By अभिनय आकाश | Aug 05, 2026
जब भारत के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह वियतनाम की धरती पर कदम रखते हैं तो वह सिर्फ एक मेहमान नहीं होते हैं। बल्कि वो उस ब्रह्मोस की ताकत और सुखोई के भरोसे को साथ लेकर चलते हैं जिसने पूरे दक्षिण चीन सागर की लहरों में एक नई हलचल पैदा कर दी है? दरअसल डिप्लोमेसी में तकनीक का बहुत बड़ा महत्व होता है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हनोई में महान क्रांतिकारी नेता होची मिन को श्रद्धांजलि देकर यह साफ कर दिया कि भारत वियतनाम के संघर्ष और उसके गौरवशाली इतिहास का सम्मान बखूबी करता है। लेकिन असली गेम शुरू हुआ जब वो रेजीमेंट 927 पहुंचे। रेजीमेंट 927 वियतनाम की वायुसेना की रीड है। यहां एयर चीफ ने सीधे वियतनामी फाइटर पायलट से बातचीत की। वियतनाम भी सुई 30 एम के भी उड़ाता है और भारत के पास इसका सबसे बड़ा बेड़ा है।
भारत ने वियतनाम को क्रेडिट ऑफ लाइन यानी लोन भी दी है ताकि वह अपनी रक्षा जरूरतों को आसानी से पूरा कर सके और यही तो दोस्ती है और यही दोस्ती में दिखता है कि भारत अब सिर्फ अपनी सुरक्षा नहीं कर रहा है बल्कि अपने दोस्तों को भी अभेद्य बना रहा है और चीन को यह बता रहा है कि हरकत करना बंद कर दीजिए वरना अंजाम बुरा होगा। अब चीन वियतनाम के समुद्री क्षेत्र पर अक्सर दावे करता है और हमने आपको अक्सर वीडियो में दिखाया भी है सबूतों के साथ। यहां भारत की एंट्री चीन के स्ट्रिंग ऑफ पल्स का सबसे बड़ा जवाब है। अगर चीन हिंद महासागर में पैर पसारने की कोशिश करता है तो भारत वियतनाम के जरिए चीन के पिछले दरवाजे यानी कि दक्षिण चीन सागर जिसे हम साउथ चाइना सी कहते हैं उसमें अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। एयर चीफ मार्शल और जनरल गुएन तान कुओं के बीच हुई बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा शब्द का बार-बार इस्तेमाल हुआ। यह कूटनीतिक भाषा में बीजिंग को एक सीधा और स्पष्ट मैसेज था, संदेश था कि हम अब अकेले नहीं हैं। यानी वियतनाम भारत के साथ खड़ा है। भारत और वियतनाम का रिश्ता नया नहीं है। 1954 में जब वियतनाम फ्रांसीसी शासन से लड़ रहा था तब भारत ने उसका समर्थन कर दिया था।