तेजी से तरक्की करनी है तो महाकाली और महालक्ष्मी का एकसाथ पूजन करें

By शुभा दुबे | Aug 22, 2022

जीवन में आगे बढ़ने और तरक्की हासिल करते रहने के लिए जरूरी है महाकाली और महालक्ष्मी का आशीर्वाद। महाकाली जहां सभी कष्टों को समाप्त करने वाली देवी हैं वहीं महालक्ष्मी जीवन को सुखमय और समृद्धि से भरपूर बनाती हैं। इन दोनों देवियों की साथ पूजा करने से यह अत्यन्त प्रसन्न होती हैं। यदि सच्चे मन से इनकी साधना की जाए तो यह निश्चित रूप से मनवांछित फल देती हैं। महाकाली−महालक्ष्मी पूजन भादो शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है जोकि आश्विन की कृष्णाष्टमी तक चलता है। विभिन्न धर्म ग्रंथों में इस पूजन को करने वालों को मनवांछित फल मिलने की कई कथाओं का उल्लेख है। 

इसे भी पढ़ें: Gyan Ganga: कंस ने माता देवकी के आठवें पुत्र की गणना के लिए कौन-सा फॉर्मूला लगाया था

इस व्रत में सोलह की संख्या का विशेष महत्व है। यदि आप इस व्रत को सच्चे मन से और पूरे विधि विधान से सोलह वर्षों तक करते हैं तो कोई कष्ट आपके जीवन में नहीं रहेगा तथा जीवन से अभाव का नाम ही खत्म हो जाएगा। यदि आप सोलह वर्षों तक यह व्रत करना चाहते हैं तो प्रण लेकर करें और सोलहवें वर्ष ही इसका उद्यापन करें। इस दौरान सोलह प्रकार के पकवानों का भोग लगाएं और पूजन से जुड़े अन्य कार्यों में भी सोलह की संख्या का प्रयोग करें।

इस दिन पाट या फिर कदली के पत्र पर महाकाली और महालक्ष्मी की पुतलियां बनाएं। इनके आसपास आम तथा नीम के दो वृक्ष प्रतीक स्वरूप या फिर उनकी टहनियां लेकर बनाएं। हाथी पर सवार राजा और कहारों के कंधे पर पालकी में सवार रानी की मूर्ति भी पूजन के दौरान बनानी चाहिए। इस व्रत के दौरान सोलह बोल की कहानी 16 बार सुनी और सुनाई जाती है। कहानी सुनने के बाद चावल और फूल छोड़ना चाहिए।

सोलह बोल की कथा जो इस अवसर पर सुनाई जाती है वह इस प्रकार है− अमोती दमोती रानी, पोला परपाटन गांव, मगरसेन राजा, बंभन बरुआ, कहे कहानी, सुना हो महालक्ष्मी देवी नानी, हमसे कहते तुमसे सुनते सोलह बोल की कहानी।

इसे भी पढ़ें: द्रौपदी ने साबित किया- हर मुसीबत में अपने भक्तों को बचाते हैं भगवान श्रीकृष्ण

हाथी की कहानी

एक राजा जिसकी दो रानियां थीं। उसकी बड़ी रानी को एक ही लड़का था जबकि छोटी रानी के कई लड़के थे। एक बार छोटी रानी के सभी पुत्रों ने मिलकर मिट्टी का एक बड़ा-सा हाथी बना दिया तो उनकी मां ने वहां खड़े होकर उसकी पूजा की। यह देख बड़ी रानी ने अपने पुत्र से कहा कि देखो तो तुम्हारे भाइयों ने कितना बड़ा हाथी बनाया है तुम भी ऐसा ही बनाओ तो उसने अपनी मां से कहा कि मां तुम पूजन की तैयारी करो मैं तुम्हारे लिए असली हाथी लेकर आता हूं। वहां से उसका पुत्र देवराज इन्द्र के पास गया और उनसे उनका ऐरावत हाथी मांग लाया ताकि उसकी मां पूजा कर सके। ऐरावत हाथी को देख उस युवक की मां खुश हुई और बोली− क्या करें किसी के सौ साठ, मेरा एक पुत्र पुजावे आस।

-शुभा दुबे

प्रमुख खबरें

Mahadev App के सह-प्रवर्तक रवि उप्पल UAE में हिरासत में, प्रत्यर्पण की तैयारी

WPL 2027 का शेड्यूल जारी, 14 जनवरी को RCB और Mumbai Indians के बीच होगा पहला मैच

Kotia सीमा विवाद पर Naveen Patnaik ने सीएम माझी को लिखा पत्र, केंद्र से दखल की मांग

Ghaziabad Court ने बैंक धोखाधड़ी में बरी 2 आरोपियों को PMLA में दोषी ठहराया