दम है तो हथियार डलवा कर देख लो...Hamas ने इस अंदाज में ट्रंप को ललकारा

By अभिनय आकाश | Nov 19, 2025

ट्रंप की अगुवाई में जब गाजा में युद्ध विराम का ऐलान हुआ तो उस वक्त इस बात पर सहमति बनी थी कि गाजा में हमास अपने हथियार डालेगा और एक इंटरनेशनल फोर्स का गठन होगा जो गाजा में फिर से सरकार की बहाली तक सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी। हालांकि देखते ही देखते हमास ने अब साफ कह दिया कि वह अपने हथियार नहीं डालेगा। लेकिन हमास को गाजा की सत्ता से बेदखल करने के लिए ट्रंप और नेतन्या संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव लेकर आए हैं। जिससे हमास को हमेशा हमेशा के लिए गाजा से बेदखल किया जा सके। लेकिन सुरक्षा परिषद ने इस प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले ही हमास ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। हमास का कहना है कि यह प्रस्ताव बेहद ही खतरनाक है। हमास ने खुद और गाजा के दूसरे संगठनों के आधार पर इस प्रस्ताव को ठुकराया है।

हमास ने सुरक्षा परिषद के इस फैसले को खारिज कर दिया है। हमास ने कहा कि यह प्रस्ताव फिलिस्तीनियों के अधिकारों और मागो को पूरा करने में विफल और गाजा पर एक अतर्राष्ट्रीय न्यास थोपने का प्रयास करता है। हमास ने विशेष रूप से स्थिरीकरण बल को सशस्त्र समूहों को निष्क्रिय करने का निर्देश देने वाले प्रावधानो की तीखी आलोचना की। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, हमास ने कहा-अतर्राष्ट्रीय फोर्सेस को गाजा पट्टी के अदर कार्य और भूमिकाएं सौपना, इसकी तटस्थता को समाप्त करता है। वहीं नेतन्याहू के कार्यालय ने एक्स पर लिखा कि हमारा मानना ​​है कि राष्ट्रपति ट्रंप की योजना शांति और समृद्धि की ओर ले जाएगी, क्योंकि यह (योजना) गाजा के पूर्ण विसैन्यीकरण, निरस्त्रीकरण और कट्टरपंथ के खात्मे पर जोर देती है। यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय बल को व्यापक अधिकार प्रदान करता है, जिसमें सीमाओं की निगरानी, ​​सुरक्षा प्रदान करना और गाजा का विसैन्यीकरण शामिल है। हमास ने कहा कि निरस्त्रीकरण सहित बल का अधिदेश उसकी तटस्थता से वंचित कर देता है। इसने कहा, ‘‘यह प्रस्ताव फलस्तीनी लोगों की राजनीतिक और मानवीय मांगों तथा अधिकारों के स्तर पर खरा नहीं उतरता है।’ हमास ने मांग की कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय बल संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में होना चाहिए, जो युद्धविराम की निगरानी के लिए केवल गाजा की सीमाओं पर तैनात हो और यह विशेष रूप से फिलिस्तीनी संस्थानों के साथ काम करे

इसे भी पढ़ें: Gaza में ट्रंप के प्लान को UN की मंजूरी, मुस्लिम देशों का रुख देख अमेरिका के सामने पीछे हटे चीन-रूस

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन ने कतर, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, जॉर्डन और तुर्की के साथ एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें अमेरिकी प्रस्ताव को ‘शीघ्र अपनाने’ का आह्वान किया गया। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले मुस्लिम-बहुल देश इंडोनेशिया और तुर्किये दोनों ने कहा कि वे द्वि-राष्ट्र समाधान की दिशा में काम करेंगे, जिसका नेतन्याहू ने विरोध किया है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने मंगलवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ‘‘20-सूत्री योजना को आगे बढ़ाने और इसे न्यायपूर्ण एवं स्थायी शांति में बदलने के लिए मिलकर काम करने की ज़रूरत है।

प्रमुख खबरें

Galle Test: गिल का सिरदर्द बढ़ा, Gurnoor Brar या Prasidh Krishna में से कौन?

मानसून में कार चलाने वालों के लिए अलर्ट! ये छोटी-छोटी गलतियां बन सकती हैं बड़े हादसे की वजह

CJI Suryakant Clarification: Cockroach टिप्पणी पर बोले प्रधान न्यायाधीश, कहा- Social Media पर फैलाया भ्रम

शुभमन गिल ने पूरे किए कप्तानी का एक साल, 600th Test में कप्तानी कर रचेंगे इतिहास; Shubman Gill on WTC Goals