PM Mark Carney का भारत दौरा, 10 साल की Uranium Supply और Energy सेक्टर पर होगी अरबों की डील

By एकता | Jan 26, 2026

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले हफ्ते में भारत आ सकते हैं। कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश पटनायक के अनुसार, इस यात्रा के दौरान यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े समझौते होने की उम्मीद है। कार्नी का लक्ष्य कनाडा के व्यापार को सिर्फ अमेरिका तक सीमित न रखकर दूसरे देशों के साथ भी मजबूत करना है। हाल ही में दावोस में उन्होंने कहा था कि दुनिया की पुरानी व्यवस्था बदल रही है और अब कनाडा जैसे देशों को मिलकर एक मजबूत और निष्पक्ष दुनिया बनाने की जरूरत है।


कूटनीतिक सुधार की कोशिश

प्रधानमंत्री कार्नी अपने देश के निर्यात को अगले दस सालों में दोगुना करना चाहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने चीन के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियों और कृषि उत्पादों पर टैक्स कम करने का समझौता किया है। अब वे भारत के साथ भी बिगड़े हुए रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। याद रहे कि पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के समय एक विवाद के कारण दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी, जिसे अब कार्नी पटरी पर ला रहे हैं। पिछले साल पीएम मोदी ने उनके बुलावे पर जी7 समिट में हिस्सा लिया था और अब दोनों देश व्यापारिक बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

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यूरेनियम डील पर फोकस

मार्च में होने वाली इस यात्रा के दौरान भारत और कनाडा के बीच 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते' पर औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है। हाई कमिश्नर पटनायक ने बताया कि कार्नी अपनी यात्रा के दौरान परमाणु ऊर्जा, तेल, गैस, पर्यावरण और शिक्षा जैसे विषयों पर कई छोटे-बड़े समझौते करेंगे। इसमें सबसे खास 10 साल के लिए यूरेनियम सप्लाई की डील हो सकती है, जिसकी कीमत लगभग 2.8 बिलियन कनाडाई डॉलर होने का अनुमान है।

 

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ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर जोर

कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन भी इस समय भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रधानमंत्री की यात्रा की तारीख अभी पूरी तरह तय नहीं है, लेकिन कनाडा भारत को यूरेनियम बेचने और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हॉजसन का मानना है कि भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और उसे खनिज पदार्थों की बहुत जरूरत है, जिसकी सप्लाई कनाडा आसानी से कर सकता है। कार्नी की इस संभावित यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

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