Shivam Dube की विस्फोटक पारी से मिली उम्मीद, हार में भी भारत को दिखा भविष्य का संकेत

By Ankit Jaiswal | Jan 30, 2026

विशाखापत्तनम में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले के बाद भारतीय टीम पूरी तरह निराश भी नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह शिवम दुबे की वह विस्फोटक पारी रही, जिसने मुश्किल हालात में टीम को संभालने की कोशिश की।

गौरतलब है कि शिवम दुबे साल 2022 से सीएसके का हिस्सा हैं और इसी भूमिका में उन्होंने खुद को निखारा है। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए टी20 डेब्यू सीएसके में आने से पहले ही कर लिया था, लेकिन शुरुआती 13 अंतरराष्ट्रीय मैचों में वह अपनी पहचान नहीं बना सके थे। उस समय उन्हें एक ऐसे मध्यक्रम बल्लेबाज के तौर पर देखा जाता था, जो कभी-कभार मध्यम गति से गेंदबाजी भी कर सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सीएसके ने दुबे की काबिलियत पहली बार 2021 के आईपीएल में नोट की थी, जब वह राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए अबूधाबी में एक मुकाबले में 42 गेंदों पर 64 रन बनाकर चेन्नई के खिलाफ मैच पलट चुके थे। इसके बाद 2022 की नीलामी में महेंद्र सिंह धोनी और कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने उन्हें चार करोड़ रुपये में टीम से जोड़ा।

हालांकि शुरुआत आसान नहीं रही है। आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ एक मैच में 19वें ओवर में 25 रन देने के बाद दुबे आलोचनाओं के घेरे में आ गए थे। इसके बावजूद धोनी ने साफ किया था कि टीम ने दुबे को गेंदबाजी के लिए नहीं, बल्कि बल्लेबाजी के लिए खरीदा है। यही भरोसा बाद में रंग लाया, जब उन्होंने मुंबई में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ 46 गेंदों पर 95 रन की यादगार पारी खेली।

इसके बाद दुबे ने स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ अपनी अलग पहचान बना ली है। वानिंदु हसरंगा और ग्लेन मैक्सवेल जैसे गेंदबाजों के खिलाफ उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने सभी का ध्यान खींचा है। यही कारण है कि अन्य फ्रेंचाइजियों की दिलचस्पी के बावजूद सीएसके ने उन्हें 12 करोड़ रुपये में रिटेन किया है।

हालांकि, तेज गेंदबाजों के खिलाफ खासकर शॉर्ट बॉल पर उनकी कमजोरी पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन हालिया प्रदर्शन से संकेत मिलते हैं कि दुबे ने इस पहलू पर काम किया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने जैकब डफी और जैक फॉल्क्स जैसे गेंदबाजों को निशाना बनाया है।

जहां तक गेंदबाजी की बात है, आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम के चलते उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले हैं। लेकिन भारतीय टीम प्रबंधन उनकी ऑलराउंड क्षमता का इस्तेमाल करना चाहता है। पिछले साल दुबई में पाकिस्तान के खिलाफ एशिया कप फाइनल में उनसे नई गेंद से गेंदबाजी भी कराई गई है। दुबे ने अब धीमी गति की गेंद और वाइड यॉर्कर जैसे विकल्प भी विकसित किए हैं।

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