By नीरज कुमार दुबे | Jul 31, 2026
विदेश सचिव विक्रम मिसरी की लगातार दो अहम यात्राओं ने भारत की बदलती कूटनीतिक रणनीति की साफ तस्वीर पेश की है। पहले उन्होंने चीन जाकर द्विपक्षीय संबंधों और सीमा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बातचीत की और इसके तुरंत बाद भूटान पहुंचकर भारत के सबसे करीबी पड़ोसी के साथ विकास और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दी। इन दोनों यात्राओं का क्रम यह संकेत देता है कि नई दिल्ली एक तरफ बीजिंग के साथ संवाद बनाए रखना चाहती है, तो दूसरी तरफ हिमालयी क्षेत्र में अपने सबसे भरोसेमंद साझेदार भूटान के साथ रिश्तों को और मजबूत कर अपनी सामरिक स्थिति को भी सुदृढ़ करने में जुटी है।
इसी क्रम में भारत और भूटान के बीच पांचवें भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता का आयोजन हुआ, जिसमें भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत विकास सहयोग की प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई। दोनों देशों ने 332 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 नई प्रोजेक्ट टाइड असिस्टेंस (PTA) परियोजनाओं को मंजूरी दी। इसके साथ ही 13वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत स्वीकृत PTA परियोजनाओं की संख्या बढ़कर 82 हो गई है, जिनकी कुल लागत 6,860 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
हम आपको बता दें कि भारत पहले ही भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा कर चुका है। इस सहायता में प्रोजेक्ट टाइड असिस्टेंस, हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स, आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम और प्रोग्राम ग्रांट शामिल हैं। वार्ता के दौरान इन सभी मदों में धनराशि के उपयोग और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की गई।
भारत ने आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए 1,250 करोड़ रुपये, हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 735.20 करोड़ रुपये और प्रोग्राम ग्रांट के तहत 200 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर दिए हैं। नई स्वीकृत परियोजनाएं आधारभूत ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, शहरी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं, जो भूटान के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यात्रा के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और विदेश एवं विदेश व्यापार मंत्री डी.एन. धुंगयेल से भी अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, संपर्क (कनेक्टिविटी), लोगों के बीच संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों सहित द्विपक्षीय संबंधों के लगभग सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई।
भूटान के राजा के साथ मुलाकात में मिसरी ने विकास सहयोग की प्रगति की जानकारी साझा की। भारतीय दूतावास के अनुसार, राजा ने इन उपलब्धियों की सराहना करते हुए दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ भी किया। थिम्फू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का वर्चुअल उद्घाटन किया गया, जिन्हें "ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड ओपन स्पेसेस इन थिम्फू" परियोजना के तहत विकसित किया गया है। इसके अलावा "एक्सेलेरेट ई-मोबिलिटी अपटेक इन भूटान" परियोजना के तहत खरीदे गए 45 इलेक्ट्रिक वाहन भी भूटानी सरकार को सौंपे गए।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देते हुए भारत के एक्सिम बैंक और भूटान की सरकार के बीच 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण सुविधा (Line of Credit) को लागू करने के लिए अम्ब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट समझौते पर हस्ताक्षर हुए। यह राशि भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में खर्च की जाएगी। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में नई दिल्ली स्थित एम्स और भूटान की खेसर ग्यालपो यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस के बीच अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
भारत ने दोहराया कि वह भूटान की विकास प्राथमिकताओं और वहां की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप सहयोग जारी रखेगा। वहीं भूटान ने भारत के सहयोग को अपनी 13वीं पंचवर्षीय योजना की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। दोनों देशों ने अगली विकास सहयोग वार्ता नई दिल्ली में आयोजित करने पर भी सहमति जताई।
हालांकि इस पूरी यात्रा का महत्व केवल विकास सहयोग तक सीमित नहीं है। इसके पीछे गहरे सामरिक और भू-राजनीतिक संकेत भी छिपे हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी भूटान पहुंचने से ठीक पहले चीन की दो दिवसीय यात्रा पूरी करके लौटे थे। बीजिंग में उन्होंने चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर भारत-चीन संबंधों के पूरे दायरे पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता दोहराई और व्यापार, आर्थिक सहयोग तथा राजनीतिक एवं जन-स्तरीय संपर्क बढ़ाने के उपायों पर विचार किया।
मिसरी ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। यह यात्रा ऐसे समय हुई जब हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच संवाद फिर से तेज हुआ है। इससे पहले मनीला में आसियान बैठकों के इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच भी महत्वपूर्ण वार्ता हुई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन यात्रा के तुरंत बाद भूटान जाना एक सुनियोजित कूटनीतिक क्रम का हिस्सा माना जा सकता है। भारत यह संकेत देना चाहता है कि वह चीन के साथ संवाद बनाए रखने का पक्षधर है, लेकिन अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। भूटान भारत की उत्तरी सुरक्षा व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है। डोकलाम जैसे संवेदनशील क्षेत्र और सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के संदर्भ में भूटान का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में विकास सहयोग, ऊर्जा निवेश, आधारभूत ढांचे और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना केवल आर्थिक पहल नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश भी है।
दरअसल, भारत की मौजूदा पड़ोसी नीति में विकास और सुरक्षा अब एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं। चीन के साथ संवाद और भूटान के साथ गहरी साझेदारी, इन दोनों को समानांतर आगे बढ़ाकर नई दिल्ली यह संदेश दे रही है कि वह प्रतिस्पर्धा और सहयोग, दोनों के बीच संतुलन साधते हुए हिमालयी क्षेत्र में अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए बहुस्तरीय कूटनीति पर भरोसा कर रही है।
-नीरज कुमार दुबे