India के साथ खड़ा हो गया China! Pakistan हैरान, Shehbaz Sharif, Asim Munir के लौटते ही Jinping ने किया बड़ा खेल

By नीरज कुमार दुबे | May 28, 2026

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर के चीन दौरे से लौटते ही चीन ने एक बड़ा सामरिक और कूटनीतिक खेल खेल दिया। एक ओर बीजिंग में पाकिस्तान के साथ चीन ने अपने रिश्तों को अटूट बताते हुए सुरक्षा, रक्षा और पश्चिम एशिया में साझा रणनीति पर खुला समर्थन दिया, वहीं दूसरी ओर उसी समय भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर रचनात्मक और भविष्य उन्मुख वार्ता कर संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत भी दे दिया।

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यह बैठक ऐसे समय हुई जब 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पैदा हुए लंबे सैन्य गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में दोनों देश धीरे धीरे आगे बढ़ रहे हैं। कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के बाद देपसांग और डेमचोक जैसे अंतिम तनाव वाले क्षेत्रों में भी सैनिकों की वापसी का समझौता हुआ था। हम आपको यह भी याद दिला दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान और तियानजिन में हुई बैठकों ने रिश्तों को नई दिशा देने का प्रयास किया। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ संबंध आगे बढ़ाना चाहता है।

दूसरी ओर चीन ने पाकिस्तान के साथ भी अपने संबंधों को और मजबूत करने का खुला संकेत दिया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की हालिया बीजिंग यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शहबाज शरीफ को पुराना मित्र बताते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान की मित्रता अटूट है। उन्होंने पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन का भरोसा दोहराया। इतना ही नहीं, चीन ने पाकिस्तान की उस भूमिका की भी सराहना की जिसमें उसने पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का प्रयास किया। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को सुरक्षा सहयोग और अधिक व्यापक बनाना चाहिए तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए।

हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं था। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, कृषि और सुरक्षा सहयोग से जुड़े पंद्रह समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। पाकिस्तान ने चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के अगले चरण को तेजी से आगे बढ़ाने का भरोसा भी दिया। साथ ही पाकिस्तान ने चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की यह दोहरी रणनीति बेहद महत्वपूर्ण है। एक तरफ वह पाकिस्तान को अपने सबसे भरोसेमंद सामरिक साझेदार के रूप में मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के साथ सीमा पर तनाव कम करके एशिया में स्थिरता बनाए रखना चाहता है। इसका सबसे बड़ा कारण अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा है। चीन नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह अमेरिका के रणनीतिक खेमे में चला जाए। इसलिए वह सीमा विवाद को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहा है।

इसी बीच, सिंगापुर में जारी एशिया प्रशांत क्षेत्रीय सुरक्षा आकलन रिपोर्ट ने भी भारत की सामरिक चुनौतियों को रेखांकित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए पारंपरिक सैन्य खतरे का केंद्र आगे भी चीन और पाकिस्तान ही रहेंगे। रिपोर्ट के अनुसार भारत की स्थिति ऐसी है जिसमें न युद्ध है और न पूर्ण शांति। भारत अपनी सेना को बड़े पारंपरिक युद्धों के लिए तैयार कर रहा है क्योंकि उसे दोनों परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसियों के साथ सीमा विवादों का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत की सैन्य नीति लगातार विकसित हो रही है और पाकिस्तान के खिलाफ 2016, 2019 और 2025 में की गई कार्रवाईयों ने उसकी रणनीतिक सोच को नया रूप दिया है। दूसरी ओर चीन हिंद महासागर क्षेत्र और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्रों में अपनी सैन्य उपस्थिति तेजी से बढ़ा रहा है, जिससे एशिया में शक्ति संतुलन का नया दौर शुरू हो गया है।

बहरहाल, चीन ने एक ही समय में भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ सक्रिय कूटनीतिक चाल चलकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह एशिया में अपनी रणनीतिक पकड़ और प्रभाव को हर हाल में बनाए रखना चाहता है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि मोदी सरकार की आक्रामक और संतुलित कूटनीति ने चीन को भी अपने रुख में नरमी लाने के लिए मजबूर किया है। गलवान संघर्ष के बाद भारत ने जिस मजबूती से सीमा पर सैन्य दबाव बनाया, आर्थिक मोर्चे पर सख्ती दिखाई और वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत की, उसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि चीन एक तरफ पाकिस्तान को साधने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ भारत के साथ संबंध सामान्य करने के लिए लगातार संवाद बढ़ा रहा है। भारत ने यह संदेश दे दिया है कि नया भारत दबाव में झुकने वाला नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर बातचीत करने वाला देश है। आने वाले समय में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां निश्चित रूप से भारत के लिए चुनौती रहेंगी, लेकिन मोदी सरकार की रणनीतिक तैयारी, सैन्य मजबूती और वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता ने भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत कर दी है।

-नीरज कुमार दुबे

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