By नीरज कुमार दुबे | Aug 19, 2026
जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अपने परिवार से मुलाकात करने और निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति मिलने से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेनाध्यक्ष असीम मुनीर का बीपी और शुगर हाई हो गया है और इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है कि इस स्थिति से कैसे निपटा जाये। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि इमरान खान को अदालत से राहत मिलने के बाद पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों में बेचैनी बढ़ गयी है। इस्लामाबाद की सत्ता और रावलपिंडी की ताकत के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जेल में बंद इमरान खान को परिवार, निजी डॉक्टरों और समर्थकों से संपर्क के रास्ते फिर से खुलते गए, तो क्या उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) भी दोबारा संगठित होकर मैदान में लौट सकती है? यही वह आशंका है जो प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार से लेकर फील्ड मार्शल असीम मुनीर के सैन्य प्रतिष्ठान तक के लिए असहज करने वाली है। क्योंकि पाकिस्तान की सियासत में इमरान की सबसे बड़ी ताकत उनकी आजादी नहीं, बल्कि जेल में रहते हुए भी कायम उनका राजनीतिक असर है।
हम आपको बता दें कि जस्टिस शाहिद वहीद की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया था कि परिवार से मिलना सरकार की कृपा नहीं, बल्कि इमरान खान का मौलिक अधिकार है। अदालत ने सरकार को साप्ताहिक मुलाकातें सुनिश्चित करने के साथ-साथ इमरान को शिफा अस्पताल में इलाज कराने और विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। इसमें नेत्र विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट और उनके निजी चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान को शामिल करने को कहा गया। डॉ. उज़मा को भी बोर्ड में शामिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने साथ ही इमरान खान के मेडिकल रिकॉर्ड को गोपनीय रखने, अस्पताल में इलाज के दौरान राजनीतिक गतिविधि या मीडिया से बातचीत पर रोक और उनके बच्चों से टेलीफोन पर संपर्क की व्यवस्था करने का भी आदेश दिया। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इन शर्तों को स्वीकार करने की बात कही है।
हम आपको बता दें कि इमरान खान की सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट में पेश मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उन्हें रक्तचाप में उतार-चढ़ाव, धड़कन तेज होने, सिरदर्द, बेचैनी और गंभीर चिंता की शिकायत रही है। एक पीआईएमएस कार्डियोलॉजिस्ट ने 1 अगस्त को उनका ब्लड प्रेशर 140/100 दर्ज किया था, जबकि 10 अगस्त को चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने इसे 140/80 पाया। बोर्ड ने तनाव कम करने, टहलने, विश्राम और पत्नी तथा परिवार से अधिक नियमित बातचीत की सिफारिश की।
रिपोर्ट के मुताबिक जेल में बंद रहने के दौरान इमरान की कम से कम 39 बार मेडिकल जांच हो चुकी है और जेल के चिकित्सक दिन में तीन बार उनकी जांच करते हैं। उनका ईसीजी सामान्य पाया गया तथा आंख की समस्या के उपचार के बाद उनकी दृष्टि में भी काफी सुधार हुआ। हालांकि पीटीआई ने मेडिकल दस्तावेजों की प्रामाणिकता और पूर्णता पर सवाल उठाते हुए उनके निजी चिकित्सकों डॉ. आसिम यूसुफ और डॉ. फैसल सुल्तान से जांच कराने तथा स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड की मांग की है। वहीं पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इमरान को कानून और अदालत के आदेशों के मुताबिक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यही है कि इमरान को जेल में रखकर उनकी राजनीतिक प्रभावशीलता खत्म करने की रणनीति कितनी सफल होगी, इस पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तान की शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान के लिए इमरान खान अब भी सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बने हुए हैं। यदि परिवार से नियमित मुलाकातें, निजी चिकित्सकों तक पहुंच और संभावित अस्पताल उपचार बढ़ता है, तो इमरान का राजनीतिक नेटवर्क भी नए सिरे से सक्रिय होने की गुंजाइश पा सकता है।
यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल स्वास्थ्य संबंधी राहत नहीं, बल्कि सत्ता-संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है। अदालत ने एक तरफ परिवार के अधिकार को मान्यता दी है, तो दूसरी तरफ पीटीआई को मुलाकातों के बाद राजनीतिक गतिविधि और मीडिया बयानबाजी से दूर रहने को कहा है। यानी न्यायपालिका ने दरवाजा खोला है, लेकिन राजनीतिक मैदान में तत्काल वापसी की अनुमति नहीं दी है।
हम आपको याद दिला दें कि इमरान और बुशरा बीबी फिलहाल अदियाला जेल में बंद हैं। दिसंबर 2025 में दोनों को तोशाखाना-2 मामले में 17 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इमरान अगस्त 2023 से हिरासत में हैं और उन पर 190 मिलियन पाउंड के भ्रष्टाचार मामले के अलावा 9 मई 2023 की हिंसा से जुड़े आतंकवाद निरोधक कानून के तहत भी मामले लंबित हैं। इमरान और उनके समर्थक लगातार इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते रहे हैं।
बहरहाल, अब असली सवाल यह है कि क्या जेल की दीवारें इमरान खान की सियासत को रोक पाएंगी? असीम मुनीर और सत्ता प्रतिष्ठान के लिए चुनौती सिर्फ इमरान की व्यक्तिगत रिहाई नहीं है; चुनौती यह है कि उन्हें राजनीतिक रूप से कितना अलग-थलग रखा जा सकता है। वैसे सच्चाई यही है कि पाकिस्तान की सियासत में इमरान भले जेल में हों, लेकिन उनकी राजनीतिक मौजूदगी खत्म नहीं हुई है और यही बात मौजूदा सत्ता-संरचना के लिए सबसे बड़ी बेचैनी का कारण बनी रह सकती है।