Pakistan में Asim Munir vs Imran Khan: मुनीर के पास सत्ता है मगर जनसमर्थन इमरान के साथ, शहबाज के पास प्रधानमंत्री पद है मगर प्रभाव नहीं

By नीरज कुमार दुबे | Jul 07, 2025

पाकिस्तान की राजनीतिक तस्वीर को देखें तो एक ओर हैं फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जोकि सेना प्रमुख तो हैं ही साथ ही उनकी पकड़ संसद, न्यायपालिका और विदेश नीति तक फैली है और दूसरी ओर हैं इमरान खान, जोकि पूर्व प्रधानमंत्री हैं और वह रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद होने के बावजूद आज भी देश की सबसे बड़ी जन-आवाज़ बने हुए हैं। सड़कों पर, जनता के दिल में और डिजिटल दुनिया में उनकी मौजूदगी लगातार बनी हुई है।

इसे भी पढ़ें: China में आ रहा नया राष्ट्रपति! BRICS में मोदी ने खेल दिया बड़ा मास्टरस्ट्रोक, जिनपिंग हाथ से सत्ता जाते देख रहे

हम आपको याद दिला दें कि करीब दो हफ्ते पहले मुनीर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में एक गोपनीय बैठक की थी। इस बैठक में पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता और इमरान खान की स्थिति जैसे विषयों पर बातचीत हुई थी। उस दौरान इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर भी चर्चा हुई थी। खास बात यह है कि ट्रंप और मुनीर की इस मुलाकात के तुरंत बाद पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की पार्टी पीटीआई के लिए आरक्षित सीटों को सत्ताधारी पीएमएल-एन और पीपीपी गठबंधन को सौंप दिया था जिससे संसद में उन्हें दो-तिहाई बहुमत मिल गया। पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने फरवरी 2024 के आम चुनाव में मिले जनादेश को पूरी तरह नकार दिया। पाकिस्तान के वरिष्ठ कानूनी विश्लेषकों ने इसे "न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से राजनीतिक सफाया" करार दिया है।

हम आपको यह भी बता दें कि भले ही मुनीर वॉशिंगटन, रियाद और बीजिंग के दौरों पर पाकिस्तान का चेहरा बनते हैं, लेकिन पाकिस्तान और विदेशों में बसे पाकिस्तानियों के मन में अब भी इमरान खान ही बसे हैं। उनकी पार्टी पीटीआई का अभियान विदेशों में ऑनलाइन क्रांति बन चुका है। यूके, खाड़ी देशों और उत्तरी अमेरिका में बसे हजारों कार्यकर्ता इमरान खान की पार्टी के संदेश— अन्याय, सेंसरशिप और चुराये गये जनादेश के खिलाफ अभियान चलाये हुए हैं। YouTube, Telegram और X जैसे मंचों पर इमरान खान की पार्टी की डिजिटल फ्रंटलाइन तैयार हो चुकी है, जो सरकार के नियंत्रण को चुनौती दे रही है।

मुनीर को भले ऐसा लगता हो कि उनकी वैश्विक स्वीकार्यता है लेकिन पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि अय्यूब खान, जियाउल हक और परवेज़ मुशर्रफ जैसे सैन्य शासकों को भी अंतरराष्ट्रीय वैधता मिली थी, लेकिन घरेलू आक्रोश ने अंततः उन्हें हटा दिया था। देखा जाये तो आज, पाकिस्तान की जनता महंगाई, सेंसरशिप और लोकतांत्रिक अवरोधों से त्रस्त है। यदि इमरान खान के समर्थक सड़कों पर उतरते हैं और यह गुस्सा बेकाबू होता है, तो मुनीर की सत्ता की पकड़ कमजोर पड़ सकती है।

पाकिस्तान में एक बात और स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के पास पद तो है, पर प्रभाव नहीं है। असली मुकाबला संस्थागत ताकत वाले मुनीर और जनमानस के नायक इमरान खान के बीच ही है। एक ओर बंदूक की ताकत है तो दूसरी ओर वोट और भावना की ताकत। फील्ड मार्शल मुनीर भले ही पाकिस्तान पर राज कर रहे हैं लेकिन इमरान खान जेल से ही सही, पाकिस्तान के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाली लड़ाई को लगातार जीवित रखे हुए हैं। 

जहां तक यह सवाल कि मुनीर और इमरान खान के बीच दुश्मनी कब से शुरू हुई तो आपको बता दें कि इस संघर्ष की जड़ें 2019 में हैं। असीम मुनीर उस समय ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) के प्रमुख थे। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान को उनके करीबियों की भ्रष्ट गतिविधियों के बारे में रिपोर्ट दी थी। इनमें इमरान की पत्नी बुशरा बीबी के करीबी फ़राह गोगी और अन्य सहयोगियों का नाम सामने आया था। यह रिपोर्ट इमरान खान को अप्रिय लगी और परिणामस्वरूप मुनीर का ISI प्रमुख के पद से असामान्य रूप से शीघ्र तबादला कर दिया गया था। उन्हें केवल आठ महीने में ही हटा दिया गया था जो ISI प्रमुख के लिए असाधारण रूप से छोटा कार्यकाल था। यह वही क्षण था जब इमरान और असीम के बीच व्यक्तिगत खटास की शुरुआत हुई थी।

इसके बाद अप्रैल 2022 में इमरान खान को अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए सत्ता से हटाया गया। इस प्रक्रिया में सेना की भूमिका को लेकर गहन संदेह और नाराज़गी उभरी। इमरान और उनकी पार्टी ने खुलेआम सेना को "न्यूट्रल" कहकर तंज कसे और आर्मी नेतृत्व को सत्ता परिवर्तन का दोषी ठहराया। जब असीम मुनीर को नवंबर 2022 में पाकिस्तान का सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया था तब यह स्पष्ट हो गया कि सेना अब इमरान के खिलाफ पूरी तरह से संगठित हो चुकी है। मुनीर की नियुक्ति को इमरान की राजनीतिक वापसी की राह में सबसे बड़ी दीवार माना गया था।

इमरान खान ने असीम मुनीर की नियुक्ति के बाद सेना और ISI के खिलाफ खुलेआम बोलना शुरू कर दिया था। उन्होंने बार-बार कहा कि “मुख्य अपराधी” रावलपिंडी में बैठा है, जो मुनीर की ओर इशारा था। मई 2023 में जब इमरान को गिरफ्तार किया गया था और पूरे पाकिस्तान में हिंसा और प्रदर्शन भड़के थे तब पीटीआई के खिलाफ भीषण दमन अभियान शुरू हुआ था। हजारों कार्यकर्ता जेलों में डाले गए, कई नेता पार्टी छोड़ने पर मजबूर हुए और मीडिया में इमरान की छवि को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की गई थी।

इसके अलावा, फरवरी 2024 के चुनाव में पीटीआई को भले ही भारी जनसमर्थन मिला, लेकिन प्रचार, न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसे संस्थानों की मदद से परिणाम इमरान के विरुद्ध मोड़ा गया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पीटीआई की आरक्षित सीटें छीनकर शहबाज़ शरीफ की गठबंधन सरकार को सौंप दीं, जिससे सत्ता का नियंत्रण पूरी तरह सेना के पक्ष में चला गया। अब जबकि असीम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा भी मिल चुका है, तब वे लगभग निर्विवाद सत्ता के प्रतीक बन चुके हैं। लेकिन इमरान की लोकप्रियता अब भी ज़मीनी स्तर पर बरकरार है— विशेषकर युवा, प्रवासी पाकिस्तानियों और सोशल मीडिया पर। इस संघर्ष का अंत किसके पक्ष में होगा, यह कहना जल्दबाज़ी होगी। लेकिन यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान का राजनीतिक भविष्य अब केवल चुनावी नतीजों से नहीं, बल्कि इमरान और मुनीर के बीच चल रहे इस ऐतिहासिक टकराव से तय होगा।

प्रमुख खबरें

TMC में घमासान! Kakoli Ghosh का बड़ा इनकार, बोलीं- Mamata को Letter लिखने की खबर झूठी।

US-Iran Tension: भारतीय जहाजों पर हमले से नाराज भारत, अमेरिकी Diplomat को फिर भेजा समन

Shatrughan Sinha का बड़ा बयान: मेरी नेता सिर्फ़ Mamata Banerjee हैं, Abhishek नहीं

Welcome To The Jungle के ट्रेलर लॉन्च पर Akshay Kumar ने बताया अपना रिटायरमेंट प्लान- मुझे इस शब्द से नफ़रत है