साल 2025 में भारत ने चुनौतियों के बीच नए इतिहास रचे

By नीरज कुमार दुबे | Dec 31, 2025

वर्ष 2025 भारत और विश्व के लिए घटनाओं से भरा एक असाधारण कालखंड रहा। यह वर्ष केवल कैलेंडर का एक अध्याय नहीं, बल्कि अनुभवों, उपलब्धियों, त्रासदियों, संघर्षों और उम्मीदों की एक जीवंत कहानी बन गया। शायद ही कोई महीना ऐसा रहा हो जिसने समाज, राजनीति, कूटनीति, विज्ञान, खेल या जनमानस को किसी न किसी रूप में प्रभावित न किया हो।


जनवरी माह की बात करें तो आपको बता दें कि साल की शुरुआत प्रयागराज महाकुंभ से हुई, जिसने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति का विराट प्रदर्शन किया। करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना दिया। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर आस्था का यह महासागर जहां एक ओर भारत की परंपराओं की गहराई दिखाता है, वहीं अत्यधिक भीड़, यातायात अव्यवस्था और कुछ स्थानों पर अफरातफरी ने प्रशासनिक तैयारियों और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों को भी उजागर किया। यह आयोजन आस्था और सुरक्षा के संतुलन की आवश्यकता का प्रतीक बन गया।

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फरवरी महीना दिल्ली के लिए अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक साबित हुआ। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर महाकुंभ यात्रियों की अचानक बढ़ी भीड़ के कारण मची अफरातफरी में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई। इस त्रासदी ने सार्वजनिक परिवहन की तैयारी और आपात प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए। इसी महीने दिल्ली विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर लंबे अंतराल के बाद पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की, जबकि आम आदमी पार्टी के राजनीतिक प्रभाव में स्पष्ट गिरावट देखी गई।


मार्च अपेक्षाकृत शांत रहा, लेकिन इसी महीने खेल प्रेमियों के बीच एशिया कप को लेकर उत्साह चरम पर पहुंचा। भारत ने दुबई में तीसरी बार आईसीसी चैम्पियन्स ट्रॉफी जीतकर नया इतिहास रच दिया। इसी महीने महाराष्ट्र के नागपुर में हिंसा भड़की जिसमें 30 लोग घायल हो गये और जानमाल का काफी नुकसान हुआ।


अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पूरे देश के लिए गहरा आघात साबित हुआ। पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। निर्दोष नागरिकों की मौत ने जनमानस को झकझोर दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस तेज हो गई।


मई में भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी बदली हुई रणनीति का परिचय दिया। भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत सीमापार आतंकी ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई की गई। इस अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब केवल संयम नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई की नीति पर आगे बढ़ चुका है।


जून दो अलग अलग कारणों से इतिहास में दर्ज हुआ। एक ओर यह महीना नागरिक उड्डयन के लिए अत्यंत दुखद साबित हुआ जब अहमदाबाद से उड़ान भरते ही एक यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे ने सैंकड़ों परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया और विमान सुरक्षा, तकनीकी निगरानी तथा निजी एयरलाइनों की जवाबदेही पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी। दूसरी ओर, इसी महीने भारत ने विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला जून में एक्सिओम चार मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे। वे अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले पहले भारतीय और अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने। उन्होंने स्टेम सेल अनुसंधान, अंतरिक्ष कृषि जैसे प्रयोग किए, जो भारत के गगनयान कार्यक्रम के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।


जुलाई महीना खेल और विज्ञान दोनों के लिए यादगार रहा। खेल जगत में भारत ने एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान को हराकर अपना नौवां खिताब जीता। यह पांच विकेट की जीत आंकड़ों से कहीं आगे थी। भारत पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबला केवल खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का रंगमंच बन गया। युवा खिलाड़ी अभिषेक शर्मा की सराहना हुई, वहीं अनुभवी खिलाड़ियों ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता सिद्ध की। इस जीत ने देश भर में उत्सव का माहौल बना दिया। इसी महीने शुभांशु शुक्ला अठारह दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे। उन्होंने माइक्रोग्रैविटी में शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव, सूजन, पीठ दर्द और मतली जैसे अनुभव साझा किए, साथ ही पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने के अनुभव को जीवन बदल देने वाला बताया। हालांकि जुलाई में आरसीबी की आईपीएल जीत के बाद जश्न के दौरान मची भगदड़ ने खुशी को मातम में बदल दिया, जिसने एक बार फिर भीड़ प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर किया। जुलाई में जगदीप धनखड़ ने अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक रूप से सनसनी भी फैला दी थी।


अगस्त में स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में आतंकवाद के विरुद्ध सख्त नीति, राष्ट्रीय एकता और आत्मनिर्भर भारत पर विशेष जोर दिया गया। इसी महीने प्रधानमंत्री एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की व्यापार नीतियों में बदलाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल देखी गई, जिसका असर भारत पर भी पडा।


सितंबर में सीपी राधाकृष्णन भारत के नये उपराष्ट्रपति चुने गये। इसी महीने में भारतीय वायुसेना ने औपचारिक रूप से मिग-21 लड़ाकू विमानों को विदाई दी।


अक्टूबर कूटनीति और उपलब्धियों का महीना रहा। भारत ने काबुल में स्थित अपने तकनीकी मिशन को पूर्ण दूतावास में उन्नत किया, जो तालिबान की वापसी के बाद अफगानिस्तान में भारत की पहली औपचारिक कूटनीतिक विस्तार पहल थी। इसी महीने भारत को अपनी पहली मिसेज यूनिवर्स विजेता भी मिलीं। शेरी सिंह ने फिलीपींस में आयोजित 48वें संस्करण में यह खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसके साथ ही डिजिटल इंडिया के तहत नए साइबर सुरक्षा कानून और एआई नियमन नीति लागू हुई, जिसने तकनीक और निजता के संतुलन पर नई बहस को जन्म दिया।


नवंबर महीना खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हुआ। भारत ने नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका को हराकर पहली बार महिला क्रिकेट विश्व कप जीता। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 339 रनों का विशाल लक्ष्य हासिल करना महिला वनडे इतिहास की सबसे बडी सफल रन चेज में से एक रहा। इसी महीने भारतीय महिला दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम ने पहली ब्लाइंड विमेंस टी ट्वेंटी विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया। प्रधानमंत्री ने स्वयं टीम को सम्मानित किया। यह टूर्नामेंट दृष्टिबाधित महिला खिलाड़ियों के लिए समावेशन और वैश्विक पहचान की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हुआ। हालांकि इसी महीने लाल किले के पास हुए विस्फोट ने सुरक्षा एजेंसियों को फिर सतर्क कर दिया और संदेश दिया कि आतंकवाद का खतरा बरकरार है।


दिसंबर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। रूस के राष्ट्रपति के भारत दौरे से रक्षा और ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिली। इसी माह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया। मनोरंजन जगत के लिए यह वर्ष भावनात्मक क्षति से भरा रहा। धर्मेंद्र, असरानी और मनोज कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के निधन ने सिनेमा जगत को गहरे शोक में डाल दिया। यह केवल कलाकारों का नहीं, बल्कि एक पूरे युग का अवसान था।


देखा जाये तो समग्र रूप से वर्ष 2025 चेतावनी, सीख और संकल्प का वर्ष बनकर सामने आया। इसने सिखाया कि विकास, आस्था और उत्सव के साथ साथ सुरक्षा, संवेदनशीलता और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है। यह वर्ष भारत को अधिक सतर्क, अधिक संगठित और भविष्य के प्रति अधिक जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देकर गया।


-नीरज कुमार दुबे

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