By नीरज कुमार दुबे | Jun 27, 2026
असम के श्रीभूमि जिले से लेकर, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा तक भारत बांग्लादेश सीमा पर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा पर घुसपैठ, अवैध प्रवेश और जबरन दबाव की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हम आपको बता दें कि असम के श्रीभूमि जिले के बिलाबारी सीमा क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश सीमा रक्षक बल के बीच कई घंटे तक आमना सामना चला। बताया गया कि बांग्लादेशी पक्ष ने भारतीय सीमा पर हथियार तानकर दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि दूसरी ओर सीमा के पास बांग्लादेशी गांवों से आए लोग लाठी, चाकू और बांस के डंडों के साथ जमा हो गए।
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार सीमा सुरक्षा बल ने संयम बरता और स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोका। बाद में दोनों देशों ने अतिरिक्त बल तैनात किए। स्थानीय प्रशासन और असम पुलिस को भी सतर्क कर दिया गया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
उधर, त्रिपुरा में भी अवैध घुसपैठ का एक और मामला सामने आया है। चट्टग्राम के रहने वाले सेंतु देबनाथ और प्रिया नाथ बिना वैध पासपोर्ट के भारत में घुस आए। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी जिसके बाद सिलाचरी से अगरतला जा रही बस को रोक कर दोनों को पकड़ लिया गया। उनके पास से भारतीय मुद्रा और बांग्लादेशी सिम वाले मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। यह घटना बताती है कि सीमा पार से अवैध प्रवेश का सिलसिला अभी भी जारी है और घुसपैठिए नए रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
दरअसल, अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के केंद्र में रहा है। पश्चिम बंगाल चुनावों में भी यह प्रमुख मुद्दा बना। केंद्र सरकार ने बांग्लादेश पर दबाव बढाते हुए साफ कहा है कि अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार दो हजार से अधिक ऐसे लोगों की सूची लंबित है जिनकी नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया बांग्लादेश की ओर से पूरी नहीं की गई।
उधर, पश्चिम बंगाल सरकार का दावा है कि हजारों अवैध घुसपैठियों को वापस भेजा जा चुका है और सैकड़ों लोग होल्डिंग केंद्रों में रखे गए हैं। दूसरी ओर बांग्लादेश सीमा रक्षक बल दावा कर रहा है कि उसने कई बार ऐसी कोशिशों को नाकाम किया है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में तल्खी बढ़ती दिखाई दे रही है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि हाल में हुई सीमा समन्वय बैठक के बाद संयुक्त पत्रकार वार्ता तक नहीं हो सकी।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि सीमा विवाद अब केवल सुरक्षा मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता जा रहा है। बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्व भारत विरोधी माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भारत में भी घुसपैठ के खिलाफ जन आक्रोश बढ रहा है।
देखा जाये तो भारत ने हमेशा मानवीय मूल्यों और कूटनीति को महत्व दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश की सीमाओं से खिलवाड़ किया जाए। अवैध घुसपैठ केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन और सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। सीमा पार से आने वाले घुसपैठियों को यह समझ लेना चाहिए कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं और अवैध प्रवेश करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।
बहरहाल, जरूरत इस बात की है कि दोनों देश बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से हालात को संभालें। सीमा पर तनाव, धमकी और उकसावे की राजनीति किसी के हित में नहीं है। लेकिन साथ ही भारत को अपनी सीमाओं की रक्षा में किसी भी प्रकार की ढिलाई भी नहीं बरतनी चाहिए। घुसपैठियों और उन्हें संरक्षण देने वालों को साफ संदेश देते रहना होगा कि भारतीय सीमा की ओर बढ़ाया गया हर अवैध कदम सख्त जवाब लेकर आएगा।