दो दिन की यात्रा में ही मोदी ने तमिलनाडु की राजनीति के सारे पत्ते फेंट दिये

By नीरज कुमार दुबे | Jul 29, 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की दो दिवसीय तमिलनाडु यात्रा ने न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि अन्नाद्रमुक (AIADMK) कार्यकर्ताओं के लिए भी यह एक बड़ा उत्साहवर्धन साबित हुई। आगामी 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले इस यात्रा को भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

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हम आपको यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु यात्रा के दौरान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई से भी मुलाकात की। यह मुलाकात कई स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से तमिलनाडु भाजपा में आंतरिक गुटबाजी और मतभेदों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। अन्नामलाई के साथ प्रधानमंत्री की सार्वजनिक नजदीकी ने उनके विरोधी खेमों को संकेत दिया है कि केंद्रीय नेतृत्व को उन पर पूरा भरोसा है। साथ ही मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और एनडीए नेता OPS से कोई मुलाकात नहीं की। यह संकेत स्पष्ट है कि भाजपा और एआईएडीएमके गठबंधन में OPS की भूमिका कम होती जा रही है। एआईएडीएमके ने पहले ही OPS को पार्टी से बाहर कर दिया है और भाजपा भी यह संदेश दे रही है कि वह EPS (ई.के. पलानीस्वामी) के नेतृत्व को ही गठबंधन का प्रमुख चेहरा मानती है। माना जा रहा है कि OPS जल्द ही खुद एनडीए छोड़ देंगे।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण था उनका गंगईकोंडा चोलापुरम मंदिर में जाना। यह मंदिर चोल वंश की गौरवगाथा का प्रतीक है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। मोदी ने पारंपरिक तमिल परिधान वेष्टी और अंगवस्त्रम पहनकर मंदिर में पूजा-अर्चना की और आदि तिरुवातिरै उत्सव में भाग लिया। यह यात्रा राजेंद्र चोल प्रथम की जयंती के अवसर पर हुई, जिन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया तक साम्राज्य का विस्तार करने वाले महान शासकों में गिना जाता है। भाजपा सांस्कृतिक रूप से तमिल गौरव को सम्मान देना चाहती है साथ ही DMK के ‘कीलाड़ी’ विमर्श का जवाब देना चाहती है जिसमें भाजपा पर तमिलनाडु के इतिहास को ‘मिटाने’ का आरोप लगाया जाता है। साथ ही पार्टी यह दिखाना चाहती है कि भाजपा तमिल संस्कृति, भाषा और परंपराओं के सम्मान में किसी से पीछे नहीं है।

मोदी की यात्रा ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भाजपा और एआईएडीएमके का गठबंधन स्थायी और विश्वास पर आधारित है। इससे कार्यकर्ताओं के मन में जो असमंजस था, वह दूर हुआ है। देखा जाये तो रोड शो और मंदिर यात्रा जैसे आयोजनों ने दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को साथ आने का मंच दिया, जिससे चुनावी मोर्चे पर तालमेल बेहतर होगा। साथ ही भाजपा तमिल सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से डीएमके के तमिल पहचान के विमर्श को चुनौती दे रही है।

हम आपको यह भी बता दें कि तमिलनाडु लंबे समय से द्रविड़ राजनीति और पेरियारवादी विचारधारा का गढ़ रहा है, जहां हिंदुत्व आधारित राजनीति को अपेक्षाकृत कम सफलता मिली है। इसलिए भाजपा के सामने कुछ चुनौतियाँ हैं। जैसे- तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय पर आधारित राजनीति की मजबूत परंपरा है। साथ ही यहां मतदाता हिंदुत्व से ज्यादा आर्थिक विकास, क्षेत्रीय गौरव और सामाजिक कल्याण योजनाओं को महत्व देते हैं।

हालांकि भाजपा ने अपने हिंदुत्व कार्ड को सांस्कृतिक तमिल गौरव के साथ जोड़ने की कोशिश की है। गंगईकोंडा चोलापुरम जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी इसी रणनीति का हिस्सा है। यदि भाजपा इस विमर्श को स्थानीय पहचान के सम्मान के साथ संतुलित कर पाती है, तो वह धीरे-धीरे तमिलनाडु में अपनी स्वीकार्यता बढ़ा सकती है।

बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी की तमिलनाडु यात्रा न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही बल्कि भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन को एक नया राजनीतिक आयाम भी दे गई। 2026 विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन डीएमके के लिए गंभीर चुनौती पेश कर सकता है। हालांकि भाजपा को यह समझना होगा कि तमिलनाडु में हिंदुत्व कार्ड सीधे सीधे चलाना थोड़ा कठिन होगा। सफलता तभी मिलेगी जब भाजपा स्थानीय सांस्कृतिक गौरव, विकास और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को साथ लेकर आगे बढ़े।

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