By Ankit Jaiswal | Nov 02, 2026
भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते को दोनों देशों के कारोबार के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था। खासतौर पर स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क आधा करने के फैसले से ब्रिटेन की शराब कंपनियों को भारतीय बाजार में फायदा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब इसी छूट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारत सरकार की ओर से थोक में मंगाई जा रही स्कॉच व्हिस्की के आयात की जांच की जा रही है। इस मामले ने करीब 65 अरब डॉलर के वैश्विक कारोबार का ध्यान खींचा है और दोनों देशों के बीच हुए समझौते के लागू होने के बाद यह पहला बड़ा व्यापारिक विवाद बन गया है।
अब विवाद इस बात पर है कि आयात शुल्क में मिली छूट थोक में आने वाली स्कॉच व्हिस्की पर लागू होगी या नहीं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारी डियाजियो, पर्नो रिकार्ड, रेडिको खेतान और एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स जैसी कंपनियों से इस मुद्दे पर सवाल कर रहे हैं। सरकार का तर्क है कि थोक में आयात होने वाली स्कॉच को 75 प्रतिशत शुल्क वाली श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसके बजाय उस पर पहले की तरह 150 प्रतिशत शुल्क लगना चाहिए।
अधिकारियों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में सीमा शुल्क वर्गीकरण में एक नई श्रेणी जोड़ी गई थी। यह उन मिश्रित शराब उत्पादों के लिए है, जिनका इस्तेमाल पेय पदार्थ बनाने में किया जाता है। सरकार का मानना है कि थोक में आने वाली स्कॉच इसी श्रेणी में आती है। पिछले कुछ सप्ताह में कर अधिकारियों ने जांच के तहत कई कंपनियों के कार्यालयों की तलाशी भी ली है।
हालांकि शराब कंपनियां सरकार की इस व्याख्या से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि थोक स्कॉच और मिश्रित शराब उत्पाद अलग-अलग चीजें हैं। भारत की शराब कंपनियों को नियमों पर सलाह देने वाली संस्था याना एडवाइजर्स के संस्थापक रजनीश सिंह के मुताबिक, मिश्रित शराब में स्वाद या अन्य बदलाव किए जाते हैं, जबकि थोक स्कॉच माल्ट किए गए जौ और पानी से तैयार की गई डिस्टिल्ड शराब होती है।
इस विवाद का असर इसलिए भी बड़ा हो सकता है, क्योंकि ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच का बड़ा हिस्सा बोतलों के बजाय थोक में भारत पहुंचता है। स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के अनुसार, भारत 2025 में मात्रा के लिहाज से स्कॉच का सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा। उस साल ब्रिटेन से भारत में 220 मिलियन से ज्यादा बोतलों के बराबर स्कॉच भेजी गई। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, ब्रिटेन से आने वाली कुल स्कॉच का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा थोक में आयात होता है।
इस स्कॉच का इस्तेमाल भारत में बनने वाली विदेशी शराब यानी आईएमएफएल की कई लोकप्रिय किस्मों में किया जाता है। इसमें भारतीय अनाज से बनी शराब के साथ कुछ मात्रा में स्कॉच मिलाई जाती है। पर्नो रिकार्ड की ब्लेंडर्स प्राइड इसका एक उदाहरण है। कंपनी के अनुसार, इसमें भारतीय अनाज से बनी शराब और आयातित स्कॉच माल्ट का मिश्रण इस्तेमाल होता है।
मामले पर ब्रिटेन सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। उसका कहना है कि वह भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है, ताकि व्यापार समझौते में तय शुल्क के तहत ब्रिटिश कंपनियों को निर्यात की सुविधा मिल सके। अब दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत से तय होगा कि थोक स्कॉच पर कम आयात शुल्क का लाभ मिलेगा या नहीं और इस विवाद का शराब उद्योग पर कितना असर पड़ेगा।