By नीरज कुमार दुबे | Mar 14, 2023
भारत सरकार ने हाल ही में अफगानिस्तान को 20 हजार मीट्रिक टन गेहूं देने की घोषणा की तो देश में आम आदमी पार्टी ने हल्ला मचाना शुरू किया कि तालिबान को क्यों खुश कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। जबकि भारत मानवीय आधार पर दुनिया के हर देश की मदद करता रहा है। अब भारत ने तालिबान के राजनयिकों को प्रशिक्षण देने का फैसला कर सबको चौंका दिया है। माना जा रहा है कि भारत का यह कदम अफगानिस्तान के नये नेतृत्व के साथ भारत के संबंधों को बेहतर बना सकता है। दरअसल तालिबानियों को हथियार के बल पर शासन करने में तो महारत हासिल है लेकिन दुनिया के साथ राजनयिक संबंध कैसे बनाये जायें इसका उन्हें कोई अनुभव नहीं है। इसलिए भारत सरकार की यह पहल बहुत मायने रखती है। माना जाता है कि भारत के अफगानिस्तान के साथ मजबूत होते संबंधों की बदौलत अफगानिस्तान से भारत विरोधी गतिविधियों को भी रोका जा सकेगा। अफगान तालिबान के संबंध पाकिस्तान से बहुत खराब हो चुके हैं, ऐसे में भारत के साथ अफगानिस्तान के नये शासकों के सुधरते रिश्ते इस क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से भारत को बल प्रदान करेंगे।
जहां तक अफगानिस्तान को गेहूं भेजने की बात थी तो आपको बता दें कि भूख से ग्रस्त अफगानिस्तान को भारत ने जो मदद भेजी थी वह जनता के लिए थी। इस मदद को जिस तरह आम आदमी पार्टी ने तालिबानियों का पेट भरने की कवायद करार दिया वह गलत था। भारत संकट और मुश्किल के समय दुनिया की मदद के लिए सबसे पहले खड़ा होता रहा है। कोरोना संकट के दौरान भी भारत ने वैक्सीन मैत्री अभियान के जरिये पूरी दुनिया का दिल जीता था। हम आपको यह भी बता दें कि अफगानिस्तान सेना के कैडेटों को भारतीय सेना से उसी तरह प्रशिक्षण भी मिलता रहा है जैसे हम अपने कुछ और पड़ोसी देशों के रक्षा बलों को प्रशिक्षण देते हैं। बहरहाल, तालिबानी राजनयिकों को दिये जा रहे प्रशिक्षण के बारे में हम आपको यह भी बता दें कि भारतीय विदेश मंत्रालय का सदैव यह प्रयास रहता है कि सहयोगी देशों की विकास संबंधी कार्यों तथा अन्य चुनौतियों से जूझने की क्षमता बढ़ाई जाये।