भारत, चीन को संबंधों में उतार-चढ़ाव के ''विचित्र चक्र'' को तोड़ना चाहिए: चीनी मंत्री

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 01, 2019

बीजिंग। चीन के उप विदेश मंत्री लुओ झाओहुई ने कहा है कि भारत और चीन को अपने मतभेदों को नियंत्रित करने की कोशिश से परे जाकर द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव के विचित्र चक्र को तोड़ना चाहिए। लुओ ने बीजिंग में आयोजित चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम में कहा कि चीन और भारत का एक साथ उदय 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है।

चीनी विदेश मंत्रालाय की ओर से जारी बयान के अनुसार लुओ ने कहा कि दोनों देशों को मतभेदों को नियंत्रित करने के तरीकों से आगे बढ़कर द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव के विचित्र चक्र को तोड़ना चाहिए, आपसी विश्वास मजबूत करना चाहिए, मतभेदों से उचित तरीके से निपटना चाहिए, साझे विकास के मार्ग तलाशने चाहिए और बड़े विकासशील देशों के शांतिपूर्वक रहने और मिलकर विकास करने के तरीके खोजने चाहिए।

इसे भी पढ़ें: एक हफ्ते की शांति के बाद हांगकांग में फिर प्रदर्शनकारी निकालेंगे रैलियां, यह है नई वजह!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई 2015 में चीन यात्रा के दौरान थिंक-टैंक फोरम की स्थापना की गई थी। भारत और चीन के शीर्ष राजनयिक इस बैठक में इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों को क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग करना चाहिए और एशियाई सदी को साकार करने के लिए बहुआयामी संबंधों को अवश्य कायम रखना चाहिए। यहां शनिवार को संपन्न हुए चौथे भारत-चीन थिंक टैंक फोरम में दोनों देशों के राजनयिकों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों ने सर्वसम्मति से यह विचार जाहिर किया कि दोनों देशों को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर करीबी सहयोग करना चाहिए। 

इसे भी पढ़ें: ट्रंप ने हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक विधेयक पर किए हस्ताक्षर, चीन ने जताया कड़ा विरोध

इस फोरम का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ वल्डर्स अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) और चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज (सीएएसएस) ने संयुक्त रूप से किया। भारतीय दूतावास ने यहां जारी एक बयान में कहा कि एशियाई सदी में भारत-चीन संबंध के तहत इस मंच ने भारत और चीन के बीच करीबी विकास साझेदारी बनाने सहित विभिन्न मुद्दों पर गहराई से चर्चा की। बयान में कहा गया है कि यह चर्चा दोस्ती और खुलेपन की भावना के साथ हुई तथा इसने दोनों देशों के बीच परस्पर समझ बढ़ाने में योगदान दिया। इसमें कहा गया है कि बैठक में भाग लेने वालों ने इसके बारे में सर्वसम्मत विचार प्रकट किया कि पड़ोसी एवं तेजी से विकास करने वाले देश होने के नाते यह जरूरी है कि भारत और चीन, दोनों देश द्विपक्षीय रूप से और क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग करेंगे। भारत-चीन संबंध उभरती एशियाई सदी के लिए एक अहम संबंध है। 

इसे भी पढ़ें: अमेरिका ने हांगकांग के लोगों को दी जिला परिषद चुनाव शंतिपूर्ण संपन्न होने पर बधाई

बैठक में हिस्सा लेने वाले 15 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आईसीडब्ल्यूए के महानिदेशक टीसीए राघवन ने किया। राघवन ने कहा कि उपमहाद्वीप की दो बड़ी शक्तियां, भारत और चीन को अवश्य ही बहुआयामी संबंध कायम रखना चाहिए। चीन में नियुक्त भारत के उप राजदूत ए. विमल ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह सदी बेशक भारत और चीन की है। उन्होंने कहा कि हमें शोध कार्यों के लिये युवा विद्वानों की एक दूसरे देशों के शोध केंद्रों में संक्षिप्त यात्रा या तीन या छह महीनों का इंटर्नशिप कराने पर विचार करना चाहिए।

प्रमुख खबरें

Allahabad High Court ने वाराणसी भूमि अधिग्रहण याचिकाएं खारिज कीं, पुराना मुआवजा सही ठहराया

Kariba Lake में 90 की क्षमता वाली नौका पलटी, 15 यात्रियों की मौत और 27 लापता

Nikhil Gupta को US Court अब 20 नवंबर को सुनाएगी सजा, पीड़ित के अनुरोध पर टली सुनवाई

Mizoram में MZP प्रदर्शन के बाद MPSC भर्ती रुकी, 14 अगस्त तक की परीक्षाएं रद्द