Jharkhand में बीजेपी ने सरकार से पूछे तीखे सवाल, ऐसे साध रही निशाना

By रितिका कमठान | Sep 12, 2024

झारखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियों में सभी पार्टियां जुटी हुई है। इन चुनावों को देखते हुए राजनीतिक सरगर्मियां जोर पकड़ने लगी है। इसी बीच बीजेपी 'मिला क्या' अभियान को लॉन्च कर चुकी है। इस अभियान के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार की समीक्षा की जा रही है। इस अभियान में झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार के कार्यकाल में की गई वादों और पूरा हुए वादों की सूची बनाकर उनकी समीक्षा की जा रही है।

बीजेपी का मिला क्या अभियान मूल रूप से राज्य सरकार द्वारा किए गए वादों और पूरे हुए वादों के बीच के जमीनी अंतर और मौजूद असमानता का आंकलन करने के लिए है। बीजेपी इससे सरकार के प्रभाव पर सवाल उठाएगी। जनता को इससे भी रूबरू करवाना है कि कई क्षेत्रों में अपेक्षाएं पूरी नहीं की गई है। इस चुनावी अभियान के जरिए हेमंत सोरेन और उनकी सरकार द्वारा चुनावों में हुए वादों का मूल्यांकन, समीक्षा की जाएगी। 

 

इन क्षेत्रों पर है मुख्य फोकस

युवाओं के लिए रोजगार

सोरेन सरकार ने पहले वर्ष में ही युवाओं के लिए एक लाख नौकरियां देने का वादा किया था। हालांकि सोरेन सरकार इस वादे को पूरी तरह से पूरा नहीं कर सकी है। बीजेपी ने बताया की कई युवा अब भी बेरोजगार है। इससे पता चलता है कि रोजगार सृजन करने में सोरेन सरकार विफल रही है।

 

कृषि ऋण माफ

हेमंत सोरेन ने किसानों का दो लाख रुपए का लोन माफ करने का फैसला किया था। बीजेपी ने बताया की असल में दो लाख की जगह सिर्फ 50 हजार रुपए की राशि का भुगतान किया जाता है। किसानों का वित्तीय बोझ कम करने के लिए सरकार पर्याप्त कदम नहीं उठा सकी है।

 

निशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा

सरकार ने निशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य का भी वादा किया है। बीजेपी का कहना है कि इसमें व्यापक स्तर पर काम नहीं हुआ है, जिससे ये पहलू काफी अनछुआ रह गया है।

 

औद्योगिक विकास

झारखंड में कई प्रमुख उद्योगों को लाने का वादा हुआ था। मगर ये वादा पूरा होना तो दूर की बात है बल्कि इस वादे में काफी कम काम हुआ है जो उम्मीद से बेहद कम है।

 

भ्रष्टाचार से मुक्ति

जेएमएम सरकार ने वादा किया था कि राज्य में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार होगी। वहीं अभियान अभियान के जरिए भ्रष्टाचार के मामलों को प्रकाश में लाना चाहती है। इससे सरकार के प्रति लोगों का विश्वास कम होगा और ट्रांसपेरेंसी भी बनी रहेगी।

 

भूमि संशोधन कानून 

राज्य में आदिवासी भूमि को व्यवसायिक अनुमति राज्य सरकार ने दी थी। इसमें संशोधन करने के लिए भी राज्य सरकार की जांच की जाती है। बीजेपी का कहना है की इन संशोधनों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसकी जांच बाकी है।

 

शराब पर प्रतिबंध

झारखंड में पूर्ण शराब बंद का वादा किया गया था, जो कि आंशिक रूप से लागू हुआ है।शराब पर कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाया गया है। बीजेपी का आरोप है कि ये राज्य सरकार की खामी का ही एक उदाहरण है।

 

भूख से हुई मौतों की सीबीआई जांच 

राज्य में कई लोगों की मौत भुखमरी के कारण हुई थी। इस दिशा में सीबीआई से जांच कराने को लेकर कोई खास काम नहीं किया गया है।

 

इन वादों की भी होगी जांच

सालाना गरीब परिवारों की आय को 72 हजार करना।

आधार के जरिए राज्य की महिलाओं को लोन देना, जो नहीं दिया है।

नव विवाहिताओं को सोने के सिक्के देने का वादा हुआ था जो पूरा नहीं किया गया।

गरीब विधवाओं को भत्ता भूगतान नहीं हुआ है।

वैवाहिक महिलाओं को 2000 रुपए मासिक दिए जाने का वादा था जो अधूरा है।

जनता के असंतुष्ट होने पर बीजेपी ने बनाई रणनीति

भाजपा के इस 'मिला क्या' अभियान को जनता ने काफी प्यार दिया है। वादों और प्रदर्शन के बीच के अंतर को बताता ये अभियान जनता के लिए रिपोर्ट कार्ड की तरह है। जनता ने शासन के कई पहलुओं जिसमें रोजगार सृजन, कृषि ऋण राहत, बुनियादी ढांचे के विकास के संबंध मे चिंताएं है, उन्हें व्यक्त किया गया है। ये प्रतिक्रिया भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मतदाताओं की निराशा झलकती है। भाजपा इन मुद्दों को जनता के सामने पेश कर झामुमो सरकार के लिए परेशानियां खड़ी कर सकती है। खुद को भाजपा बेहतर बताने की कोशिश में जुटी है। 

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