By अभिनय आकाश | Jul 07, 2026
कल तक जिसके एक इशारे पर अमेरिका हर सही गलत कर्म करने को तैयार रहता था। वो इसराइली वजीर-ए-आजम बेंजामिन नेतन्याहू इन दिनों बुरी तरीके से फंसते जा रहे हैं। मामला अब तुर्की के उस महासंकट तक जा पहुंचा है जहां इसराइल को अपनी हवाई बादशाहत खत्म होने का खौफ सता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन से तुर्की के अंकारा दौरे के लिए उड़ान भर रहे हैं। 7 जुलाई को वहां लैंड होते ही नेतन्याहू को जिस बात का सबसे गहरा डर था अगर ट्रंप वही करते हैं तो इससे कहीं ना कहीं इसराइल को बहुत बड़ा झटका लगेगा। यानी एर्दोगान से मिलते ही अगर ट्रंप ने वही कर दिया तो मिडिल ईस्ट में इसराइल की सल्तनत ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा। दरअसल वाशिंगटन के गलियारों से तुर्की को F35 स्टेल्थ फाइटर जेट दिए जाने के साफ संकेत आने लगे हैं। इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन पहले ही अमेरिकी कांग्रेस को नोटिफाई कर चुका है कि तुर्की को 700 मिलियन डॉलर यानी 70 करोड़ डॉलर के अत्याधुनिक जनरल इलेक्ट्रिक इंजन सौंपे जा रहे हैं।
हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसराइल को लेकर एक सख्त और तीखी बयानबाजी की। उन्होंने तेल अभी की नींद उड़ा दी। वेंस के बयानों ने साफ कर दिया कि अमेरिका बिना किसी शर्त के इसराइल की हर जंग की जवाबदेही उठाने को तैयार नहीं। अमेरिका के लिए अब नेशनल इंटरेस्ट सबसे ऊपर है। इधर नेतन्याहू और तुर्की के राष्ट्रपति रिचब तैयब एर्दोगान के दरमियान हाल के दिनों में जो जुबानी जंग देखने को मिली उसने आग में घी का काम किया।
एर्दोगान ने इसराइल को खुलेआम चेतावनी दी कि वह अपनी सरहदों पर ताकत की मनमानी बर्दाश्त तो नहीं करेंगे। वहीं नेतन्याहू ने खुलेआम ट्रंप से गुहार लगाई कि तुर्की को यह कहां तक हथियार ना दिया जाए। लेकिन अमेरिका ने इसराइल की इस गिड़गुड़ाहट को पूरी तरीके से दरकिनार किया है। यह पूरी तस्वीर गवाही दे रही है कि वैश्विक राजनीति अब बदल रही है।
इसराइल का हुलिस्म टूट चुका है जिसके दम पर वह अमेरिका को अपनी उंगलियों पर नचाता था। तुर्की को जटिन और F35 की संभावित सौगात देने का मन बनाकर ट्रंप ने यह साफ किया कि वाशिंगटन अब अंकारा को इसराइल की जिद की भेंट नहीं चढ़ाएगा। नेतन्याहू की कूटनीतिक शिकस्त इसराइल को भविष्य में क्या कोई बड़ा झटका देगी यह सवालिया निशान है। अब देखना है कि ट्रंप एर्दोगान से मुलाकात के बाद आखिरकार वो कौन सा गिफ्ट तुर्की को देते हैं जिससे एर्दोगान खुश हो जाएंगे।