By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 03, 2026
ढाका, तीन अक्टूबर बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार को कहा कि भारत अपदस्थ बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी के लिए कोई समयसीमा नहीं बता सकता क्योंकि उनके प्रत्यर्पण के अनुरोध पर कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है। ढाका में एक निजी विचार मंच द्वारा आयोजित चर्चा में बांग्लादेश की ओर से हसीना के प्रत्यर्पण की बार-बार की जा रही मांगों से जुड़े सवालों के जवाब में त्रिवेदी ने कहा, “हसीना की वापसी को लेकर कोई भी आपको समयसीमा नहीं बता सकता।” हसीना (79) अगस्त 2024 में बड़े सरकार-विरोधी आंदोलन के बीच अपनी सरकार के सत्ता से हटने के बाद ढाका से निकलकर भारत आ गई थीं। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बांग्लादेश सरकार के हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर स्थापित प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जा रहा है।
त्रिवेदी ने कहा, “उस समय तक हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं। हमारे पास शायद ही कोई विकल्प था। पड़ोसी होने के नाते परिस्थितियों की वास्तविकता को स्वीकार करना हमारा कर्तव्य था, क्योंकि कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं जिनके लिए आप तैयार नहीं होते।” उन्होंने कहा, “हमारे पास क्या विकल्प था?
अगर आपने कहा होता कि नहीं, हम उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे, हम उतरने की अनुमति नहीं देंगे, तो पता नहीं क्या होता।” त्रिवेदी ने कहा कि बांग्लादेश में “दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों” के कारण यह स्थिति पैदा हुई थी और ऐसी परिस्थितियां दुनिया में कहीं भी दोबारा नहीं आनी चाहिए। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने शनिवार को ‘बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026’ के पांचवें संस्करण के उद्घाटन सत्र में संबोधन किया था। हालांकि, उसी कार्यक्रम में पैनल चर्चा के दौरान त्रिवेदी की टिप्पणी के समय वह मौजूद नहीं थे।
हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर त्रिवेदी की ये पहली स्पष्ट टिप्पणियां थीं। इससे पहले वह “राजनीति” से जुड़े मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार करते रहे थे। हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम प्रशासन ने आठ अगस्त 2024 को पदभार संभाला था और अगले 18 महीनों तक बांग्लादेश में शासन किया था।
यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में काफी गिरावट आई। इस अवधि में हसीना पर एक विशेष न्यायाधिकरण में उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। अंतरिम सरकार ने उनकी अवामी लीग पार्टी को भी प्रतिबंधित कर दिया और राजनयिक नोट के जरिए उनके प्रत्यर्पण की मांग की।
बारह फरवरी को हुए चुनाव के बाद सत्ता में आई तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार ने हसीना की पार्टी पर प्रतिबंध को बरकरार रखा और उनके प्रत्यर्पण की मांग बार-बार दोहराई। हसीना का प्रत्यर्पण भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव का एक प्रमुख कारण बन गया है और इसका असर रहमान की प्रस्तावित नयी दिल्ली यात्रा पर भी पड़ा है। भारत ने पिछले महीने रहमान को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, जबकि एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण फरवरी से ही लंबित था।
रहमान ने ब्रिक्स आउटरीच शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया था। पांच अगस्त को नयी दिल्ली से हसीना द्वारा की गई ऑनलाइन प्रेस वार्ता ने भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाया। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि हसीना की ऑनलाइन प्रेस वार्ता से रहमान की यात्रा के लिए माहौल “खराब” हुआ है।
भारत ने कहा है कि हसीना से संबंधित मीडिया कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और मंच पर बांग्लादेश सरकार के बारे में कही गई किसी भी बात का वह समर्थन नहीं करता। हालांकि द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट के बावजूद, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने मंगलवार को त्रिवेदी से मुलाकात के बाद कहा कि रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर बातचीत में प्रगति की संभावना के प्रति उनका देश “सकारात्मक” है, हालांकि अभी यात्रा की कोई तारीख तय नहीं हुई है।