By अभिनय आकाश | Nov 10, 2021
चीन का पुराना फार्मूला है इन्वेस्टमेंट और व्यापार के लुभावने वादे। श्रीलंका हो या मालदीव पाकिस्तान हो या नेपाल, इन देशों में खूब इनवेस्ट करता है और तरक्की के सपने बेचता है और फिर इसी कर्ज की राह अपने सामरिक हित साधता है। भारत ने चीन के इसी पुराने फॉर्मूले पर निशाना साधा है। भारत ने चीन पर तीखा प्रहार करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से कहा कि किसी भी देश की सहायता कर उसे कर्जदार नहीं बनाया है। अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की देखभाल : बहिष्करण, असमानता और संघर्ष विषय पर आयोजित खुली बहस के दौरान विदेश राज्य मंत्री डा.राजकुमार रंजन सिंह ने कहा कि भारत ने परिषद को सूचित किया कि उसने हमेशा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हुए अपने विकास साझेदारी प्रयासों के साथ दुनिया भर में वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। हालांकि, इसने कहा कि सहायता प्रदान करना ऋणग्रस्तता पैदा करने का कोई रूप नहीं था बल्कि दूसरों को बढ़ने में सहायता करना था।
गौरतलब है कि भारत की तरफ से अंतरराष्ट्रीय मंच पर बयान ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजनाओं का उपयोग करके कर्ज के जाल और क्षेत्रीय आधिपत्य पर वैश्विक चिंता पैदा की है। चीन एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक के देशों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भारी रकम खर्च करता रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट की माने तो इसके तहत उसने सलाना 85 अरब डॉलर के करीब खर्च किए हैं। चीन की महत्वकांक्षा अब 42 देशों के लिए मुसबीत बनती जा रही है। अब इन देशों को चीन के 385 अरब डॉलर की चिंता सताने लगी है। एक स्टडी के अनुसार इन देशों पर चीन का कर्ज उनकी जीडीपी के 10% से अधिक पहुंच गया है।