बिखरती दुनिया का नया बॉस बना भारत, अमेरिका पर जयशंकर ने ये क्या कह दिया?

By अभिनय आकाश | Dec 01, 2025

दुनिया बदल रही है और भारत उस बदलाव का नेतृत्व कर रहा है। डॉ एस. जयशंकर ने कहा कि अमेरिका, जो दशकों तक वैश्विक व्यवस्था को चलाता था, अब बिल्कुल नई शर्तों पर इंगेजमेंट कर रहा है। ग्लोबलाइजेशन के टूटने से लेकर चीन की मोनोपॉली, एनर्जी जियोपॉलिटिक्स, एफटीए की नई दौड़ और मल्टीपोलर दुनिया सबमें भारत सबसे संतुलित और सबसे शक्तिशाली खिलाड़ी बनकर उभर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल पर कोलकाता में कहा कि आज की दुनिया में अमेरिका और चीन दोनों ही अन्य देशों के सामने कठिन विकल्प खड़ा करने के लिए जिम्मेदार हैं। जयशंकर ने कहा कि अमेरिका अब नए नियमों और शर्तों के तहत देशों से जुड़ रहा है और एक समय में एक ही देश के साथ डील कर रहा है।

दूसरी ओर, चीन हमेशा अपने तय नियमों के तहत काम करता रहा है। अब उसमें और इजाफा ही हुआ है। इस स्थिति ने दुनिया के कई देशों को दुविधा में डाल दिया है। वे समझ नहीं पा रहे कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर ध्यान देना चाहिए या उन सौदों पर, जो इसी प्रतिस्पर्धा की आड़ में चुपचाप आकार ले रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि ग्लोबलाइजेशन के दबाव, सप्लाई चेन की अस्थिरता और बढ़ते जोखिमों ने देशों को ऐसी रणनीतियां अपनाने पर मजबूर कर दिया है, जिनसे वे हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें। यही कारण है कि देश एक ओर अमेरिका और चीन से सीधे संवाद बनाए हुए हैं, तो दूसरी ओर वे एक-दूसरे के साथ भी नए विकल्प और साझेदारियां तलाश रहे हैं। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) को लेकर देशों की बढ़ती दिलचस्पी इसी प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है। जयशंकर ने इसे 'हेजिंग की नीति' बताया।

इसे भी पढ़ें: ट्रेड टेंशन के बीच विदेश मंत्री Jaishankar ने कहा, अर्थव्यवस्था पर राजनीति हावी, आत्मनिर्भरता भारत की जरूरत

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि दुनिया की करीब एक-तिहाई मैन्युफैक्चरिंग चीन में होती है, जिससे सप्लाई चेन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वैश्विक सप्लाई चेन की अनिश्चितता जोखिम बढ़ा रही है। उन्होंने यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व की बदलती परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। लैटिन अमेरिका में नए अवसर दिखाई दे रहे हैं। अब, कृपया यह भी ध्यान रखें कि विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रों का सापेक्षिक भार भी एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। चाहे वह विनिर्माण हो, ऊर्जा हो, व्यापार हो, वित्त हो, प्रौद्योगिकी हो, प्राकृतिक संसाधन हों, संपर्क हो या गतिशीलता हो, दुनिया अब वैसी नहीं रही जैसी एक दशक पहले थी। वर्तमान में वैश्विक उत्पादन का एक तिहाई हिस्सा चीन में होता है। इसने आपूर्ति श्रृंखलाओं के लचीलेपन और विश्वसनीयता पर प्रकाश डाला है।

इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Cyclone Ditwah से जूझ रहे Sri Lanka की मदद के लिए भारत ने खोल दिये मदद के सारे दरवाजे

ऊर्जा की बात करें तो, अमेरिका जीवाश्म ईंधन का एक प्रमुख आयातक से एक महत्वपूर्ण निर्यातक बन गया है। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा की दुनिया में चीन का दबदबा है। सहभागिता की लागत कूटनीति। व्यापार समझौता आपूर्ति, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, यूरोप। 

प्रमुख खबरें

IRFC में सरकार के Offer For Sale से मचा हड़कंप, Infosys की AI डील ने निवेशकों को बनाया मालामाल।

White House में India के Tariff पर मचा था बवाल, Donald Trump ने अधिकारियों को सरेआम किया खारिज

America से तनाव के बीच Kim Jong Un का बड़ा दांव, North Korea अब समुद्र में बढ़ाएगा परमाणु ताकत

France में Heatwave का जानलेवा कहर, 40 लोगों की मौत, Eiffel Tower भी समय से पहले बंद