Prabhasakshi NewsRoom: Bangladesh ने Kashmir का गलत नक्शा दिखाकर ‘चिढ़ाना’ चाहा ! India ने तत्काल मुंहतोड़ जवाब दे डाला

By नीरज कुमार दुबे | Jul 07, 2026

कश्मीर को लेकर बांग्लादेश की एक दुस्साहसी हरकत पर भारत ने तुरंत और बेहद सख्त जवाब देकर साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर पर गलत बयानबाजी या भ्रामक प्रस्तुति कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम आपको बता दें कि ढाका में आयोजित एक विदेश नीति संगोष्ठी के दौरान उस समय माहौल अचानक गरमा गया जब बांग्लादेश के पूर्व राजदूत तारिक ए करीम ने अपनी प्रस्तुति में ऐसा नक्शा दिखाया जिसमें कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दर्शाया गया था। भारत ने इस पर तुरंत पलटवार किया। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की द्वितीय सचिव पूजा कुमारी झा ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराते हुए दो टूक कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और प्रस्तुत किया गया नक्शा पूरी तरह गलत है। भारत की इस कड़ी प्रतिक्रिया ने साफ संदेश दे दिया कि नई दिल्ली किसी भी मंच पर भारत की संप्रभुता से जुड़ी किसी भी छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेगी।

दरअसल बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना पर व्यवहार्यता अध्ययन का समझौता हुआ है। यह परियोजना केवल नदी प्रबंधन तक सीमित नहीं है बल्कि इसके जरिये चीन बांग्लादेश में अपना रणनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ाना चाहता है। हम आपको बता दें कि तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से गुजरते हुए बांग्लादेश पहुंचती है और भारत के अत्यंत संवेदनशील सिलीगुडी गलियारे के बेहद करीब बहती है। यही कारण है कि भारत इस परियोजना को केवल जल प्रबंधन का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मान रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन समर्थित यह परियोजना भविष्य में भारत के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकती है। तीस्ता नदी कई स्थानों पर भारत की सीमा से मात्र दस से बारह किलोमीटर की दूरी पर बहती है और यह पूरा इलाका चिकन नेक यानी सिलीगुडी गलियारे के बेहद करीब स्थित है। यह वही संकरा भूभाग है जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। यदि इस इलाके में किसी भी प्रकार की अस्थिरता या बाहरी दखल बढ़ता है तो उसका सीधा असर भारत की सामरिक सुरक्षा पर पड़ सकता है।

चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना इस परियोजना से जुड़ी हुई है। इस कंपनी पर पहले भी एशिया और अफ्रीका में दोहरे उपयोग वाली आधारभूत परियोजनाएं खड़ी करने के आरोप लगते रहे हैं। आशंका यह है कि नदी प्रबंधन और आधारभूत निर्माण के नाम पर चीन इस क्षेत्र में अपने तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की स्थायी मौजूदगी बढ़ा सकता है। भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह यही है कि यह पूरा इलाका उसकी रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील सीमा के आसपास स्थित है।

तीस्ता परियोजना का आकार भी बहुत विशाल है। बांग्लादेश इस योजना के तहत करीब चौदह करोड़ घन मीटर गाद निकालना चाहता है। इसके अलावा 171 वर्ग किलोमीटर भूमि पुनः प्राप्त करने, बयासी घाट बनाने और दो सौ चौबीस किलोमीटर सड़क नेटवर्क विकसित करने की योजना है। नदी किनारे पर्यटन, सिंचाई, आर्थिक क्षेत्र और शहरी केंद्र विकसित करने की भी तैयारी है। बांग्लादेश का दावा है कि इससे बाढ़ नियंत्रण, कृषि उत्पादन और रोजगार में भारी सुधार होगा।

बांग्लादेश ने चीन का साथ क्यों चुना, इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण यह कि इतनी विशाल परियोजना के लिए भारी वित्तीय निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत है, जिसमें चीन पहले से अग्रणी माना जाता है। दूसरा कारण भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे को लेकर वर्षों से चला आ रहा गतिरोध है। बांग्लादेश लंबे समय से नदी के पानी में अधिक हिस्सेदारी मांगता रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल की आपत्तियों के चलते कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया। इसी बीच भारत ने भी इस परियोजना के लिए लगभग एक अरब डॉलर की सहायता का प्रस्ताव दिया था, लेकिन बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और शेख हसीना सरकार के हटने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसका फायदा उठाते हुए चीन ने तेजी दिखाई और ढाका ने बीजिंग के साथ सहयोग फिर से सक्रिय कर लिया।

भारत ने हालांकि अब भी अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट रखा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी कह चुके हैं कि भारत गंगा और तीस्ता सहित सभी जल समझौतों पर बांग्लादेश के साथ बातचीत जारी रखेगा। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी साफ कहा है कि भारत ने तीस्ता परियोजना को लेकर अपनी चिंताएं ढाका तक पहुंचा दी हैं और नई दिल्ली इस मामले से जुड़े हर घटनाक्रम पर नजर रख रही है।

बहरहाल, कश्मीर पर बांग्लादेश की हिमाकत और उसके बाद तीस्ता परियोजना में चीन की बढ़ती घुसपैठ ने दक्षिण एशिया की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और रणनीतिक हितों पर किसी भी प्रकार की चोट बर्दाश्त नहीं करेगा। आने वाले समय में तीस्ता केवल जल बंटवारे का विवाद नहीं रहेगा बल्कि यह भारत, चीन और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक शक्ति संतुलन का अहम केंद्र बन सकता है।

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