By नीरज कुमार दुबे | Jul 09, 2026
पाकिस्तान से जारी तनाव के बीच अफगानिस्तान के मंत्री के भारत दौरे ने दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा संदेश दे दिया। जिस समय पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान के साथ टकराव की राह पर है और हाल में उसकी हवाई कार्रवाई की गूंज अब भी बनी हुई है, उसी दौरान भारत और अफगानिस्तान ने नई दिल्ली में मिलकर ऐसा बड़ा खेल कर दिया जिसने क्षेत्रीय समीकरणों को नई दिशा दे दी। दोनों देशों ने केवल कूटनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाने का संकेत नहीं दिया, बल्कि कृषि, खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन, अनुसंधान, व्यापार और मानवीय सहयोग को दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का आधार बनाने पर भी सहमति जताई। यह पहल पाकिस्तान के लिए स्पष्ट संदेश है कि भारत अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को केवल सहायता तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उसे विकास और स्थिरता का मजबूत भागीदार भी बनाएगा।
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई विस्तृत द्विपक्षीय बैठक रही। इस बैठक में कृषि साझेदारी की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के साथ भविष्य के सहयोग का व्यापक खाका तैयार किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कृषि अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण, सिंचाई, पशुपालन और कृषि व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
बैठक में खाद्य सुरक्षा, बीज व्यवस्था और फसल उत्पादकता सबसे प्रमुख विषय रहे। अफगानिस्तान ने अपनी कृषि व्यवस्था में गेहूं के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्नत बीज प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत से सहयोग मांगा। इस पर भारत ने उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं, मक्का और आलू के बीज उपलब्ध कराने, जलवायु के अनुकूल तथा पोषण से भरपूर नई किस्में साझा करने और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की वैज्ञानिक विशेषज्ञता उपलब्ध कराने की पेशकश की। इसका उद्देश्य अफगानिस्तान की कृषि उत्पादन क्षमता और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।
जल संकट और बदलती जलवायु भी बातचीत के केंद्र में रहे। अफगान प्रतिनिधिमंडल ने सिंचाई, जल संचयन और जलग्रहण क्षेत्र विकास में सहयोग की आवश्यकता जताई। भारत ने सूक्ष्म सिंचाई, वर्षा जल संचयन, खेत तालाब, छोटे बांध और जल के दक्ष उपयोग की अपनी सफल तकनीकों का अनुभव साझा करते हुए अफगानिस्तान में टिकाऊ सिंचाई व्यवस्था विकसित करने में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
दोनों देशों ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और क्षमता निर्माण को भी नई गति देने पर सहमति व्यक्त की। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अफगान कृषि संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान, शिक्षक और विद्यार्थी आदान प्रदान, प्रयोगशाला सहयोग तथा वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और कृषि विशेषज्ञों के प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके अलावा बागवानी, डेयरी, पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन, पशु स्वास्थ्य, फसल कटाई के बाद प्रबंधन, डिजिटल कृषि और मिट्टी की गुणवत्ता सुधार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बैठक में दोनों पक्षों ने कृषि व्यापार और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की अपार संभावनाओं को भी स्वीकार किया। कृषि उत्पादों, गुणवत्तापूर्ण बीजों और मूल्य संवर्धित उत्पादों के व्यापार को प्रोत्साहन देने तथा व्यापारिक संस्थानों के बीच सीधा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। अफगानिस्तान ने अपनी कृषि उत्पाद श्रृंखला को मजबूत करने और अपने कृषि उत्पादों की बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी भारत से सहयोग का अनुरोध किया। दोनों देशों ने दीर्घकालिक सहयोग के लिए एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने पर भी सहमति बनाई, जो भविष्य की साझेदारी का विस्तृत मार्ग तैयार करेगा।
देखा जाये तो यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले सप्ताह पाकिस्तान की ओर से अफगान क्षेत्र में की गई हवाई कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों सहित कई निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी। भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना स्पष्ट समर्थन दोहराया था। भारत ने यह भी दोहराया कि वह अफगानिस्तान को मानवीय सहायता और विकास परियोजनाओं के माध्यम से लगातार सहयोग देता रहेगा।
हम आपको बता दें कि भारत पहले से ही अफगानिस्तान को आवश्यक दवाइयां और टीके उपलब्ध करा रहा है। सत्रह जून को भारत ने पांच टन आवश्यक दवाइयों की खेप काबुल भेजी थी। इससे पहले 22 मई को बीस टन टीके भेजकर अफगान बच्चों के टीकाकरण अभियान को मजबूत करने में मदद की गई थी। इससे स्पष्ट है कि भारत का सहयोग केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय और विकास आधारित भी है।
देखा जाये तो सामरिक दृष्टि से यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण माहौल में भारत और अफगानिस्तान का संबंधों को नई ऊंचाई देना इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पहुंच को विकास, विश्वास और जन कल्याण के माध्यम से मजबूत कर रही है। कृषि सहयोग के बहाने दोनों देशों ने दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी की नींव रखी है, जिससे अफगानिस्तान की स्थिरता को बल मिलेगा और भारत की क्षेत्रीय भूमिका भी अधिक प्रभावशाली बनेगी। इसके साथ ही यह संदेश भी गया है कि दक्षिण एशिया की नई रणनीति केवल सुरक्षा और सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, जल संसाधन, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और विकास आधारित सहयोग से तय होगी। यही कारण है कि अफगान मंत्री की यह यात्रा भारत की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण अध्याय बनकर उभरी है।