AI Talent का Superpower बना भारत, CEA नागेश्वरन बोले- दुनिया में अब हम दूसरे नंबर पर

By Ankit Jaiswal | Jul 09, 2026

भारत अब केवल दुनिया के लिए सस्ती सेवाएं उपलब्ध कराने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक कंपनियों के लिए नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनीयां लगातार भारत में अपने वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित कर रही हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी कहा है कि भारत इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे मजबूत देशों में शामिल हो चुका है और एआई से जुड़े कौशल के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बता दें कि वैश्विक क्षमता केंद्र किसी मल्टीनेशनल कंपनी की ऐसी इकाई होती है, जहां से कंपनी अपने टेक्निकल काम, अनुसंधान, विश्लेषण, डिजिटल सेवाएं, साझा कारोबारी प्रक्रियाएं और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों का संचालन करती है। पहले इन कार्यों को बाहरी कंपनियों के माध्यम से कराया जाता था, लेकिन अब बड़ी कंपनियां इन्हें अपने ही केंद्रों के जरिए संचालित कर रही हैं।

वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि करीब दो दशक पहले भारत में ऐसे केंद्रों की संख्या बेहद सीमित थी और उन्हें मुख्य रूप से बैक ऑफिस के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब देश में इनकी संख्या बढ़कर दो हजार से अधिक हो गई है। इन केंद्रों में 20 लाख से अधिक पेशेवर कार्य कर रहे हैं और यह संख्या जल्द ही 23 लाख तक पहुंचने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि इन वैश्विक क्षमता केंद्रों से होने वाला वार्षिक कारोबार 60 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और आने वाले समय में इसके 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। गौरतलब है कि इन केंद्रों का योगदान अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग दो प्रतिशत हो गया है। इतना ही नहीं, देश के प्रमुख शहरों में बनने वाले नए कार्यालय परिसरों का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं केंद्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि अब भारत में स्थापित वैश्विक क्षमता केंद्र केवल एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। मुंबई और बेंगलुरु से वैश्विक बैंक अपने जोखिम प्रबंधन और कारोबार से जुड़े डिजिटल मंच संचालित कर रहे हैं। वहीं चेन्नई और पुणे में वाहन निर्माता कंपनियां नए वाहनों और उनमें इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का विकास कर रही हैं। इसके अलावा अर्धचालक कंपनियां भारत में चिप डिजाइन तैयार कर रही हैं, जबकि दवा क्षेत्र की कंपनियां नैदानिक विश्लेषण और अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य भी यहीं से कर रही हैं।

उन्होंने जर्मनी की विज्ञान और प्रौद्योगिकी कंपनी मर्क का उदाहरण देते हुए बताया कि कंपनी ने हाल ही में बेंगलुरु में एक एकीकृत परिसर शुरू किया है। इस केंद्र में करीब 3,300 विशेषज्ञ आंकड़ा विज्ञान, एआई और उद्यम टेक्नोलॉजी से जुड़े कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परिसर मर्क का दुनिया में सबसे बड़ा डिजिटल क्षमता केंद्र बन गया है। साथ ही भारत अब जर्मनी, अमेरिका और चीन के बाद मर्क का चौथा सबसे बड़ा कार्यबल केंद्र भी बन चुका है।

वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत में मौजूद 1,200 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र अब गंभीर रूप से एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े कार्यों पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, भारत अब उद्यम आधारित एआई प्रतिभा का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। इन केंद्रों में विकसित बौद्धिक संपदा, नए उत्पाद और पेटेंट भारत में तैयार किए जा रहे हैं तथा कई वैश्विक कंपनियों के महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले पदों पर भारत में बैठे विशेषज्ञ कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई अपने आप विकसित, संचालित या नियंत्रित नहीं होती है। इसके लिए विशेषज्ञों की जरूरत होती है जो इन प्रणालियों को तैयार करें, उनका परीक्षण करें, आवश्यक सुधार करें और यह तय करें कि इनका उपयोग कहां और किस उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि इस तरह का बड़ा और लगातार बढ़ता काम अब भारत में किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को केवल नई तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसी तकनीकों के विकास और दिशा तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। यही आने वाले समय में देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति का मजबूत आधार बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

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