि किया करते हैं। भगवान शंकर मानों कहना चाह रहे हैं, कि हे भवानी आप ने तो हमसे यह भी छुपाया था, कि आपने श्रीरघुवीर जी की कथा सुनी ही नहीं। काश! आप उसी समय हमें कह देती, कि आपको कथा में रस नहीं आ रहा। तो हम उसी समय मुनि को आग्रह करके कोई उपाय ढूँढते। लेकिन आपको तो बस अपने संशय को पंखा झुलाना था। जिसका परिणाम यह हुआ, कि पहले तो आपने मुनि के प्रति अपने मन में गांठ पाल ली। परिणाम स्वरुप हमारे प्रति भी आपके भीतर गांठ बन गई। आध्यात्म व भक्ति के नियमानुसार ऐसा होना स्वाभाविक भी था। नियम यह, कि अगर संत अथवा गुरु जनों के विरुद्ध ही संदेह है, तो ईश्वर के प्रति मन पावन हो ही नहीं सकता-

‘संत कहहिं असि नीति प्रभु श्रुति पुरान मुनि गावं

होइ न बिमल बिबेक उर गुर सन किएँ दुराव।।’

भगवान शंकर श्रीसती जी को अनेकों उदाहरणों के माध्यम से समझाये जा रहे हैं। लेकिन श्रीसती जी के मन में एक भी विचार नहीं बैठ रहा। श्रीसती जी पल प्रति पल ओर अशांत हुए जा रही हैं। भगवान शंकर जी ने जब देखा, कि अगर हमारी सीख से आपके मन का समाधान नहीं निकल रहा, तो आप एक काम कीजिये। आप स्वयं ही जाकर परीक्षा ले लीजिये, कि श्रीरघुवीर जी साक्षात भगवान हैं, अथवा एक साधारण मनुष्य-

‘जौं तुम्हरें मन अति संदेहु।

तौ किन जाइ परीछा लेहू।।’

क्या श्रीसती जी अपने मतानुसार प्रभु श्रीराम जी की परीक्षा लेती हैं, अथवा नहीं। यह जानेंगे अगले अंक में---(क्रमशः)---जय श्रीराम।

- सुखी भारती

प्रमुख खबरें

हर कार मालिक को एक अनजाने सड़क हादसे से पहले यह जानना चाहिए

NEET Controversy: जंतर मंतर पहुंचे Physics Wallah के Alakh Pandey, पूछा- सरकार बच्चों से बात क्यों नहीं करती?

Jantar Mantar Violence Case: दिल्ली पुलिस ने ACP पर हमले के आरोप में दर्ज की FIR, हत्या की कोशिश और दंगे की धाराएँ शामिल

Nitin Nabin की दो टूक: मेहनती छात्रों का भविष्य खतरे में डालने वालों को नहीं बख्शा जाएगा