जीत के बाद पहले भाषण में Tarique Rahman ने भारत के साथ संबंधों पर कहा, 'मेरे लिए बांग्लादेशियों का हित सर्वोपरि है'

By नीरज कुमार दुबे | Feb 14, 2026

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के प्रमुख तारिक रहमान ने आज संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी की भारी जीत के बाद देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया। चुनाव परिणाम आने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था। अपने भाषण में उन्होंने इस जीत को लोकतंत्र के लिए बलिदान देने वाले लोगों को समर्पित किया और कहा कि देश के बड़े हित में राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर आगे बढ़ना होगा।

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अपने संबोधन की शुरुआत में रहमान ने समर्थकों का आभार जताया और जनादेश को लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की जीत बताया। उन्होंने कहा कि आजादी पसंद और लोकतंत्र समर्थक लोगों ने एक बार फिर बीएनपी को जीत दिलाई है। यह जीत बांग्लादेश की है, लोकतंत्र की है और उन लोगों की है जिन्होंने लोकतंत्र के लिए सपना देखा और त्याग किया। उन्होंने यह भी माना कि नई सरकार के सामने कई कठिन चुनौतियां होंगी। रहमान ने कहा कि देश में लोकतंत्र की स्थापना का रास्ता तैयार हुआ है, लेकिन आगे की यात्रा आसान नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश ऐसी स्थिति से गुजर रहा है जहां अर्थव्यवस्था नाजुक है, संविधानिक और संस्थागत ढांचा कमजोर हुआ है और कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने भरोसा जताया कि नई सरकार इन मोर्चों पर सुधार के लिए काम करेगी।

संबोधन के बाद ढाका में मीडिया से बात करते हुए तारिक रहमान ने चुनावी जीत को लोकतंत्र की विजय बताया और आने वाली सरकार की प्राथमिकताएं भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि यह जनादेश जनता का भरोसा दिखाता है और अब इस भरोसे पर खरा उतरना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सत्ता परिवर्तन के इस दौर में सतर्क रहें और शांति बनाए रखें। भारत बांग्लादेश संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रहमान ने कहा कि उनकी विदेश नीति का आधार बांग्लादेश और यहां के लोगों का हित होगा। उन्होंने साफ कहा कि पहले देश और देशवासियों का हित आएगा और उसी के अनुसार विदेश नीति तय की जाएगी। सरकार के सामने मुख्य चुनौतियों के रूप में उन्होंने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना, कानून व्यवस्था सुधारना और सुशासन सुनिश्चित करना गिनाया।

हम आपको बता दें कि गुरुवार को हुए संसदीय चुनाव में बीएनपी को प्रचंड बहुमत मिला। यह चुनाव वर्ष 2024 के उस हिंसक जन आंदोलन के बाद पहला आम चुनाव था, जिसके चलते पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। निर्वाचन आयोग के अनुसार बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 212 सीटें जीतीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 77 सीटें मिलीं। शेख हसीना की अवामी लीग को इस चुनाव में भाग लेने से रोका गया था।

यह परिणाम साठ वर्ष के तारिक रहमान के लिए एक बड़ी राजनीतिक वापसी भी है। वह सत्रह वर्ष तक ब्रिटेन में निर्वासन में रहने के बाद पिछले दिसंबर में बांग्लादेश लौटे थे। वह पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं, जिनकी वर्ष 1981 में हत्या कर दी गई थी। उनकी माता खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री रह चुकी हैं और लंबे समय तक देश की राजनीति का अहम चेहरा रही हैं। बीएनपी करीब दो दशक बाद सत्ता में वापस आई है, इसलिए जनता की अपेक्षाएं भी काफी ऊंची मानी जा रही हैं।

उधर, जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने पहले मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया था, लेकिन बाद में उन्होंने हार स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सतर्क, सैद्धांतिक और शांतिपूर्ण विपक्ष की भूमिका निभाएगी। हम आपको यह भी बता दें कि बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग ने तेरहवें आम चुनाव में जीते नए सांसदों के नाम का गजट भी जारी कर दिया है, जिससे उनके शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। खबरों के अनुसार 300 में से 297 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए गजट जारी हुआ। इस अधिसूचना पर आयोग सचिव अख्तर अहमद के हस्ताक्षर हैं।

हम आपको यह भी बता दें कि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि बांग्लादेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी न्योता दिया जा सकता है। हालांकि देखना होगा कि मोदी सरकार यह न्योता स्वीकार करती है या नहीं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने संसदीय चुनावों की निगरानी के लिए भारत से स्वतंत्र पर्यवेक्षक भेजने को कहा था जिस पर नई दिल्ली ने सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। बांग्लादेश की सत्ता छोड़कर भागने के बाद से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में ही रह रही हैं और माना जा रह है उनके प्रत्यर्पण के लिए नई सरकार भी भारत से गुजारिश करेगी।

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